मुझे आपका खुदा नही चाहिए - तर्कशील भारत

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Monday, March 18, 2019

मुझे आपका खुदा नही चाहिए


मुझे आपका खुदा नही चाहिए
मुझे आपकी जन्नत 
और उसमें रहने वाली हूरें नही चाहिए
आपकी आसमानी किताब को
मैं रद्दी समझता हूँ
आपकी मसनून दुआएं 
मेरे किसी काम की नही
आपकी हदीसों को मैं 
कूड़ा समझता हूँ

मुझे आपके नबी की कोई जरूरत नही
मुझे उसका उम्मती होने से भी परहेज है

आपकी रवायतें मुझे हैरान करती हैं
आपकी मस्जिदें मुझे परेशान करती हैं

आपका इतिहास मुझे डराता है
आपका वजूद मुझे कचोटता है

आपके झूठे कायदों से बाख़बर हूँ
आपकी बद्दुआओं से मैं बेअसर हूँ

आपके पास जो खुदा है
वो बहुत बड़ा होगा 
लेकिन सौ फीसदी झूठा है
मेरे पास मेरा थोड़ा सा इल्म है
लेकिन वो बिल्कुल सच्चा है

आपको अपने खुदा पर यकीन होगा
मुझे अपनी समझ पर भरोसा है

आप कहेंगे कि ये समझ 
मुझे आपके खुदा ने दी है
तब पूछो अपने रब से
की उसने मुझे ऐसी समझ क्यों दी
की मैं उसके वजूद से ही 
इनकार करता हूँ
सिर्फ इनकार ही नही
मैं तो तुम्हारे
तमाम ख़ुदाओं पर थूकता भी हूँ

इससे पहले की तुम कहो
कि वो तो एक है
और फिर मेरे सामने
अपने झूठे खुदा को
सच्चा साबित करने की खातिर
झूठी दलीलें पेश करो

मैं तुम्हे बता दूँ की
वो एक कहाँ है
अगर वो एक होता और सच्चा होता
तो फिर
तुम्हे उसके एक होने 
और सच्चा होने को 
साबित करने के लिए 
दूसरों से
लड़ने की जरूरत ही कहाँ थी ?

तुम्हारे पास एक खुदा है
जो औरों के खुदाओं से जुदा है
तुम कहते हो तुम्हारा खुदा हक है
वे कहते हैं उनका ईश्वर सच है

और अपने अपने खुदाओं को 
महान साबित करने के चक्कर मे
दोनों मिलकर इंसानियत तबाह करो
लड़ते रहो एक दूसरे को बर्बाद करते हुए
दुनिया को जहन्नम बना दो

इसलिए मुझे नफरत है तुमसे
तुम्हारे नकली खुदाओ से 
और तुम्हारे पाखंडी ईश्वर से भी

मुझे नही चाहिए 
तुम्हारे दीन की बकवास बातें
मुझे नही सुननी 
तुम्हारे मजहब की
खौफनाक वारदातें

क्योंकि मैं जानता हूँ तुम्हे  
तुम्हारे धर्म को
तुम्हारे झूठे खुदाओ को
और
अब तो
तुम्हारी बेबुनियाद 
कहानियों को भी
मैं अच्छी तरह समझ चुका हूँ

मेरे लिए 
तुम्हारी ये धार्मिक दुकान 
कोई मायने नही रखती

इसलिए

मुझे नही चाहिए 
तुम्हारा सड़ा हुआ समान
मुझे नही चाहिए 
तुम्हारे महंगे अराकान
मुझे नही चाहिए 
तुम्हारे गंदे ख़यालात
मुझे नही चाहिए 
तुम्हारी वहशी जमात

मुझे तुम्हारे वजूद से 
घृणा की बू आती है
तुम्हारी आयतों में
नफरतों बसती है
तुम्हारे खुदाओं में
खौफ नजर आता है
तुम्हारी रवायतों में 
षड्यंत्र झलकता है

तुम्हारी किताबों में 
पाखण्डों के सिवा 
कुछ भी तो नही
तुम्हारे संस्कारों में 
नफरत के सिवा 
कुछ भी तो नही

तुम्हारे त्योहारों में 
लूट के अलावा और क्या है
तुम्हारे अवतारों में 
झूठ के अलावा और क्या है

तुम सब मजहबी गिरोह हो 
धर्म के धंदेबाज हो 
तुम सब
धर्म और मजहब के नाम पर 
अपना उल्लू सीधा करते हो
मक्कारी करते हो
पाखंड फैलाते
जोंक की तरह 
समाज को चूसते हो
दीमक की तरह 
समाज को खोखला करते हो
धर्म के नाम पर
गरीबों को लड़ाते हो
उन्हें बेवकूफ बनाकर
उनका शोषण करते हो
जागरूकता 
इंसानियत और तरक्की के 
दुश्मन हो तुम सब
सत्य प्रेम और परिवर्तन 
से घृणा है तुम सभी को

मेरी नजर में तुम सब
बराबर हो
और
षड्यंत्रकारी भी

इसलिए मैं तुमसे और तुम्हारे मजहब से
अपने सभी नाते तोड़ चुका हूँ

अब मैं खुद को एक इंसान समझता हूँ
और तुम सभी गिरोहों को हैवान समझता हूँ

क्योंकि मैं जानता हूँ तुम्हारी रगों में
खून नही झूठ बहता है
तुम्हारी बातों में हद दर्जे का 
दोगलापन होता है
तुम्हारी सोच में
जहालत के सिवा कुछ भी तो नही

तुम्हारी जमात 
दुनिया को 
फना करने का इरादा रखती है
तुम्हारे धर्मों की भीड़ 
टुनिया को 
तबाह करने का माद्दा रखती है

इसलिए मैं सभी धर्मों को 
नकारता हूँ
इन्हें त्यागता हूँ
और इन्हें 
मानवता का सबसे बड़ा
दुश्मन मानता हूँ

मुझे नही चाहिए वो कोई भी मूरत
जो इंसानों से ज्यादा कीमती हो
मुझे नही चाहिए वो कोई भी मंदिर
जिसके बाहर कोई मासूम बच्चा 
रोटी को तरसता हो

मुझे नही चाहिए ऐसा कोई भी त्योहार
जिसमें तुम्हारी शक्लें शामिल हों

मुझे नही चाहिए 
ऐसी कोई आसमानी किताब
जो एक मासूम बच्चे की 
फटी हुई पुस्तक से ज्यादा पवित्र हो

मुझे नही चाहिए ऐसी कोई भी भीड़
जिसमे तुम्हारे खुदा की चापलूसी होती हो

मुझे नही चाहिए ऐसा कोई भी मुल्क 
जहां मजहबों और जातियों की भीड़ हो

मुझे नही चाहिए ऐसे लोग
जिनकी बुद्धि में धर्म का संक्रमण हो

मुझे नही चाहिए वो दिन 
जिसमे धर्म का अंधेरा हो

मुझे नही चाहिए वो रातें
जिसमे मजहब के चमगादड़ मौजूद हों

मुझे नही चाहिए वो दरख़्त
जिसकी शाखों पर धर्म के उल्लू बैठे हों

मैं पुकारता हूँ
खुद को 
और उन तमाम इंसानों को
जिनमें संवेदनाये बाकी हैं 
और
जो इंसान बनने की प्रक्रिया में हैं

आओ मेरे साथ
हम सब मिलकर 
एक ऐसी व्यवस्था बनाएं
जिसका वातावरण
गंदगी फैलाने वाले 
खतरनाक धार्मिक परजीवियों से 
पूरी तरह मुक्त हो

एक ऐसी व्यवस्था 
जहां दर्द की जगह भावनाएं हो 
जहां रुदन नही संवेदनाएं हो

एक ऐसी व्यवस्था 

जिसमे
हिन्दू और मुसलमान नही 
सिर्फ इंसान रहते हो

एक ऐसी व्यवस्था
जहां
कोई भूखा न सोये 
कोई बेघर न रहे
कोई नंगा न रहे

जहां संसाधनों पर 
सभी का बराबर हक हो 
कोई नीच न रहे 
कोई ऊंचा न बने 
कोई दानी न रहे 
कोई भिखारी न बने 
कोई सती न हो 
कोई वेश्या न बने 

दहेज़ के लिए कोई स्त्री 
जलाई न जाये 
कोई स्त्री
स्त्री होने के कारण 
सताई न जाये 
गर्भ में ही वो गिराई न जाये 
जहां हवस के भूखे भेड़िये न हों
जहां बेटी को बचाने की
जरूरत न हो

जहाँ गोत्र न हो 
जाती का बंधन न हो 
धर्म की कोई दीवार न हो 

एक ऐसी व्यवस्था
जहां
भगवान के आलिशान घर न हो 
आम आदमी बेघर न हो
बेबस न हो 
जहाँ किसी परमेश्वर का सवाल न हो 
जहाँ इश्वर के दलाल न हो

एक ऐसी व्यवस्था,

जिसमें भय,भूख और भ्रस्टाचार न हो 
आतंक,अन्याय और अत्याचार न हो 
किसी औरत से बलात्कार न हो 
और जहाँ मानवता बौनी और लाचार न हो....

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