पाखंडवाद के नाश से ही शुरू होगा देश का असली विकास - तर्कशील भारत

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Monday, February 18, 2019

पाखंडवाद के नाश से ही शुरू होगा देश का असली विकास



आज जब हम यूरोपियन महाद्वीप के देशों को देखते हैं तो वहां चारों ओर सुख समृद्धि और सम्पन्नता ही दिखाई देती है विज्ञान और टेक्नोलॉजी में सबसे आगे और सबसे तेज गति से भागता धरती का ये खूबसूरत इलाका हमेशा से ऐसा नही था 16 सदी का यूरोप आज के यूरोप से बिल्कुल अलग था.

तब यहां चारों ओर भयंकर गरीबी पसरी हुई थी लगभग 90 फीसदी आबादी गरीब थी प्लेग मलेरिया बुखार जैसी बीमारियों से हर साल लाखों लोग मर जाते थे समाज में धर्म के नाम पर भयंकर शोषण कायम था चर्च और पादरियों ने समाज मे धर्म का ऐसा आडम्बर खड़ा किया हुआ था कि तरह तरह के कर्मकांडों के नाम पर आम आदमी जीवन भर भयंकर कर्ज में डूबा रहता था.

तरक्की ज्ञान और जागरूकता के सभी दरवाजों पर धार्मिक गिरोहों का जबरदस्त पहरा था.

कदम कदम पर पाखंड और अन्धविश्वाश धर्म के नाम पर घृणा दंगे फसाद पादरियों की लूट यही उस समय के समाज की विडंबना थी. 

ये भी सच है कि भूख कुपोषण अराजकता और भ्रस्टाचार की अति वाली ऐसी जमीन पर ही क्रांति के बीज अंकुरित होते है.

"मुफलिसी के स्याह कोनों में जुगनुओं के चराग जलते हैं और इन्ही चरागों की झिलमिलाहट में सैंकड़ों इन्कलाब पलते हैं"

यही वो दौर था जब विज्ञान के नवीन सिद्धांतों का धर्म की सत्ता से सीधा टकराव शुरू हुआ चर्च को चुनौती मिलने लगी पोप और पादरियों को कई नए नए सवालों का सामना करना पड़ा बाइबिल की मान्यताओं पर तर्कवादियों का प्रहार होने लगा था.

यह गेलिलियो कोपरनिकस ज्योर्दानों ब्रूनो का वही दौर था जब बाइबिल के ईश्वरीय सिद्धांतों पर बुद्धिवादी इंसानों की समझ हावी हो रही थी जिसने धर्मसत्ता की चूलें हिला दी थीं लेकिन फिर भी धर्म का वर्चस्व कायम था क्योंकि धर्म का राजनीति के साथ मजबूत गठजोड़ था जिसे तोड़ना असम्भव था.

इसलिए कोपिरनिक्स गेलिलियो ब्रूनो सहित इस दौर के बहुत से बुद्धिवादियों को यातनाएं झेलनी पड़ीं ब्रूनो को जिंदा जला जला दिया गया कोपरनिकस को देश से निकाल दिया गया और गेलिलियो को कैद कर दिया गया साथ ही उस दौर के सभी वैज्ञानिकों शोधकर्ताओं और तर्कवादियों को धर्म और राज सत्ता का दुश्मन मान लिया गया था जिससे प्रगतिशील वर्ग में भारी असंतोष पैदा होने लगा.

इस असंतोष की परिणति जर्मनी में हुई जब मार्टिन लूथर नाम के एक नौजवान ने चर्च की सत्ता को चुनौती देते हुए कहा कि  "हम चोर और ठगों को फांसी देते हैं तब सभी बुराइयों के जड़ इन धर्मगुरुओं पोप और पादरियों को फांसी पर क्यों नही लटकाते क्योंकि इनसे बड़ा ठग कोई दूसरा हो ही नही सकता मैं अग्नि को साक्षी मानते हुए ये घोषणा करता हूँ कि एक दिन मैं पोप और उसके सभी धार्मिक नियमों को जला दूंगा"

इस घोषणा के बाद मार्टिन लूथर ने जनजागरण का अभियान चलाया और धीरे धीरे वो जनता को ये समझाने में कामयाब होने लगा कि "सभी सामाजिक बुराइयों की जड़ में ये धर्मगुरु ही हैं जो जनता को आपस मे लड़ाते है और धर्म के नाम पर उनका जबरदस्त शोषण भी करते हैं"

मार्टिन लूथर ने लोगों को समझाया की "तीर्थयात्रा और धर्म के नाम पर होने वाले बेफिजूल के कर्मकांड ही हमारी प्रगति में सबसे बड़े बाधक हैं इन धार्मिक प्रयोजनों से जनता गरीब होती है और उसे जोंक की तरह चूसने वाला शोषक वर्ग और मजबूत होता है इसलिए इन सभी कर्मकांडों पर तुरंत रोक लगनी चाहिए"

मार्टिन लूथर के एक साथी थे हूटन जिनके पिता राजा हेनरी के सलाहकार थे एक दिन हूटन अपने पिता के साथ सम्राट हेनरी के पास पहुंचे और उन्होंने सम्राट से कहा "पोप का पद समाप्त कर देना चाहिए आश्रमों मठों और धर्म से जुड़ी सभी संस्थाओं की पूरी संपत्ति को जब्त कर उसे गरीबों में बांट देना चाहिए इसके साथ ही सौ में से निन्यानवे पादरियों को देश से बाहर खदेड़ देना चाहिए केवल यही एकमात्र तरीका है जिससे जर्मनी की तमाम सामाजिक बुराइयां खत्म हो सकती हैं धर्मस्थलों की संपत्ति जब्त करने से देश मजबूत होगा देश के आर्थिक हालात सुधरेंगे चर्च और मठों में इकट्ठी की गई दौलत से सेना मजबूत होगी तभी हमारा देश तरक्की करेगा"

राजा हेनरी को हूटन की ये बात 2 साल बाद तब समझ आई जब वह एक चर्च के दौरे पर पहुंचा वहां उसे एक नन मिली जिसने पादरियों द्वारा चर्च में होने वाले भ्रस्टाचार की कहानी सुनाई.

यहां से लौटकर उसने जर्मनी के लगभग सभी चर्चों मठों और पादरियों का एक गुप्त सर्वे करवाया जिसके नतीजे उसके होश उड़ा देने वाले थे .

अष्टम हेनरी ने 1534 में अपनी पार्लियामेंट द्वारा जर्मनी के तमाम चर्चों में इकट्ठा धन पर पादरियों का एकाधिकार समाप्त कर उसे राज्य का हिस्सा बना दिया साथ ही राज्य के हर कर्मचारी के लिए ये नियम बना दिया कि वो पोप के बनाये नियमों को सर्वोपरी नही मानेगा.

इसके बाद सम्राट हेनरी ने मठों पादरियों और चर्चों की व्यापक जांच शुरू करवाई सम्राट हेनरी ने आदेश पारित किया कि जो भी पादरी भ्रष्ट मिले उसे जेल में ठूस दिया जाए और उसकी संपत्ति को जब्त कर लिया जाए.

इसके बाद धर्म के ठेकेदारों ने विद्रोह शुरू कर दिया राजा हेनरी ने बहुत ही निडरता से इस विद्रोह को कुचल दिया और इस विद्रोह में शामिल धर्मगुरुओं के इस आचरण से गुस्साए हेनरी ने उन्हें देशद्रोही मानते हुए मौत की सजा सुना दी और सभी धर्मस्थलों को तोड़ने का हुक्म दे दिया उनमे जो चीज भी काम की थी उसे जब्त कर लिया इस कार्यवाही के दौरान ऐसी तमाम मूर्तियों को तोड़ दिया गया जिनके बारे में भ्रम था कि इनमें ईश्वरीय शक्तियां हैं.

वेल्स में काठ की एक विशाल मूर्ति की पूजा होती थी उसे आग के हवाले कर दिया गया सैंकड़ों वर्ष पुराने कई चर्चों गिरजाघरों को भी फूंक दिया गया.

इस तरह लूथर की प्रतिज्ञा पूरी हुई थी.

इस दौरान कुछ पादरी डर के मारे दूसरे देशों में भाग गए और कुछ ने स्वीकार कर लिया कि वे दुराचारी थे और उन्होंने अपनी मर्जी से अपने मठों को राजा के हवाले कर दिया.

बाद में इन मठों से इतनी दौलत इकट्ठी हो गई कि 1545 तक जर्मनी में एक भी आदमी भूमिहीन नही रह गया था.

इस धार्मिक क्रांति की वजह से ही यूरोप में तार्किक सोच ने जन्म लिया जिससे तर्क और शोध की नई परंपरा की शुरुआत हुई और विज्ञान के इसी पथ पर चलते हुए पूरा यूरोपियन महाद्वीप सुख समृद्धि विकास सम्पन्नता और मानवता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचने में कामयाब हुआ.

आज इक्कीसवीं सदी में भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश भी वही खड़े हैं जहां 16वी सदी का यूरोप था आज यहां सामाजिक स्तर पर वही सारी विषमताएं मौजूद हैं जो यूरोपियन समाज मे उस समय हुआ करती थीं.

इस पूरे उपमहाद्वीप को आज धार्मिक क्रांति का बिगुल बजाने वाले हेनरी लूथर और हूटन की सख्त जरूरत है तभी दुनिया की एक चौथाई आबादी वाला ये पूरा क्षेत्र पाखंड और गरीबी के कैंसर से मुक्त हो पायेगा और इस धार्मिक संक्रमण से मुक्त होकर ही ये पूरा इलाका विकास प्रगति सम्पन्नता और मानवता के पथ पर अग्रसर होगा और फिर से अखंड भारत बन कर विश्वगुरू बन जाएगा.

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