मांसाहार सही या गलत ? - तर्कशील भारत

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Saturday, April 20, 2019

मांसाहार सही या गलत ?


इस विषय पर बात करने से पहले मैं आपको बता दूं कि मैं विशुद्ध रूप से शाकाहारी हूँ लेकिन जो लोग मांस खाते हैं मुझे उनसे कोई आपत्ति नही है.

मनुष्य स्वाभाविक रूप से सर्वाहारी जीव रहा है यही कारण है कि स्थान और परिस्थितियों के अनुसार उसके खाने पीने की आदतों में अंतर दिखाई देता है आज दुनिया मे शायद ही ऐसा कोई जीव जंतु बचा हो जो इंसान न खाता हो अब सवाल ये है कि एक मनुष्य होने के नाते मांसाहार ठीक है या नही ?

भौगोलिक रूप से देखें तो खानपान की कुछ आदते परंपराओं से चली आ रही जिन्हें बदला नही जा सकता और इसमें कुछ भी गलत या सही नही है भोजन में प्रोटीन के रूप में मांसभक्षण जरूरी हो सकता है लेकिन  मानवीय रूप से देखें तो यह क्रूरता ही है.

जो लोग मांस नही खाते हैं उनके लिए प्रोटीन के कई विकल्प मौजूद हो सकते हैं और आज के मेडिकल साइंस के अनुसार मानव शरीर का मेटाबॉलिज्म मांसाहार की तुलना में शाकाहार के लिये ज्यादा उपयुक्त है.

जंगल मे शेर हिरण को खाता है क्योंकि वो उसका आहार है वो उसे नही मारेगा तो खुद मर जायेगा शेर के लिए हिरन की हत्या 
Need To Kill की श्रेणी में आता है.

ठंडे इलाकों में जहां खाने के ज्यादा विकल्प नही होते वहां इंसान के लिए मांस का सेवन मजबूरी भी है और जरूरी भी इसलिए वहां मांसभक्षण need to kill की श्रेणी में है और इसमें कोई बुराई नही है.

जहां खेती कम होती है सब्जियों की पैदावार जनसंख्या के हिसाब से कम है वहां भी मांसाहार में कोई बुराई नही है.

सहारा के देशों में खेती नही होती वहां की अर्थव्यवस्था पशुपालन पर आधारित है इसलिए उन देशों में खाने के लिए पशु की हत्या में कोई बुराई नही है यहां भी मांसभक्षण need to kill की श्रेणी में ही आता है.

समुद्री किनारों पर रहने वाले लोगों के लिए साग सब्जियां उगाने के मुकाबले समुद्र से मछलियों को इकट्ठा करना ज्यादा आसान है और यह परंपरागत रूप से इन जगहों की इकोनॉमी का हिस्सा भी है इसलिए यहां भी मांसाहार need to kill की श्रेणी में आता है.

लेकिन जहां हजारों प्रकार की साब्जियां उपलब्ध हों जहाँ की इकोनॉमी खेती पर ही आश्रित हो वहां मांसाहार की कोई मजबूरी नही हो सकती फिर भी अगर ज्यादातर लोग मांसभक्षण करते हैं तो ये Need To Kill नही बल्कि will to kill की श्रेणी में आता है यानी कि केवल स्वाद के लिए किसी जीव की हत्या करना.

साग सब्जियों की भरमार होने के बावजूद मांस खाना अगर परंपराओं से जुड़ा हुआ मुद्दा है तो इसमें भी कुछ सही या गलत नही है लेकिन जब हम बात मानवता की करते हैं तब करुणा जरूरी हो जाती है और मात्र स्वाद के लिए जीव हत्या में थोड़ी सी भी करुणा नही है इसीलिए आज हमें अपनी इन दयाहीन परंपराओं को बदलने की जरूरत है.

नैतिकता के आधार पर शाकाहार अपनाने में क्या बुराई है ? 

जो लोग शाकाहार को धर्म से जोड़ते हैं शायद उन्हें पता नही की शाकाहार किसी भी धर्म का हिस्सा कभी रहा ही नही क्योंकि सभी धर्मों में मांसभक्षण को जायज ही ठहराया गया है यकीन न हो तो इन धर्मपुस्तकों को खंगाल लीजिएगा पता चल जाएगा.

शाकाहार की भावना का संबंध किसी भी धर्म से नही है बल्कि यह तो नैतिकता और मानवता का एक उत्कृष्ट रूप है जिसमे आप करुणा के आधार पर जीव हत्या से परवेज करते है.

अगर आपमें इंसानियत की समझ है आप प्रकृति से प्रेम करते है तब आपको भी मांसभक्षण त्याग कर शाकाहार अपना लेना चाहिए.

ऐसा मेरा मानना है मैं गलत भी हो सकता हूँ.

कुछ लोगों का तर्क होता है कि साग सब्जियां भी तो जीव की श्रेणी में आती हैं तब उन्हें भी नही खाना चाहिए यह भी तो जीव हत्या ही है.

जिन साग सब्जियों या फल वैगरह को हम खाते हैं उन्हें हजारों वर्षों में इंसानों ने अपने अनुकूल बनाया है आज हम उन्हें उगाते है उनकी खेती करते है जब वह फसल तैयार हो जाती है तब हम उन्हें काट लेते हैं ये जीव हत्या नही है.

आम के पेड़ पर लगा हुआ आम अगर इंसान नही खायेगा तो वो नीचे गिरकर बर्बाद हो जाएगा इसी तरह गोभी प्याज शलगम घीया भिंडी पालक या जो भी सब्जी हम खाते हैं उसे समय पर नही काटेंगे तो वो बेकार हो जाएगी इसमें जीव हत्या वाली कोई बात ही नही है.

लाखों वर्षों की विकास प्रक्रिया के दौरान आज इंसान उस मकाम तक पहुंचा है जहां वह दूसरे जीवों से कहीं ज्यादा बुद्धिमान है इसी बुद्धिमत्ता के बल पर ईनसानो ने दुनिया के सभी जीवों पर श्रेष्ठता हासिल की है इसका अर्थ यह है कि उसे दूसरे सभी जीवों का संरक्षक होना चाहिए भक्षक नही.

अगली बार जब भी आप KFC के चिकन का ऑर्डर करें तो एक बार जरूर सोच लीजियेगा उस मुर्गे के बारे में जिसकी क्रूरतापूर्ण हत्या सिर्फ इसलिए कि गई ताकि आप उसके स्वाद का मजा ले सकें.

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