इंसानियत पर लगे बदनुमा दाग हो तुम सब... - तर्कशील भारत

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Saturday, February 16, 2019

इंसानियत पर लगे बदनुमा दाग हो तुम सब...


तुम्हे जन्नत चाहिए
वही जन्नत न 
जहां हूरें रहा करती हैं
जहां सुंदर बगीचे हैं
और खूबसूरत नदियां बहा करती हैं

लेकिन अफसोस

तुम जिस झूठी जन्नत के नाम पर
इस खूबसूरत दुनिया को 
तबाह करने पर तुले हो
वो तुम्हारी नकली जन्नत 
कही नही है 

लेकिन जहां तुमने मासूमों
का खून बहाया 
वो कश्मीर 
सच में 
कभी जन्नत हुआ करता था

यहां कभी चारों ओर 
खुशियों की नहरें
बहा करती थी
खूबसूरत हूरें रहा करती थीं
यहां कभी ख्वाबों की बगिया 
लाहलाहया करती थी
उमंगों की नदियां 
उफान मारती थी
यहां की वादियों में कभी
मुहब्बत भी गूँजा करती थी
क्योंकि 
तब तुम यहाँ नही थे
और तब कश्मीरियत जिंदा थी

तब यहां चारों ओर
इश्क की सदायें गूँजा करती थी
हर दिल मे अरमान सजे थे 
हर आंखों में सपने छुपे थे
हाथों में किताबें थी
होठों पर मुस्कान थे
क्योंकि तब
तुम यहाँ नही थे
और तब कश्मीरियत जिंदा थी

लेकिन यहां अब
तुम्हारी मेहरबानी से
झरनों की झरझारहट नही
बल्कि गोलियों की गड़गड़ाहट 
ज्यादा सुनाई देती है

यहां की वादियों में
तुम्हरी नापाक चहलकदमी के आगे
पक्षियों की चहचहाहट थम सी गई है

तुम्हारे डर से
अब यहां की नदियां भी
खामोशी से बहती हैं

और तुम्हारे वजूद से
यहां के खूबसूरत बगीचे भी
अपना आस्तित्व खो चुके हैं
हूरें गुमसुदा हो चुकी हैं
मुहब्बतें 
नफरतों में बदल चुकी हैं
हाथों में किताबों की जगह
पत्थर आ चुके है
हैवानियत जाग चुकी है
क्योंकि यहां अब तुम आ चुके हो
इसलिए
कश्मीरियत खत्म हो चुकी है

आज इस खूबसूरत
जन्नत को
अपने खयाली जन्नत की चाह में
जहन्नम से भी बदतर बना दिया तुमने

मुहब्बत को मार दिया
सपनो को तोड़ दिया
उम्मीदों को कुचल दिया
खुशियों को निगल गये
झूठे खुदा और झूठी जन्नत की चाह में
इस खूबसूरत जन्नत को
जहन्नम से भी बदतर बना दिया तुमने

अरे जिस खुदा के नाम पर
तुम हैवानियत का 
ये गन्दा खेल खेलते हो
वो खुदा
तुम्हारे खयाली जन्नत की तरह 
बिल्कुल खयाली है झूठा है मक्कार है

साथ ही वो ईश्वर भी 
बिल्कुल खयाली है झूठा है मक्कार है
जो भक्तजनों के संकट
क्षण में दूर करने का 
दावा करता है 

मुझे लगता है 
वो खुदा और ईश्वर 
अगर है तो वह  
तुम्हारी तरह हैवान है 
या फिर उसका कोई वजूद ही नही

अगर वो है तब
तुम कत्ल करते हो 
वो देखता रहता है
तुम गोलियां चलाते हो
वो तालियां बजाता है
मासूमों की चीखें 
उसे सुनाई नही देतीं
घण्टा और अजान वो सुन लेता है

या तो वो 
तुमसे भी बड़ा आतंकवादी है 
या फिर वो है ही नही

वो होता तो सबसे पहले
तुम जैसे हैवानों के वजूद को ही
नेस्तनाबूद कर देता
तुम्हारे दहशतगर्द इरादों को
नष्ट कर देता
तुम्हारी घिनौनी सोच को 
मिटा देता
तुम्हारे खौफनाक मंसूबों को
नष्ट कर देता 
या
तुम्हारी गन्दी नस्लों को
पनपने से रोक देता

लेकिन अफसोस कि वो 
तुम्हरी गंदी सोच को रोकता नही
तुम्हारे खौफनाक मंसूबों को
रौंदता नही
और तुम्हारी गन्दी नस्लों को 
और बढ़ावा देता है

इसलिए मैं 
दावे के साथ कहता हूं कि 
वो नही है
रत्ती भर भी नही
ठीक वैसे ही जैसे तुम्हारे अंदर 
इंसानी फितरत नहीं
संवेदनाये नही
दर्द नही भावनाएं नही
क्योंकि
तुम इंसान हो ही नही 
रत्ती भर भी नही

अरे तुम्हारी औकात तो 
जानवर कहलाने की भी नही 
क्योंकि एक जानवर भी 
अपनी प्रजाति के जानवरों को
नही मारता

तुम 
और तुम जैसी सोच वाले 
तुम्हारे तमाम जिहादी लोग
संगठन नेता उलेमा 
और तुम्हारे सरपरस्त आका

सब के सब
मानवता पर
कलंक हो
इंसानियत पर लगे 
बदनुमा दाग हो तुम सब

तुम्हारी जितनी निंदा की जाए
तुम्हारे कुकर्मों के आगे
वो कम है

अभी भी वक्त है 
सुधर जाओ
बहुत दुख है दुनिया में
इसे और मत बढ़ाओ

लड़ना है तो
मजहब के नाम नही
बल्कि
गरीबी और भुखमरी से लड़ो
मरना है तो
बुजदिलों की तरह नही
बल्कि
इंसानियत की खातिर मरो

बांटना है तो
नफरत नही
बल्कि
दूसरों के दर्द को बांटो

बनना है तो
फिदाइन नही
बल्कि
इंसान बनो

घृणा की 
ऐसी चिंगारी मत सुलगाओ
जिसमे जलकर 
पूरी दुनिया भस्म हो जाये
बल्कि मुहब्बत की 
ऐसी मिसाल कायम करो कि
नफरतों की ये आग 
हमेशा के लिए बुझ जाये.

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