करीबी रिश्तों के बीच प्रेम (शारीरिक) संबंध कहाँ तक जायज है ? - तर्कशील भारत

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Wednesday, February 6, 2019

करीबी रिश्तों के बीच प्रेम (शारीरिक) संबंध कहाँ तक जायज है ?


स्त्री और पुरुष के बीच का आकर्षण नैसर्गिक है ये आकर्षण करीबी रिश्तों के बीच भी हो सकता है लेकिन क्योंकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है उसने इस तरह के रिश्तों में कई प्रकार की समस्याओं का अनुभव किया और दूध के रिश्तों में संभोग को वर्जित कर दिया इसलिए बहुत पुराने समय से ही ज्यादातर सभ्यताओं में एक ही माता और पिता की संतानों के बीच इस तरह के रिश्ते निषेध करार दिए गए.
 फिर भी कई संस्कृतियों में आज भी इस तरह की परंपरा मौजूद है इजिप्ट के फराओ राजवंश में मां और बेटा सगे भाई बहन पिता और पुत्री की शादी के प्रमाण मिलते हैं क्लियोपैट्रा की शादी उसके सगे भाई से हुई थी.
सर डार्विन की बीबी उनकी चचेरी बहन भी थीं सर आइंस्टीन की शादी भी उनके सगी चाचा की लड़की से हुई थी राधाकृष्णन जी की शादी भी उनकी चाचा की लड़की से हुई थी.
बाद में इस तरह के खून के रिश्तों को पूरी तरह निषेद कर दिया गया लेकिन चचेरे मौसेरे भाई बहनों के बीच के संबंध जारी रहे और आज भी प्रचलित हैं खासकर मुस्लिम समाज मे तो आज भी ये प्रथा कायम है.
अब सवाल यह है कि ये गलत है कि सही तो एक नास्तिक नजरिये से कहूँ तो इस तरह के करीबी रिश्तों से बचना चाहिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी करीबी रिश्तों का शारीरिक संबंध सही नही है.
दो किनारों के बीच ही बहती है तभी उसे नदी कहा जाता है जब यही नदी अपने किनारों को तोड़ती है तब वह बाढ़ बनकर तबाही का कारण बन जाती है इसीलिए इंसानों के लिए भी जरूरी है कि वो अपने मानवीय दायरों से बाहर न जाये वर्ना इंसान और जानवर का फर्क ही बाकी नही बचेगा.

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