मैं कौन हूँ नहीं जानता - तर्कशील भारत

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Sunday, April 14, 2019

मैं कौन हूँ नहीं जानता


मैं कौन हूँ
नहीं जानता
बस
एक जीव मात्र
क्योंकि 
भोजन सुरक्षा और प्रजनन
जीव की इन तीन 
बंदिशों से बाहर 
नहीं निकल पाया हूँ 
कैसे कहूँ की मैं मनुष्य हूँ ?

रोटी कपडा और मकान 
के लिए संघर्षरत मैं ...
मनुष्य होकर भी 
बस एक जीव हूँ 
कुत्ते बिल्ली और सूअर 
के समतुल्य.....

मनुष्य बनने के लिए 
मनुष्यता चाहिए 
समाज चाहिए
सहयोग चाहिए
न्याय समानता और करुणा 
के साथ 
ज्ञान और विज्ञान 
चाहिए 
मान और सम्मान 
चाहिए

लेकिन 
मनुष्यता क्या है
मैं नहीं जानता 
मुझे दौलत के ढेर पर बैठना है
समाज क्या है 
मुझे नहीं पता
मैं तो अपने 
थ्री बीएचके को ही 
अपनी दुनिया समझता हूँ 
न्याय समानता और करुणा 
जैसे शब्द 
मेरे शब्दकोष में नहीं

ज्ञान और विज्ञान
मेरे लिए बस 
धन कमाने के साधन मात्र हैं 
धन संचय से 
पूँजी से
मेरी और मेरी नस्लों की 
भोजन सुरक्षा और प्रजनन 
की समस्याओं का समाधान होगा 
जीवन उनका और आसान होगा 
इसलिए 
मुझे क्षण भर भी 
अवकाश नहीं
व्यस्त हूँ 
मुझे अपनी खिड़की से 
बाहर झाँकने का समय नहीं
व्यस्त हूँ 
अपने बच्चों में मस्त हूँ
कोई बच्चा 
भूख से रोता है 
कोई सड़को पर सोता है
इसमें मैं क्या करूँ ?
क्योंकि मैं एक जीव हूँ 
जीवन जीने की होड़ में 
शामिल
बस एक जीव मात्र
चूहे गिरगिट और मखियों की तरह ...

जीने की प्रतिस्पर्धा में
जोड़ तोड़ होड़ 
की दौड़ में शामिल
मैं....
मेरे लिए रुकना मना है
रुक कर थोड़ा सोचना मना है
मैं कौन हूँ ?
यह जानने के लिए रुका तो
दुनिया मुझे रौंदते हुए 
मुझसे आगे निकल जाएगी
इसी डर से मैं 
कभी मनुष्य न बन सका 
बना
बस एक जीव मात्र
घोडा गधा और खच्चर की तरह ...

मुझे हर हाल में जीतना है
शिखर तक पहुंचना है
दुनिया को मुट्ठी में कैद करना है
दूसरों को पैरों तले कुचलना है

मेरी रफ्तार सबसे तेज होनी चाहिए
मेरी हैसियत सबसे ऊंची होनी चाहिए
मेरी बिल्डिंग एवरेस्ट के ऊपर हो
मेरा नाम चांद सितारों पर हो

मेरे इन ख्वाहिशों ने 
मुझे अभी तक इंसान नही बनने दिया

बना तो बस एक जीव मात्र
गाय भैस और बकरियों की तरह...

दुनिया मेरी जेब मे हो 
शोहरत मेरे कदम चूमे
दुनिया की सारी ताक़त 
मेरे वजूद में समाई हो

कोई बदहाल है
कोई फटेहाल है
कोई लाचार है तो ये उसकी जहमत है
कोई बेकार है तो ये उसकी किसमत है
मैं धनवान हूँ ये मेरा मुकद्दर है

मैं सबसे आगे रहूँ
ये मेरी चाहत है
मैं सबसे ऊपर रहूँ
ये मेरी फितरत है

इसलिए मैं सुबह से शाम तक
दौड़ता हूँ

मुझे जिंदगी की इस रेस में
सबसे तेज और सबसे आगे पहुंचना है

लेकिन इस भागदौड़ में 
मैं अपनी असली पहचान खो चुका हूँ

मैं इंसान बनने की प्रक्रिया में
अभी तक इंसान न बन सका

बना तो एक जानवर पशु मात्र
चींटी चूहा और कॉकरोच की तरह

हजारों बच्चे भूख से मरे
लाखों बच्चे भटकते फिरें
करोड़ों बच्चे कुपोषित हों
इसमें मेरा क्या दोष ?

मुझे तो इतना मालूम है कि
मेरे बच्चे की चॉकलेट सबसे महंगी हो
वो सबसे महंगे स्कूल में पढ़े 
उसके जूते की कीमत
लाखों में हो

वो दुनिया के 
सबसे आलीशान घर मे रहे

वो जब जवान हो
तब उसका रुतबा
किसी राजा से कम न हो

वो उस मकाम को छुए
जहां पहुंचने का ख्वाब मैं देखता हूँ

उसकी रेस उतनी कठिन न हो 
जितनी कि मेरी थी
वो संघर्षों के उस फासले से दूर रहे
जो मैंने तय की है 

दुनिया के सारे बच्चे भूख से मर जाये
मुझे परवाह नही 
दुनिया के सारे बच्चे बिलखते रहे 
लेकिन मेरा बच्चा कभी मायूस हुआ
तो मेरी दुनिया उदास हो जाएगी 

उसे कभी दुख हुआ
तो ये मेरा सबसे बड़ा गम होगा

वो कभी रोया
तो मेरा संसार उजड़ जाएगा

उसके पल भर की खुशी के लिए ही
मैंने अपना जीवन दांव पर लगा दिया है

मुझे ज्यादा से ज्यादा हासिल करना है
मुझे ज्यादा से ज्यादा तरक्की करना है

मुझे खुद को 
जितना हो सके फैलाना है
ताकि मेरी संतानों की दुनिया 
बड़ी हो सके

इसी जद्दोजहद में

मैं कभी इंसान न बन सका
बना तो बस एक जीव

बैक्टीरिया फंगस और पैरासाइट्स की तरह....

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