फ़िरऔन की लाश का रहस्य और डॉ. मोरिस बुके की हक़ीक़त - तर्कशील भारत

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Wednesday, June 19, 2019

फ़िरऔन की लाश का रहस्य और डॉ. मोरिस बुके की हक़ीक़त


विज्ञान के बढ़ते प्रभाव से सभी धार्मिक गिरोह आतंकित रहते है उन्हें हमेशा यह डर रहता है कि उनकी पोल न खुल जाए इसलिए वे अपनी पुरानी सड़ी गली रवायतों को साइंस से जोड़ने की भरपूर कोशिशें करते हैं जाकिर नाइक जैसे लोग इस काम मे जितनी जद्दोजहद करते हैं उतनी मेहनत अगर समाज की बुनियादी परेशानियों को हल करने में लगाते तो समाज अपनी व्यथाओं से कबका उबर गया होता लेकिन जिनका काम है धार्मिक प्रोपगेंडा फैला कर लोगों को गुमराह करना वे भला समाज के भले की सोच भी कैसे सकते हैं.
आज के वैज्ञानिक युग मे विज्ञान के बढ़ते प्रभाव से घबराए तमाम धार्मिक गिरोहों ने साइंस के नाम पर कुछ ऐसे झूठ रचे हैं जो ऊपरी तौर पर बिल्कुल सच्चे लगते हैं लेकिन जब हम इन भ्रामक बातों की पड़ताल करते हैं तो पोल खुल जाती है.
आज में बात करूंगा एक ऐसे इस्लामिक प्रोपगेंडा की जिसके बारे में लगभग हर मुसलमान बातें करता हुआ मिल जाता है वो है फिरौन की लाश का किस्सा.
इस किस्से में फिरौन की लाश है और एक डॉक्टर है जिसने इस लाश की जांच करने के बाद कुरान को सच्चा पाया और उसने इस्लाम कुबूल कर लिया.
इस प्रोपगेंडे के अनुसार फिरौन की लाश के सबूत बचे होने का जिक्र कुरान में है जिसे देखते हुए फ्रांस के एक डॉक्टर मुसलमान हो गए थे ?
इस पूरी कहानी को देखने के बाद कई सवाल खड़े होते हैं.

क्या सच मे फिरौन की लाश मिली थी ?

क्या सच मे जो लाश मिली थी उसकी मौत पानी मे डूबने से हुई थी ?
आइये इस वीडियो के माध्यम से इस रहस्य पर से पर्दा उठाते हैं.
1881 में मिस्र के दक्षिणी इलाके से एक ममी मिली थी यह archeaology के हिसाब से बहुत बड़ी खोज थी क्योंकि इस खोज में जो ममी मिली थी वो मिस्र के सबसे ताकतवर सम्राट रामेसेस द्वितीय की थी इसके मिलने के करीब 100 साल बाद इस ममी को व्यापक चिकित्सीय जांच के लिए फ्रांस मंगवाया गया था क्योंकि इजिप्ट की सरकार ने पाया कि ममी तेजी से नष्ट हो रही है और मिस्र में उस समय ऐसी कोई टेक्नोलॉजी भी नही थी कि इस ममी की गहराई से जांच कर सके और उसे नष्ट होने से रोका जा सके.
जब यह ममी मिस्र से फ्रांस पहुंची तो उसकी जांच शुरू हुई इस ऑपरेशन में दुनिया भर के अलग अलग क्षेत्रों के एक्सपर्ट्स शामिल हुए आर्कियोजिस्ट डॉक्टर्स फोरेंसिक एक्सपर्ट्स और भी कई विद्वान थे जिन्हें ममी की इस जांच में शामिल किया गया था इन्ही में से एक थे फ्रांस के एक डॉक्टर जिनका नाम था मौरिस बुके.
बताया जाता है कि इस ममी की गहन जांच के बाद जब वे एक सेमिनार में भाषण दे रहे थे उसी दौरान एक जाकिर नाइक टाइप मुस्लिम डॉ ने कुरान की एक आयात उन्हें पढ़कर सुनाई जिसे सुनकर मौरिस बुके ने इस्लाम कुबूल कर लिया
इस आयत में लिखा था "इसलिए हम तेरे जिस्म को बचा लेंगे, ताकि तू अपने बाद वालों के लिए एक निशानी हो जाए बेशक बहुत से लोग हमारी निशानियों की तरफ से लापरवाह रहते हैं "
बताया जाता है कि dr मौरिस को ये सोचकर बहुत हैरत हुई कि इस मृत देह के समुद्र मे डूब कर मरने की जिस बात का पता उन्होंने बड़ी बड़ी अत्याधुनिक मशीनों की सहायता से लगाया वो बात कुरान मे 1400 साल पहले कैसे लिख ली गई ??
रामेसेस की ममी के परीक्षणों से डाक्टर मौरिस ने निष्कर्ष निकाले कि जिस व्यक्ति की ये लाश है उसकी मौत समुद्र मे डूबने के कारण हुई थी क्योंकि उस ममी पर समुद्री नमक का सुबूत मिला था.
इससे उन्होंने ऐलान कर दिया कि ये लाश उसी फिरौन की है जो मूसा का पीछा करते हुए समुद्र में डूब कर मर गया था कुरान में अल्लाह ने इसी लाश को हमेशा के लिए निशानी के तौर पर बचाये रखने की बात की है जिससे प्रभावित होकर डॉ मौरिस ने इस्लाम स्वीकार कर लिया.
तो आइए इस पूरी कहानी की पड़ताल कर लेते हैं.


1881 में जो ममी मिली थी जिसे डॉ जाकिर के गुरु मोरिस ने कुरान वाले फिरौन की लाश मान लिया वो ममी रामेसेस द्वितीय की थी इस बात की पुष्टि दुनिया भर के आर्कियोलॉजिस्ट करते हैं आप इजिप्शियन आर्कियोलॉजी के ऑफिशियल पेज पर जाकर देख सकते हैं कि यह ममी जिसकी फ्रांस में जांच हुई थी जिसमे डॉ मोरिस भी शामिल थे रामेसेस द्वितीय की थी जिसका शाशनकाल 1273 से 1213 ईसा पुर्व के बीच था.
अब मूसा की बात कर लेते हैं इतिहासकारों के बीच मूसा के जन्म की तिथि पर काफी मतभेद हैं लेकिन सभी इतिहासकार यह मानते है कि मूसा की मृत्यु 1407 ईसा पूर्व में हुई थी इस तथ्य के आधार पर रामसेस द्वितीय मूसा के दो सदी बाद के व्यक्ति साबित होते हैं.
इससे मोरिस बुके का यह दावा बिल्कुल बेबुनियाद साबित होता है की ये ममी मूसा के समय वाले किसी फिरौन या फराओ बादशाह की है जबकि इस बात के ठोस सबूत हैं कि यह ममी मूसा के 200 साल बाद वाले इजिप्शियन बादशाह रामेसेस the सेकंड की है.
डॉ मोरिस के चेले कभी यह नही बताते की रामेसेस की इस लाश को मूसा वाले फिरौन की लाश बताने वाले डॉ मोरिस ने यह दावा किस आधार पर किया ?
जब यह तय हो चुका है कि मोरिस जिस ममी के परीक्षण में शामिल थे वह मूसा के दुश्मन फिरौन की नही थी बल्कि यह रामेसेस द्वितीय की ममी थी तो उन्होंने किस आधार पर इस ममी को मूसा के समकालीन वाला फिरौन मान लिया ?
फिरौन जिसे कुरान और बाइबिल में विलेन के रूप में दिखाया गया है वह कोई एक बादशाह नही था बल्कि यह एक राजवंश था अब इस राजवंश के किस राजा ने मूसा के पीछे घोड़े दौड़ाए यह बात बाइबल या कुरान में कही भी नही है.
बाइबिल तोरा और कुरान की मान्यताओं के अनुसार फिरौन की सेना से बचते हुए मूसा जब सागर के किनारे पहुंचे तो खुदा ने उनके लिए समुद्र में से रास्ता निकाल दिया था जिसमे से मूसा तो निकल गए लेकिन फ़िरऔन और उसकी सेना दूब गई.
इसका वर्णन यहूदियों की तोरा में "book of exodus" में है बाइबिल (उत्पत्ति 41:​1-57; 42:​1-8; 50:20) में है और कुरान में भी है.

कुरान में लिखा है-

"इसलिए हम तेरे जिस्म को बचा लेंगे, ताकि तू अपने बाद वालों के लिए एक निशानी हो जाए बेशक बहुत से लोग हमारी निशानियों की तरफ से लापरवाह रहते हैं "

[यूनुस :92]

अब कुरान में अल्लाह ने फिरौन की लाश को सुरक्षित रखने की बात की है तो फ़िरऔन की लाश भी तो होनी ही चाहिए इसी झूठ को जस्टिफाई करने के लिए ये पूरी कहानी गढ़ी गई रामेसेस द्वितीय की ममी की जांच में शामिल आर्कियोलॉजिस्ट या फोरेंसिक एक्सपर्ट्स ने कभी भी डॉ मौरिस की गप्पबाजी का समर्थन नही किया बल्कि उस जांच दल में शामिल अलग अलग फील्ड के माहिर विद्वानों ने हमेशा डॉ मोरिस की बातों का खंडन ही किया है लेकिन इस्लामिक गिरोहों के हाथों बिकी हुई मीडिया ने इन वैज्ञानिकों को ज्यादा तवज्जो नही दी और इसके उलट मोरिस बुके की जहालत को खूब प्रोपगेट किया.
इस पूरे घटनाक्रम में एक और गहरा राज छुपा है जिस पर कभी कोई गौर ही नही करता डॉ मॉरेस बुके रामेसेस द्वितीय की ममी की जांच टीम में क्यों शामिल किए गए थे ? ये बड़ा सवाल है वह ममी के एक्सपर्ट तो थे नही बलकी वे तो फिजिसिस्ट और Gastroenterologist थे जिनका इस ममी की जांच में कोई काम ही नही था.

फिर भी वे शुरुआत से इस पूरे प्रोजेक्ट का हिस्सा थे कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों हुआ था ?
आप हमेशा यही सुनेंगे की डॉ मॉरेस बुके फ्रांस के एक डॉक्टर थे जिन्होंने उस ममी की जांच की थी लेकिन कोई ये नही बताता कि जिस समय उन्हें रामेसेस की ममी की जांच टीम में शामिल किया गया था उस समय वह अरब के सुल्तान शाह फैज़ल के फैमिली डॉक्टर थे इसके साथ ही वह मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात के निजी डॉक्टर के तौर पर भी नियुक्त किये गए थे.
अरब के सुल्तान शाह फैजल और मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात इन दोनों ताक़तवर मुस्लिम नेताओं के सबसे खास आदमियों में से एक थे मॉरेस बुके.
अभी तक आपको यह पूरा माजरा समझ आ जाना चाहिए.
धर्म की झूठी मान्यताओं को सच साबित करने के किसी एक आदमी को खरीद लेना कोई बड़ी बात नही है ऐसा हर युग मे मठाधीशों के द्वारा किया गया है इस पूरे मामले में डॉ मोरिस को खरीदा गया था और इसके पीछे दो मुल्कों की ताक़तें काम कर रही थीं.
यह पूरी तरह एक प्रायोजित कार्यक्रम था जिसमे मोरिस बुके का इस्तेमाल किया गया ताकि धर्म की गिरती शाख को विज्ञान का मजबूत सहारा मिल सके.
सवाल यह भी है कि डॉ मोरिस ने इस ममी को समुद्र में डूबा हुआ कैसे साबित किया ?
क्या डर बुके को यह जानकारी नही थी कि प्राचीन इजिप्ट में ममी को तैयार करने की एक खास विधि हुआ करती थी जिसमे एक तरह का मसाला तैयार किया जाता था जिसे मृत की देह पर लेप दिया जाता था और इस मसाले में नमक का भी उपयोग किया जाता था केवल इसलिए कि ममी के अवशेषों में नमक था यह कैसे मान लिया जाए कि वह समुद्र में डूब कर मरा था ?
एक अनुमान के मुताबिक इजिप्ट में प्राचीन काल से लेकर 14वी सदी के बीच तकरीबन एक करोड़ लाशों को ममी कृत किया गया था और उन में से तकरीबन 10 हजार ममियों को पिछले दो सौ सालों के दौरान खोजा भी जा चुका है जिनमे कुछ इजिप्शियन सम्राटों की ममियां हैं तो कुछ उस दौर के रुतबेदार धनाढ्य लोगों की भी ममियां हैं और इन सभी ममियों को तैयार करने की विधि लगभग एक समान है सभी मे नमक की मात्रा मिलती है तो इस आधार पर क्या यह मान लिया जाए कि ये सारी लाशें समुद्र में डूब कर मरी थीं ?
सच तो यह है कि ईजिप्त में अभी तक ऐसी कोई ममी नही मिली जिसकी जांच से यह पता चला हो कि उसकी मौत डूबने से हुई ?
ममी की जांच में दुनिया के टॉप फोरेंसिक एक्सपर्ट्स भी शामिल हुए थे जिनके लिए यह पता लगाना की ममी की मौत कैसे हुई कोई बहुत बड़ी बात नही थी उन्होंने अपनी जांच में यह पाया भी की मरते समय रामेसेस को कई प्रकार की बीमारियां थी जांच दल की फाइनल रिपोर्ट के अनुसार रामेसेस द्वितीय की मृत्यु 90 साल की उम्र में हुई थी उस समय वह आर्थराइटिस से पीड़ित था जो उसकी मौत की मुख्य वजह बनी.
आप इजिप्ट के आर्कियोलोजी वेबसाइट से रामेसेस की मेडिकल रिपोर्ट पढ़ सकते हैं जिसमे कही भी यह नही लिखा की उसकी मौत डूबने से हुई थी.
तब किस आधार पर डॉ मोरिस ने यह दावा किया कि रामेसेस की मृत्यु समुद्र में डूबने से हुई ?
अब बात करते है कुरान की उस आयत की जिसमे लिखा है '"इसलिए हम तेरे जिस्म को बचा लेंगे, ताकि तू अपने बाद वालों के लिए एक निशानी हो जाए बेशक बहुत से लोग हमारी निशानियों की तरफ से लापरवाह रहते हैं "

[यूनुस :92]
सूरह यूनुस की इस आयत की बात करने से पहले जान लीजिए की कुरान और बाइबिल से पहले भी मिश्र में पुराने जमाने की ममियां मिला करती थी क्योंकि कुरान और मुहम्मद के दौर से बहुत पहले से ही पिरामिडो के खजाने की सेंधमारी करना पूरे अरबी इलाके के लिए एक तरह का काला धंधा हुआ करता था.


इसलिए वहां के आम लोगों को ममियों की जानकारी प्राचीन समय से थी इन ममियों पर आधारित हजारों किस्से अरब के समाज में प्रचलित थे.
फिरौन वाली कहानी को कुरान वालों ने बाइबल से चोरी किया है बाइबल वालों ने यहूदियों से चुराया है और यहूदियों ने इस किस्से को समाज मे प्रचलित कहानियों से चुरा कर इसे अपनी आसमानी किताब में घुसेड़ा है.
इन तीनों मौसेरे भाइयों की किताबों में रेगिस्तानी सभ्यता में प्रचलित प्राचीन किवदंतियों का भरपूर दर्शन मिलता है और कुरान की यह आयत भी उसी मरुस्थलीय दर्शन का हिस्सा है.
आखिर में एक सवाल और...
मूसा की कहानी का सच क्या है ?
मूसा एक ऐतिहासिक चरित्र जरूर है लेकिन यहूदी ईसाई और मुसलमानों की कहानियों में जो मूसा और फिरौन का चित्रण है उसका कोई ऐतहासिक सबूत उपलब्ध नही है मूसा द्वारा जिस लाल सागर को पार करने की बात ये तीनों धर्म के अनुयाई मानते हैं वो केवल गप्प मात्र है.
हैरानी की बात है साढ़े तीन हजार साल पहले लाल सागर में से रास्ता निकाल देने की बकवासों पर यकीन करने वाले लोग 19 सदी तक लाल सागर की बात तो दूर की है नील नदी पर कोई पुल तक नही बना पाए थे.
डॉ मोरिस बुके और फिरौन की लाश से जुड़े तमाम रहस्यों पर से पर्दा उठने के बाद आपको अंदाजा हो गया होगा कि किस तरह झूठ को जिंदा करने के लिए सच का गला घोंटा जाता है और किस तरह विज्ञान या वैज्ञानिकों का इस्तेमाल धर्म को मजबूत करने के षड्यंत्रों में किया जाता है इससे यह भी साबित होता है कि धर्म राजनीति और मीडिया के गठजोड़ से दुनिया को बड़ी आसानी से बेवकूफ भी बनाया जा सकता है धर्म से जुड़ी इस तरह की कहानी पर यकीन करने से पहले यह जरूर सोच लेना चाहिए कि आखिर आज इन बकवासों को विज्ञान के प्रमाणपत्र की जरूरत ही क्यों पड़ रही है ?
सोचिएगा जरूर....

4 comments:

  1. Or chutuye wo romses hi tha magar jo bhi raja banta use feroun kaha jata tha

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  2. Or ye bhi sun namak body ke andar tha or wo lash 3000 sal purani thi or tu bata raha he ki 1200 ke aaspas mara tha

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