हज़रात मोहम्मद द्वारा किये गए आसमानी सफर का वैज्ञानिक विश्लेषण - तर्कशील भारत

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Thursday, January 31, 2019

हज़रात मोहम्मद द्वारा किये गए आसमानी सफर का वैज्ञानिक विश्लेषण



विज्ञान और धर्म दोनो में कोई तालमेल ही नही जहां विज्ञान तर्क शोध और परीक्षण पर आधारित होता है वही धर्म आस्था और विश्वाश पर टिका होता है इसलिए धर्म का विज्ञान से दूर दूर तक कोई संबंध ही नही है.

सच तो ये है कि आज धर्म पूरी तरह विज्ञान की बैसाखी पर चल रहा है दिन रात धर्म अध्यात्म या ईश्वर के चमत्कारों की बकवासे करने वाले धर्मगुरु आज विज्ञान की बदौलत ही धर्म का प्रचार करते हैं और फिर भी धर्म को विज्ञान से श्रेष्ठ बतातें हैं.

दुनिया भर में बन रहे मंदिर मस्जिद चर्च के स्ट्रक्टर पर गौर कीजिए पूरा विज्ञान नजर आएगा यहां धर्म का कोई रोल नही आर्किटेक्टर से लेकर ईंट सीमेंट छड़ लेंटर प्लास्टर और रंगपेट सब विज्ञान ही तो है इन धार्मिक इमारतों में बिजली पानी एसी पंखे लाइट भी विज्ञान की देन ही है लेकिन दोगलापन देखिये की इन्ही धर्मस्थलों से मिले धार्मिक ज्ञान से विज्ञान की धज्जियां उड़ाई जाती हैं.

ये लोग इन धर्मस्थलों की चारदीवारी के अंदर बैठ कर कितना भी धर्म की मिथकीय कहानियों का गुणगान करें किसने रोका है ? लेकिन दुख तब होता है जब यही लोग धर्म की कपोलकल्पनाओं को साइंटिफिक साबित करने की नाकाम कोशिश करना शुरू कर देते हैं.

ऐसे ही एक मौलाना साहब जो शायद जाकिर नाइक के शिष्य हैं आजकल यूट्यूब पर इस्लामिक मान्यताओं का साइंटिफिक एक्सप्लेनेशन करने की जद्दोजहद में लगे हुए है.

अभी हाल ही में मैंने उनका एक वीडियो देखा जिसमे वो मिराज की घटना का वैज्ञानिक विश्लेषण कर रहे हैं.

उनके इस वीडियो का पोस्टमार्टम करने से पहले थोड़ा मैं बता दूं कि मिराज की कहानी है क्या ?

बुखारी शरीफ और मुस्लिम शरीफों की हदीसों के अनुसार मुहम्मद साहब ने एक दिन अपने लोगों को इकठ्ठा किया और उन्हें बताया की ''कल रात इश्वर ने मुझे बहुत ही सम्मान प्रदान किया मैं सो रहा था की ईश्वर के एक दूत आये उनके साथ उनका एक खच्चर भी था जिसपर बैठकर हम दोनों बैतूल मक़दिस पहुंच गए"

बैतूल मक़दिस वही जगह है जिस पर अधिकार के लिए यहूदी ईसाई और मुसलमान तीनों दशकों से लड़ रहे हैं अरब से यहां तक पहुंचने के लिए उस समय ऊंट से जाने में दो महीने लग जाते थे जहां हजरत साहब क्षण भर में पहुंच गए थे खैर आगे की कहानी सुनिए.

यहाँ लाकर फरिश्ते ने हजरत साहब का सीना खोलकर पवित्र पानी से उसे धोया और फिर उसे इमान और हिकमत से भरकर बंद कर दिया इसके बाद अचानक दोनो एक दूसरे पवित्र स्थान पर पहुँच गए.

इसके बाद दूत उन्हें लेकर एक तीसरे पवित्र स्थान पहुंचा जहाँ उन्होंने दो बार नमाज अदा की दूत उनके सामने दो प्याले लेकर आया एक दूध से भरा था और दूसरा शराब से लबरेज......हजरत साहब ने दूध वाला प्याला स्वीकार किया तो दूत ने कहा की आपने दूध वाला प्याला स्वीकार कर धर्माचार का परिचय दिया है.

इसके बाद आसमान का सफ़र आरम्भ हुआ जब दोनो पहले आसमान पर पहुंचे तो दूत ने वहां तैनात चौकीदार से दरवाजा खोलने को कहा उसने पूछा "तुम्हारे साथ कौन है ? और क्या ये बुलाये गए हैं ?'' दूत ने कहा "हाँ बुलाये गए हैं "यह सुनकर पहले आसमान के उस चौकीदार ने दरवाजा खोलते हुए कहा "ऐसी हस्ती का आना मुबारक हो" जब दोनो अन्दर दाखिल हुए तो उनकी मुलाकात दुनिया के पहले मनुष्य आदम से हुई.

इसके बाद दुसरे आसमान पर पहुंचे और पहले की तरह यहाँ भी चौकीदार को परिचय देने के बाद अन्दर दाखिल हुए जहाँ दो पुराने जमाने के मस्सेंजरो से परिचय हुआ

इनको सलाम करने के बाद इसी तरह तीसरे चौथे पांचवे और छठे आसमान पर गए और अंत में सातवे आसमान पर पहुंच गए जहां उनकी मुलाकात सर्वशक्तिमान अल्लाह से हुई अल्लाह ने उन्हें कई तोहफे भी दिए जैसे रोजा और नमाज.

इस यात्रा में हजरत साहब को स्वर्ग और नर्क लाइव दिखाया गया स्वर्ग में उन्होंने देखा कि कुछ लोग यहां जन्नत का मजा ले रहे हैं और दोजख में उन्होंने देखा कि यहां कुछ लोग अपने कुकर्मों की भयंकर सजा भोग रहे हैं इसके बाद वे अपने घर वापस लौटे इस तरह यह स्वर्ग यात्रा समाप्त होती है इसी घटना को मिराज कहा जाता है.

सुबह जब इन्होंने अपनी इस स्वर्ग यात्रा का विवरण लोगो को बताया तो उनके अनुयाइओ ने उनकी इस कहानी के एक एक शब्द को सच मान लिया परन्तु उस समय भी कुछ तर्कशील लोग मौजूद थे जिन्हें ये बात बिल्कुल हजम नही हुई उन्होंने इस बात को ये कह कर ख़ारिज कर दिया "तू तो बस हमारे ही जैसा एक आदमी है हम तो तुझे झूठे लोगों में से ही पाते हैं" कुरान -अश-शुअरा, आयत १८६

जब हम इस यात्रा विवरण की कहानी को तर्क की कसौटी पर कसते हैं तो कई प्रश्न खड़े हो जाते हैं जैसा की हदीसों में कहा गया है की सुबह उन्होंने लोगों को ये बात बताई इसके अलावा इस बात का और कोई प्रमाण नहीं है.

 हदीसों में तो और भी कई सारी कपोलकल्पित बातें भरी पड़ी हैं जिन्हें सच मानना सत्य का गला घोंटने के बराबर है मिराज की इस घटना में हजरत साहब के अलावा ...किसी ने न तो उस दूत को देखा न उस खच्चर को देखा बस मान गए.

इस विवरण से तो यही पता चलता है की इस घटना से पहले इनके अन्दर इमान नही था तभी तो ईश्वर का दूत उन्हें पवित्र स्थान ले जाकर उनका सीना फाड़ के इमान घुसेड़ देता है अगर उनके अन्दर ईमान था तो फिर दूत को ऐसा करने की क्या आवश्यकता पड़ी ? 

और क्या इस बात का कोई आधार है की इमान सीने में होता है ? धर्म या इमान अच्छाई या बुराई तो इन्सान के मस्तिष्क की देन है ये इस बात पर निर्भर करता है की व्यक्ति को बचपन में कैसे संस्कार मिले या उसका विकास किस प्रकार हुआ है ?

इस तरह ईमान दिमाग के अन्दर होता है न की सीने में परन्तु क्या सर्वज्ञान संपन्न परमात्मा को इतना भी ज्ञान नहीं था जिसे वह अपने दूत को सिखाते की बेटा इमान सीने में नहीं दिमाग में होता है जाओ और उनका दिमाग खोल के उसको साफ़ करना सीने को नहीं क्योंकि वहां दिल होता है जो दिमाग को खून पहुँचाने का काम करता है.

इसके बाद हम चलते हैं दूध पीने वाली घटना पर जब देवदूत उनको दूध और शराब से भरा गिलास देते हैं तो साहब जी दूध को स्वीकार करते हैं और शराब से इंकार करते हैं इस पर दूत कहता है की शराब को मना कर निश्चय ही आपने धर्माचार का परिचय दिया है 

अब इस घटना पर भी कई प्रश्न खड़े हो जाते है जैसे की जब दूत उनका सीना धोकर ईमान घुसेड देते हैं तब तो आदमी धर्माचार ही करेगा न ?

गाने का एप इंसटाल करोगे तो गाना ही बजेगा न फिल्म थोड़े ही चलेगी ,और क्या दूत उन्हें दूध और शराब देकर परिक्षण कर रहे थे की जो ईमान घुसेड़ा गया है वो सही काम कर रहा है की नहीं यानी दूत को अपने इस इंस्टालेशन की प्रक्रिया पर भरोसा नहीं था , मतलब की अगर उन्होंने दूध पिया तो वह सीने में ईमान घुसेड़ने की वजह से वर्ना... खैर छोड़िये...

ये पूरी कहानी इतनी हास्यास्पद है कि इसे तो उसी दौर में नकार दिया गया था लेकिन अफसोस कि बात है कि आज के इस दौर में भी लोग इस तरह की अवैज्ञानिक कहानियों पर यकीन करते हैं.

इस पूरी घटना में सात आसमानों का जिक्र बार बार आता है गौर करने वाली बात है कि एक आसमान से दूसरे आसमान के इस हवाई सफर में  
हर आसमान का एक दरवाजा है और उस दरवाजे पर एक पहरेदार बैठा है जो आनेवाले के लिए आसमान का दरवाजा खोलता है. गजब की स्टोरी है आसमान का गेट वाह और उस गेट पर बैठा कोई चौकीदार...

हदीसों की इन बातों से मुझे आश्चर्य नही होता क्योंकि इनमें कल्पनाओ की भरमार है मुझे हैरानी तब होती है जब इन मिथकीय बातों को विज्ञान से जोड़ने की कोशिश की जाती है

जो लोग ऐसा करते है उन्हें विज्ञान की सतही जानकारी भी नही होती मान लीजिए कि वो खच्चर प्रकाश की गति से दौड़ता था तब भी उसे हमारी गैलेक्सी को पार करने में ही एक लाख साल लग जाते क्योंकि मिल्कीवे के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में ही दो लाख लाइट ईयर की दूरी तय करनी पड़ती और प्रकाश की गति से चलने के बावजूद भी उस खच्चर को हमारे यूनिवर्स के आखिरी छोर तक पहुंचने में 7 अरब साल लग जाते क्योंकि ब्रह्मण्ड के एक छोर से दूसरे छोर की दूरी 13 अरब 70 करोड़ प्रकाश वर्ष है.

तो इसका अर्थ हुआ कि वो खच्चर लाइट की स्पीड से भी यूनिवर्स के आखिरी छोर की यात्रा नही कर सकता.

रही बात वार्म होल की तो उस फरिस्ते से वॉर्म होल बनाने की उम्मीद भी कैसे की जा सकती है जिसे इतनी भी समझ न हो कि ईमान दिमाग मे होता है दिल तो केवल शरीर मे ब्लड को पम्प करने के लिए होता है.

और इससे भी हैरानी की बात तो यह है कि जाकिर नाइक जैसे नकली डॉक्टर और उनके कुछ चेले आज कल धर्म की अवैज्ञानिक कहानियों का वैज्ञानिक विश्लेषण भी करने लगे हैं हालांकि इस हरामखोरी में सभी धार्मिक गिरोह माहिर होते हैं कमाल की बात तो यह है कि जिनकी बुनियाद ही झूठ पर टिकी हो वे लोग विज्ञान की बातें करते हैं वाह..

दुनिया के तमाम धार्मिक गिरोह और उनके एजेंट मिलकर अपने धार्मिक ज्ञान से एक माचिस की तीली तक जला नही सकते और बातें करते हैं प्रकाश की गति को मात देने की वाह धन्य हैं आप लोग और धन्य हैं आपके भक्त...

इतना समझ लीजिए कि धार्मिक कहानियों में सिवा बकवासों के ऐसा कुछ भी नही जिसे आप विज्ञान की संज्ञा दे सकें इनका विज्ञान से कुछ भी लेना देना नही है विज्ञान निरंतर खोज की एक प्रक्रिया है जिस दिन वो ईश्वर को खोज लेगा उसे स्वीकार भी कर लेगा.

झूठ और शोषण पर आधारित धर्म ही दिन रात ईश्वर के होने का राग अलापता है लेकिन अफसोस कि कोई भी धर्म आज तक उसके होने का एक भी सबूत नही दे पाया है.

धर्म नही होगा तो धर्म द्वारा पैदा की गई घृणात्मक द्वेषपूर्ण झूठी और घिनौनी मानसिकता भी नही होगी और जब ऐसी अमानवीय सोच ही नही होगी तब राजनैतिक और सामाजिक व्यवस्था मानवता पर आधारित होगी जिसमें नफरत के लिए कोई जगह नही होगी.

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