भारत और इंडिया (कविता) - तर्कशील भारत

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Tuesday, August 20, 2019

भारत और इंडिया (कविता)

यह इंडिया और भारत की साझा तस्वीर है.

ये मेरे भारत के लाल
तेरे वजूद के 
इस फर्क की वजह
तू नही
कुदरत भी नही
बल्कि
वे लोग है
जो इंडिया में रहते हैं

तेरा लिबास तेरे जज्बात
तेरे खयालात और 
तेरे हालात के
इस पिछड़ेपन की असली वजह
भारत और इंडिया के बीच खींची
असमानता की वह गहरी खाई है
जिसे पार करना 
तेरे बस में नही

तू भारत की महान संस्कृति का हिस्सा है
और तेरे हिस्से में
सिर्फ संघर्ष है
सिर्फ संघर्ष
इसलिए
तेरा वजूद
संघर्षों के विशाल ढेर में
कही खो गया है

संघर्षों के इसी ढेर में
तुझे अपने लिए 
मामूली सी
मैली कुचैली सी
जिंदगी तलाशनी है

संघर्षों के इसी ढेर में
तुझे अपने लिए
मामूली सी
मैली कुचैली सी
खुशी ढूंढनी है

इसी ढेर में
तुझे तेरे अरमान 
खोजने हैं

संघर्षों के इसी ढेर में
कहीं 
तुझे तेरी मुस्कुराहटें 
भी मिल जाएंगी

क्योंकि तू भारत की 
महान परंपराओं का हिस्सा है

और इस हिस्से में
तेरे लिए संघर्ष है
सिर्फ संघर्ष है

दूसरी ओर इंडिया है
जहां 
संघर्ष नही 
सिर्फ कॉम्पटीशन है
कभी न खत्म होने वाला कॉम्पिटिशन
जो निरंतर चलता रहता है

इंडिया के इस हिस्से में
जो लोग रहते हैं
उन्हें भी
मुस्कुराहटों की जरूरत होती है
उन्हें भी खुशियां चाहिए
और उन्हें भी 
जिंदगी की तलाश रहती है
लेकिन उन्हें इन सबके लिए
उचित कीमत चुकानी पड़ती है

वो चाहें तो 
इंडिया और भारत के इस फर्क को
मिटा सकते हैं 
तेरे साथ
मुस्कुराहटों को साझा कर सकते हैं
दो पल की मामूली जिंदगी 
और 
100 इयर्स की 
लम्बी लाइफ के बीच मे 
जो भारी अंतर है
उसे कम कर सकते हैं
खुशियों की दोतरफा तलाश को
खत्म कर सकते हैं

लेकिन
जिन लोगों के पूर्वजों ने
भारत को चूस कर
इंडिया का निर्माण किया है
वो लोग
भारत और इंडिया के बीच की 
इस खाई को
कभी भरने नही देंगे

इसलिए 
ये मेरे भारत के लाल
तेरे वजूद के 
इस फर्क की वजह
तू नही
कुदरत भी नही
बल्कि
वही लोग हैं
जो इंडिया में रहते हैं....

-शकील प्रेम

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