फेक न्यूज़ का इतिहास - तर्कशील भारत

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Sunday, January 19, 2020

फेक न्यूज़ का इतिहास


हरिशंकर परसाई ने लिखा था "हम सब गलत किताबों की पैदावार हैं" हरिशंकर परसाई की यह बात आज और भी ज्यादा प्रासंगिक है क्योंकि आज के दौर में गलत जानकारियों का स्रोत सिर्फ किताबें ही नही रह गई हैं खबरों का हर माध्यम लोगों तक गलत जानकारियों को थोक के भाव मे पहुंचा रहा है इसलिए आज हम कह सकते हैं कि आज के दौर में हर आदमी फेक न्यूज़ का शिकार है. आप कहेंगे कि "फेक न्यूज़" से क्या फर्क पड़ता है तो जनाब शायद आपको मालूम नही की आज की दुनिया के लिए "फेक न्यूज़" कितना बड़ा हथियार है पूंजीवादी व्यवस्था की होड़ में शामिल लोग कंपनियां कार्पोरेट्स राजनैतिक दल नेता अभिनेता धर्मगुरु आज ये सभी इसका बखूबी इस्तेमाल करते हैं अपने प्रोडक्ट्स को सबसे बढ़िया बताने के साथ साथ अपने कॉम्पिटिटर को नीचा दिखाने के लिए भी आज के दौर में फेक न्यूज़ का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है कई सिलिब्रिटीज लाखो रुपया खर्च करती हैं ताकि उनके फैन्स की तादाद बढ़ सके उनकी छवि लगातार बेहतर बनाये रखने लिए भी फेक न्यूज़ तैयार किये जाते हैं. टेलीविजन अखबार शोशल मीडिया सब फेक न्यूज़ परोस कर मोटा कमा रहे हैं धर्म राजनीति और पूंजीपतियों की चाटुकारिता के लिए तरह तरह के फेक न्यूज़ तैयार किये जा रहे हैं और फेक न्यूज़ के इसी हथियार से तैयार हुई भीड़ का अलग अलग तरीकों से भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है. आज के दौर में "फेंक न्यूज़" के नाम पर दंगे हो जाते हैं सरकारें बदल जाती हैं कम्पनियां तबाह हो जाती हैं इसलिए आज की दुनिया मे "फेक न्यूज़" का कारोबार अपनी सर्वोच्च ऊंचाइयों तक पहुंचा हुआ है. फेक न्यूज़ का इतिहास सभ्यता के इतिहास से भी ज्यादा पुराना है यह मूसा से शुरू हुआ या इब्राहिम से ठीक ठीक तो पता नही लेकिन इतना जरूर मालूम है कि दोनों ने फेक न्यूज़ का भरपूर इस्तेमाल किया था. आप कहेंगे कि इतने पुराने समय मे "फेक न्यूज़" कहाँ से आ गया ? तो जनाब पुराने समय में फैलाये गये फेक न्यूज़ का असर तो आज तक जारी है बकराईद पर कटने वाले करोड़ों बकरे उसी फेक न्यूज़ का शिकार ही तो हैं जिसे हजारों साल पहले इब्राहिम ने फैलाया था उन्होंने अपने लोगों को बताया कि जब वे अपने बेटे को बलि देने जा रहे थे तो आकाशवाणी हुई कि तुम अपने एग्जाम में फर्स्ट डिवीजन से पास हुए हो जाओ इसकी जगह किसी जानवर को कुर्बान कर देना. आप कहेंगे कि यह फेक न्यूज़ नही था तो चलिए इस वारदात की थोड़ी सी पड़ताल कर लेते. जब हजरत इब्राहीम ने अपने बेटे को पत्थर पर लिटा कर चाकू से वार करना चाहा तो ईश्वर की ओर से आकाशवाणी हुई और उसने कहा कि यह तुम्हारी आजमाइश थी जिसमे तुम खरे उतरे हो इससे यह पता चलता है कि आकाशवाणी वाला ईश्वर सर्वज्ञानी नही था अगर वह सर्वज्ञानी होता तो उसे इब्राहिम की मंशा पता होती सर्वज्ञानी ईश्वर को इब्राहिम की परीक्षा लेने की जरूरत क्या थी ?. इब्राहिम ने अपने कबीले को बताया तब काबिले के लोगों को आकाशवाणी के बारे में मालूम हुआ मतलब आकाशवाणी तो हुई लेकिन उसे केवल इब्राहिम ने सुना है न हैरानी की बात ?? अगर सच मे कोई आकशवाणी हुई होती तो इब्राहिम के कबीले वाले भी उस बात को सुने होते लेकिन यहां मामला आकाशवाणी का नही फेक न्यूज़ का था. एक बात और कि अगर अब्राहम को सच मे ऐसा कोई आदेश मिला था कि अपने बेटे को जबह करो तो उन्हें इस काम को अंजाम देने के लिए कबीले से इतनी दूर एकांत में जाने की जरूरत ही क्या थी ? वहीं सबके सामने इस वारदात को अंजाम देते आकाशवाणी भी वही सबके सामने हो जाती फिर अब्राहम को किसी से अपनी बात मनवाने की जरूरत ही नही पड़ती. असल मे अब्राहिम ने अपने लोगों को फेक न्यूज़ का शिकार बनाया था. ईसा मसीह मरने के तीसरे दिन जी उठे यह भी तो फेक न्यूज़ ही है जब मर ही गये थे तो जिंदा कैसे हो गए और जिंदा होना ही था तब मरे ही क्यों ? यह यहोवा का चमत्कार था तो जब सलीब पर चढ़ाए गये थे तब क्यों नही दिखाया यह चमत्कार. असल मे जीसस की मृत्यु के बाद यह फेक न्यूज़ तैयार हुआ की वे तीसरे दिन जी उठे ताकि भक्तों को लगे कि वास्तव में ऐसा हुआ था. अब आप कहेंगे कि करोड़ों लोग फेक न्यूज़ पर विश्वाश कैसे कर लेते हैं ? जब प्रचारमाध्यम के द्वारा फेक न्यूज़ का असर लाखों लोगों तक पहुंचता है तो यह उस कालखंड के लोगों की सोच पर गहरा असर डालता है लोग उस फेक न्यूज़ को सच मानते हुए उसे अपनी अगली पीढ़ी की सोच का हिस्सा बना देते हैं इस तरह पुरातन युग का फेक न्यूज़ दिमागों की यात्राएं करते हुए सभ्यताओं की खोल में घुस कर परंपराओं का हिस्सा बन जाता है. आज की तमाम परम्पराएं धर्म त्योहार अतीत के असंख्य फेक न्यूज़ का ही तो परिणाम हैं. आज तमाम धर्मों की बुनियाद फेक न्यूज़ के आडंबर पर ही तो टिकी हुई हैं इन सभी धर्मों की तमाम कहानियां परम्पराएं और त्योहारों के पीछे फेक न्यूज़ का विशाल ढेर छिपा है जिसे हम न जाने कब से आंखे मूंदे ढोते चले आ रहे हैं. इस्लाम की बात करें तो इसकी शुरुआत ही फेक न्यूज़ से हुई है हिरा की गुफा में हजरत साहब को अल्लाह का रिप्रेजेंटेटिव जिब्रील मिला जिसने उन्हें यह खुशखबरी दी कि आपको as a पैगेम्बर अपॉइंट किया गया जाता है. इस फेक न्यूज़ पर सबसे पहले यकीन करने वाली उनकी पत्नी खदीजा थीं यानी वो औरत सबसे पहली मुसलमान थीं इस तरह धीरे धीरे मक्का शहर के कुछ लोगों को इस फेक न्यूज़ पर भरोसा हो गया और शुरुआती मुसलमानों की एक छोटी सी कम्युनिटी तैयार हो गई ये पहले लोग थे जो हजरत साहब के फैलाये फेक न्यूज़ पर आधारित डिसऑर्डर के शिकार हुए जिन्हें मुसलमान कहा गया आगे चलकर इस एक फेक न्यूज़ को सच साबित करने के लिए हजरत साहब को अनेकों फेक न्यूज़ और गढ़ने पड़े. जो लोग हजरत साहब के फेक न्यूज़ की असलियत जानते थे वे उनके एक एक फेक न्यूज़ की धज्जियां उड़ा कर रख देते थे ऐसे लोग ही हजरत साहब की नजर में काफिर कहलाये. "ये लोग कहते कि तू तो हमारे ही जैसा एक आम आदमी है हम तो तुझे झूठे लोगों में ही पाते हैं" ऐसा ये लोग इसलिए कहते क्योंकि हजरत साहब के फेक न्यूज़ की कोई सीमा ही नही थी वो बुर्राक पर बैठ कर हवाई सफर पर निकले आसमान के दरवाजे खुलवाकर पुराने नबियों से मिले सातवे आसमान पर खुदा से मीटिंग की जन्नत और दोजख को लाइव देखा फिर धरती पर लौट आये सुबह उठकर भक्तों से कहा तो भक्तों ने आंखें मूंदे इस फेक न्यूज़ पर यकीन भी कर लिया इतना ही नही इसके बाद भी जितने फेक न्यूज़ हजरत साहब ने गढ़े इस्लाम नामक डिसऑर्डर के शिकार ये लोग उन तमाम फेक न्यूज़ पर यकीन करते चले गए. सवाल खड़े करने वाले तो काफिर थे जिन्हें हजरत साहब के पहले फेक न्यूज़ पर पर ही यकीन नही था इसलिए उन्होंने आगे भी हजरत साहब द्वारा बकी गई किसी फेक न्यूज़ पर भरोसा नही किया. इसलिए लड़ाइयां हुईं बदर की लड़ाई में भी हजरत साहब ने फेक न्यूज़ फैलाया की उनकी लड़ाई में अल्लाह ने आसमान से फरिश्ते उतारे जिससे उनकी जीत हुई. इस फेक न्यूज़ का खामियाजा उन्हें उहद की लड़ाई में भुगतना पड़ा अल्लाह के प्यारे नबी बुरी तरह घायल हुए हुजूर साहब के दांत तोड़ दिए गए अल्लाह की ओर से आये हुए फरिश्ते भी उनकी रक्षा न कर पाए वो होते तब न ?? यह सब फेक न्यूज़ का ही कमाल तो था....की मुसलमानों के लिए आसमान से फरिश्ते उतारे जाएंगे... कुरान बाइबिल वेद गीता रामायण आत्मा पुनर्जन्म देवी देवता स्वर्ग नरक जन्नत दोजख 72 हूरें आख़िरत पुलसिरात मुनकर और नकीर मौत का फरिश्ता शैतान कब्र का अजाब हिसाब किताब प्रेतात्मा और जिन्न यह सब फेक न्यूज़ ही तो है जिसके जाल में आज भी दुनिया की एक बहुत बड़ी आबादी फंसी हुई है. इन तमाम फेक न्यूज़ पर कई तरह के अलग अलग धार्मिक गिरोह हमेशा आम जनमानस को बेवकूफ बनाते आएं हैं आज के वैज्ञानिक युग मे भी इन सभी पुरातन फेक न्यूज़ की महिमा बनी रहे इसके लिए ये तमाम धार्मिक गिरोह बड़ी मेहनत करते हैं पुराने फेक न्यूज़ की महिमा बनी रहे इसके लिए लगातार नए तरह के फेक न्यूज़ तैयार किये जाते हैं और इन नए फेक न्यूज़ के माध्यम से पुराने वाले फेक न्यूज़ को साइंटिफिक साबित करने की भी भरपूर कोशिशें की जाती हैं. आज के युग मे भी अगर कोई पढ़ा लिखा आदमी इन सब बातों को सही मानता है तो समझिए की वह सदियों पुराने फेक न्यूज़ पर आधारित उस डिसऑर्डर का शिकार है जिसे धर्म या मजहब कहते है. फेक न्यूज़ पर आधारित धर्म नामक यह डिसऑर्डर बहुत खतरनाक होता है इसके शिकार लोग समाज को वक्त में उतने ही पीछे ले जाने की कोशिश करते हैं जितना पुराना उनका धर्म होता है. दंगे फसाद आतंकवाद जहालत जातिवाद पाखंडवाद कूपमण्डूकता अकर्मण्यता और घृणा इस डिसऑर्डर के लक्षण हैं किसी मे यह डिसऑर्डर अधिक होता है किसी मे कम और जो पूरी तरह इस संक्रमण से मुक्त होता है उसे ही नास्तिक कहते हैं वर्षों पुराने फेक न्यूज़ पर आधारित धार्मिक डिसऑर्डर के शिकार लोग जहां भी होते हैं अराजकता ही पैदा करते हैं क्योंकि ऐसे बीमार लोगों को सत्य प्रेम और परिवर्तन की जरूरत ही नही होती.

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