धर्म के नाम पर तबाह होती इंसानियत - तर्कशील भारत

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Friday, March 15, 2019

धर्म के नाम पर तबाह होती इंसानियत


धर्म का सारा बखेड़ा ईश्वर के नाम पर खड़ा किया गया है गरीब हो या अमीर सब इस ईश्वरीय मायाजाल में फंसे हुए हैं ईश्वर के नाम पर बड़ी बड़ी संस्थाएं खड़ी की गईं है कहीं भक्त जनों के संकट क्षण में दूर करने का दावा किया जाता हैं कही दुआओं के जरिये खुदा से हिफाजत की दरकार की जाती है.

धर्म के धंदेबाज बताते हैं कि ईश्वर उनके इतने करीब है कि उनके पाप और पुण्य पर नजर रखता है वो हर शय पर नाजिर है और कादिर है उसकी इजाजत के बगैर एक पत्ता भी नही हिलता.

ईश्वर की इस परिकल्पना के नाम पर लाखों धर्मस्थल खड़े किये गये हैं अपने संकटों को क्षण में मिटवाने के लिए हर साल खरबों रुपया धर्म के दलालों के पास इकट्ठा हो जाता है फिर भी संकट दूर नही होते और वो रब्बुल आलमीन जिसके नाम पर लाखों मस्जिदें मदरसे और मजार बनाये गये हैं वो आम मुसलमानों की हिफाजत तो नही कर पाता लेकिन उसके नाम पर मजहब के दलाल मालामाल जरूर हो जाते हैं.

अगर ईश्वर और अल्लाह मिलकर लोगों की व्यथा दूर करते तब 6 लाख लोग हर साल सड़क एक्सीडेंट में नही मारे जाते हर साल लाखों बच्चे भूख और कुपोषण से न मरते कर्ज के बोझ तले दबे किसान थोक के भाव मे आत्महत्या न करते.

ईश्वर अल्लाह गोड को हम क्यों मानते हैं ? इसीलिए न कि वो हमारे दुखों को दूर करेगा हमे परेशानियों से बचाएगा आने वाली विपत्तियों से हमारी हिफाजत करेगा केवल इसी भरोसे हम जिंदगी भर धर्मों की बेड़ियों में जकड़े रहते है धार्मिक गिरोह हमें इसी मनोविज्ञान में फंसाते हैं और हम बिना सोचे समझे उनके षड्यंत्रों का शिकार होते चले जाते हैं.

ईश्वर और अल्लाह के नाम दंगे करवाये जाते हैं उसी के नाम पर आतंकवाद जातिवाद घृणा नफरत और शोषण का साम्राज्य खड़ा किया गया है लेकिन जब उसकी जरूरत होती है तब उसका कोई अता पता नही होता.

अभी मैं कुछ घटनाओं का जिक्र करूँगा जिससे थोड़ी बहुत समझ रखने वाला आदमी भी समझ जाएगा कि ईश्वर के नाम पर फैलाये गए इस भ्रम में कितनी सच्चाई है ?

1. पहली घटना में दो मासूम बच्चे जो नमाज पढ़कर लौट रहे थे जैसे ही वो सड़क पर पहुंचे सामने से आ रहे एक ट्रक ने दोनों बच्चों को कुचल दिया इन दोनों नमाजी बच्चों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई. 

इस वीभत्स घटना के लिए जिम्मेदार कौन है वो ट्रक ड्राइवर वो मासूम बच्चे या वो खुदा जिसकी इबादत कर वे लौट रहे थे ? या मजहब के वो दलाल जो हमे दिन रात ये समझाते हैं कि अल्लाह रहमानुर्रहीम है यानी सबसे बड़ा रहम करने वाला है अगर वो सच मे रब्बुल आलमीन था तब उसे उन मासूम बच्चों पर रहम क्यों नही आई ? क्या उसे उन बच्चों को बचाना नही चाहिए था ?

क्या गलती थी उन नादान बच्चों की ? अरे वो तो उस रहमानुर्रहीम की इबादत से लौट रहे थे और उस परवरदिगार के लिए उन्हें बचाना कौन सी बड़ी बात थी ? वह जब किसी बात का इरादा करता है तो उसके लिए उसे बस इतना कहना पड़ता है कि "हो जा" तब वो काम हो जाता है यहां उसे बस इतना ही तो कहना था कि "रुक जा" तो वह ट्रक वही रुक जाता और ये बच्चे बच जाते.

जरा सोचिए उन दोनों मासूम बच्चों की लाशें देखकर उनकी माँ पर क्या गुजरी होगी ?

2. चलिए दूसरी घटना की बात करते हैं पिछले संडे को राकेश का परिवार अपनी कार में घूमने निकला ये लोग भगवान के दर्शन कर लौट रहे थे अचानक उनकी गाड़ी में आग लगी और राकेश की आंखों के सामने उनका पूरा परिवार आग की लपटों में समा गया उनकी दो मासूम बेटियां और उनकी पत्नी उनकी आंखों के सामने ही तड़प तड़प कर खत्म हो गये.

कहाँ था वो भगवान जो भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करने का दावा करता है प्रसाद और चढ़ावे से खुश होने वाला भगवान क्या उस आग को नही बुझा सकता था क्या गलती थी उन मासूमों की जो इतने भयंकर हादसे का शिकार हुए.

पिछले साल नौरात्रों के दौरान एक माँ ने घर मे माता की जोत जलाई थी जिससे घर मे भयंकर आग लगी और दो मासूम बच्चे उस आग में जलकर खत्म हो गये.

बिहार में पिछले साल एक पूजा के दौरान घर मे आग लगने से एक ही परिवार के 11 लोग झुलस कर मर गए थे

कुछ साल पहले जन्मास्टमी के दिन आग लगने से 8 मासूम बच्चे जलकर मर गये थे.

विसर्जन के दौरान हर साल सैंकड़ों बेकसूर मारे जाते हैं पिछले दिनों एक मस्जिद ढह गई जिसमें कई लोग अपने अल्लाह के लिए नमाज पढ़ रहे थे इस हादसे में 9 लोग अल्लाह को प्यारे हो गये. 

हर साल हज के दौरान सैंकड़ों लोग कुचल कर मारे जाते हैं पिछले दस सालों में धार्मिक स्थलों पर होने वाले तमाम बड़े हादसों में लाखों लोग बेरहमी से मारे गए हैं लेकिन उन्हें बचाने कोई अल्लाह ईश्वर गोड नही आया.

ऐसे न जाने कितने हादसे हर साल होते हैं ये सभी वो हादसे हैं जिनमे ईश्वर या अल्लाह सीधे सीधे तौर पर जिम्मेदार साबित होता है क्योंकि इन सभी मौतों में लोग उसकी भक्ति और इबादत में लगे हुए थे.

इन सभी हादसों से साबित होता है कि ईश्वर और अल्लाह किसी की सुरक्षा नही कर सकता फिर उसके नाम पर इतना बड़ा धर्म का साम्राज्य क्यों ? 

अल्लाह और भगवानों के नाम पर देश भर में इतने बड़े भूभाग को कब्जाया गया है की अगर इन जमीनों को इकट्ठा कर दिया जाए तो ये 500 किलोमीटर का इलाका बन जायेगा.

दूसरी ओर देश मे 40 करोड़ लोग बेघर हैं जो झुग्गियों नालों और फुटपाथों की सडांध में जिंदगी काटने को मजबूर हैं.

इन्ही मजारों मदरसों मस्जिदों मंदिरों और आश्रमों पर हर साल ईश्वर और धर्म के नाम पर इतना चढ़ावा चढ़ता है जितने में देश का कर्ज एक बार मे ही उतारा जा सकता है.

धर्म और ईश्वर के नाम पर धर्म के इस व्यापार से आखिर फायदा किसका है ? सोचियेगा जरूर...

जिन समाजों में जितनी ज्यादा गरीबी असमानता और अज्ञानता होती है वहां उतना ही ज्यादा धर्म प्रभावशाली होता है क्योंकि ऐसे समाजों में घोर असुरक्षा की भावना होती है आर्थिक विसमता सामाजिक असहयोग और प्रशानिक भ्रष्टाचार के कारण एक ऐसी स्थिति पैदा होती है जिसमे समाज का हर तबका निराशा और नकारात्मकता की घोर वेदना में जीने लगता है ऐसी स्थिति में हर आदमी परेशान होता है व्यवस्था पर से भरोसा उठ जाता है ऐसे में वो समाज धर्म ईश्वर और पारलौकिकता में अपनी मुश्किलों का हल ढूंढने लगता है यही से शुरू होता है धार्मिक लूट शोषण और पाखंडों का वह सिलसिला जो समाज को बर्बादी के दलदल में और गहराई तक ले जाता है.

इसका समाधान एक ही है जो भी व्यक्ति समाज की इस दुर्गति को तार्किक ढंग से समझता है उसे अपने सुख चैन को त्याग कर समाज की इस व्यथा को दूर करने का प्रयास करना होगा और धार्मिक जहालत में फंसे समाज को जागरूकता की ओर ले जाने का प्रयास करना होगा सरकारें ये काम कभी नही करेंगी क्योंकि उन्हें धर्म और ईश्वर के नाम पर खड़ी इस शोषणवादी व्यवस्था से ताक़त मिलती है धर्म और राजनीति के इस गठजोड़ से दोनों का फायदा होता है दोनों को समाज की उन्नति प्रगति और विकास से खतरा है क्योंकि एक जागरूक समाज मे भ्रष्ट नेता और धार्मिक गिरोह कभी नही पनपते.

इसलिए समाज को जागरूक करना हर उस व्यक्ति का पहला कर्तव्य होना चाहिए जो सत्य प्रेम और परिवर्तन की चाह रखता है जो खुद को मानवतावादी कहता है और जो एक बेहतर भविष्य की कामना करता है.

वर्ना वो दिन दूर नही जब ईश्वर धर्म और परलोक के नाम पर एक जिंदा समाज मुर्दों की भीड़ बना दिया जाएगा और ऐसे मुर्दा समाज मे दमन शोषण वेदना दुख आंसू और रुदन के सिवा कुछ नही होगा.


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