सिवा हरामखोरी के तुमने कुछ नही किया - तर्कशील भारत

Header Ads Widget

Sunday, April 14, 2019

सिवा हरामखोरी के तुमने कुछ नही किया



बल्ब के आविष्कार से पहले की दुनिया में विज्ञान का उजाला नही था तब रात की शुरुआत शाम ढलते ही हो जाया करती थी

आज की दुनिया पहले से ज्यादा चमकदार है शहरों की रातें दिन के उजालों की तरह रोशन हैं तो गांवों की अंधेरी गलियों में भी उजाले की दस्तक हो चुकी है आज रोशनी के विस्तार ने अंधेरों को समेट दिया है गांव हो या कस्बा सड़कें हो या गालियां हर जगह रोशनी है.

जब एडिसन ने बल्ब का अविष्कार किया तब शायद उन्हें भी इस बात का अंदाजा नही होगा कि उनकी ये मामूली सी खोज एक दिन पूरी दुनिया को बदल कर रख देगी.

बल्ब के अविष्कार से सिर्फ अंधेरे पर ही जीत हासिल नही हुई बल्कि दुनिया में विकास की रफ्तार पहले के मुकाबले कई गुना तेज हुई उत्पादन में तेजी आई परिवहन में क्रांति आई बिजली से चलने वाले दूसरे उपकरणों का ईजाद मुमकिन हुआ और खेती के परंपरागत तरीके बदल गए जिससे दुनिया की तस्वीर और तकदीर दोनों पूरी तरह बदल गए.

एडिसन से पहले पूरी दुनिया अंधेरों से डरती थी चाँद की हल्की सी रोशनी लालटेन की मद्धिम सी लौ और जुगनुओं की थोड़ी सी झिलमिलाहट काली स्याह रातों में यही अंधेरे का जुगाड़ हुआ करते थे.

मंदिर मस्जिद चर्च और गुरद्वारे रात के अंधेरों में खो जाया करते थे फ़ज़्र और ईसा की नमाजे भी अंधेरे में ही अता की जाती थी क्योंकि इमाम को कुरान का इल्म तो था लेकिन बल्ब का इल्म नही था इसलिए इमाम साहब रोज मगरिब से पहले मस्जिद के चरागों में तेल डाल कर रात का इस्तक़बाल किया करते थे.

मंदिर के कपाट भी रात को बंद हो जाया करते थे क्योंकि रात के अंधेरों में भगवान की कीमती मूर्तियों के चोरी हो जाने का डर बना रहता था.

एडिसन के द्वारा बल्ब का अविष्कार करने से पहले भी कुरान और दूसरे मजहबों की ज्ञानवर्धक किताबें उनके पास मौजूद थी लेकिन तब वे उन किताबों से बल्ब की जानकारी निचोड़ न पाएं फिर एडिसन पैदा हुए उन्होंने ये किताबें चुराई और इन ग्रंथों से बल्ब बनाने का वो गुप्त तरीका खोज निकाला जो इन किताबों को हजारों वर्षों तक चाटने वाले न ढूंढ पाए थे.

खैर चोरी के फार्मूले से ही सही बनाया तो एडिसन ने ही और उन्होंने सिर्फ बल्ब का आविष्कार ही नही किया था बल्कि 1000 आविष्कार और किये थे.

आज रात के समय मंदिर और मस्जिदों की चकाचौंध देखकर हैरानी होती है क्योंकि इस जगमगाहट के अंदर क्षण भर में संकट दूर करने के दावे होते हैं पल भर में सातवें आसमान तक का बखान होता है कृपा होती है रहमत होती है दुआ होती है प्रार्थनाएं होती हैं उम्मीदें बेची जाती हैं आख़िरत खरीदी जाती है.

खुदा के इन दड़बों में सब कुछ होता है लेकिन कुछ भी इनका अपना नही होता सब चोरी का होता है बिजली चोरी की बल्ब भी चोरी का पंखे चोरी के ऐसी चोरी का कुछ भी इनकी अपनी कमाई का नही होता सब औरों की मेहनत का होता है जिसे ये लोग ऊपरवाले के नाम पर हड़पते हैं धर्म की इन आलीशान इमारतों में लगी एक एक ईंट भी इनकी अपनी नही होती इन मे लगी एक भी चीज इन मुल्ला पंडितों ने नही बनाया.

मजहब की इस चकाचौंध में बैठकर जिस बिजली पंखे या ऐसी का आज ये लोग आनन्द ले रहे हैं उसे किसने बनाया था इन्हें उनका नाम तक याद नही क्योंकि हरामखोरी की आदत पड़ी है.

रोशनी की इस चकाचौंध के पीछे एडिसन ने अपनी सैंकड़ों रातें कुर्बान कर दी थी लेकिन धर्म के इन नकली अड्डों पर पलने वाले ये इंसाननुमा परजीवी आज उस एडिसन का नाम लेना तक मुनासिब नही समझते.

क्योंकि ये कहते हैं कि जिस एडिसन ने बल्ब बनाया उस एडिसन को दिमाग इनके खुदा ने ही तो दिया था अरे भाई तब खुदा ने वही बुद्धि तुम्हे क्यों नही दी ? क्या अपने ही खुदा के सामने तुम इतने बड़े नालायक थे की उसने सारे आविष्कार करने की बुद्धि उन लोगों को दे दी जो तुम्हारी इस बकवास फिलॉसफी को मानते ही नही थे ?
या सारे आविष्कारक तुम्हारे गुलाम थे जिन्होंने तुम्हारी अय्याशियों के लिए अपनी जिंदगी खपा दी ?

कब तक बेशर्मों की तरह हरामखोरी करते रहेंगे आप लोग ?

धर्म के बिना तो दुनिया की एक तिहाई आबादी वर्षों से सुख चैन शांति और समृद्धि के साथ जी रही है लेकिन विज्ञान क्या चीज है जरा एक दिन इसके बिना रह कर तो देखो पता चल जाएगा ?य

50 डिग्री गर्मी में जब तुम ऐसी के मजे ले रहे होते हो न ठीक उसी समय सड़क पर कोई बच्चा भीख मांग रहा होता है जिस समय इन मंदिर और मस्जिदों में तुम लोग ईश्वर और अल्लाह की चापलूसी में लीन होते हो ठीक उसी वक्त न जाने कितने मासूमों के जिस्मो को कोई वहसी दरिंदे भूखे भेड़िये की तरह नोच रहे होते है जिस समय तुम ईशा की नमाज के आखिरी रुकू में आखिरी सलाम फेर रहे होते हो न ठीक उसी समय न जाने कितने मासूम बच्चे भूखे पेट सो रहे होते है कहते क्यों नही अपने उस राहमनुर्रहीम से की इन मासूमों पर थोड़ा तो रहम करे.

जिस ऐसी को तुमने बनाया ही नही आज उसके मजे ले रहे हो जिसने इसका आविष्कार किया था तुम्हे उसका नाम तक याद नही और जिसे तुम कभी साबित ही न कर पाए लोगों से उसका नाम जपाते हो उसके नाम पर समाज का शोषण करते हो पाखण्ड फैलाते हो नफरत के बीज बोते है एक गरीब को दूसरे गरीब से लड़वाते हो सब उसी के नाम पर जिसका अता पता तुम नही ढूंढ पाए अभी तक.

अरे सिर्फ जहालत के सिवा तुमने दिया क्या है दुनिया को कुछ भी तो नही क्योंकि ऊपरवाले से ही फुरसत नही मिली कभी जो नीचे धरती पर कोई नायाब काम कर पाते अरे उस परमात्मा से कॉन्टेक्ट ही स्थापित कर लिए होते तो कम से कम तुम्हारे अपने संकट तो क्षण में दूर हो गए होते.

बीमार पड़ते हो तो हॉस्पिटल याद आता है वहां ट्रीटमेंट लेते हो अल्ट्रासाउंड xray MRI सिटिसकेन करवाते हो इंजेक्शन लगवाते हो कभी सोचा है कि इनका आविष्कार किसने किया ?

जब हर्ट सर्जरी आंखों का आपरेशन किडनी एपेंडिक्स या बवासीर का सफल ऑपेरशन करवाने के बाद हॉस्पिटल से डिसचार्ज होते हो तब तुम्हे उस खुदा का नाम तो याद आ जाता है जिसने तुम्हारी दुआओं और प्रार्थनाओं को कभी सुना ही नही लेकिन तुम भूल जाते हो उन वैज्ञानिकों को जिनकी वजह से तुम चंगे हुए हो.

जब बीमारी की वजह से तुम कराह रहे होते हो तब खुदा की जगह हॉस्पिटल ही क्यों याद आता है तुम्हें ?

उसकी मर्जी के बिना पत्ता भी नही हिलता तब उसकी मर्जी के बिना हॉस्पिटल क्यों पहुंच जाते हो ?

और हाँ ये जरूर याद रखना की हॉस्पिटल की दहलीज पर धर्म और मजहब की तुम्हारी सड़ी हुई फिलॉसफी दम तोड़ देती है और सारी दुआएं आयतें मंत्र और वर्सेज भी फेल हो जाते हैं यहां काम आता है तो सिर्फ और सिर्फ साइंस.

वही विज्ञान तुम्हे ठीक करता है जिसका एक छोटा सा नीडल भी तुमने नही बनाया.

तुमने धर्म के नाम पर दुनिया को क्या दिया
तुमने तो सच मे कुछ नही दिया और न कुछ किया सिवा हरामखोरी के और आज भी तुम सब यही कर रहे हो.

धन्य हो आप लोग....और धन्य हैं वो लोग जो आपके बताए रास्ते पर चलते हैं.

इंसानियत जिंदाबाद 

साइंस हाफिज

दुनिया को बदलने वाले सभी आविष्कारकों को दिल से नमन

No comments:

Post a Comment

Pages