ईश्वर की खोज - तर्कशील भारत

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Sunday, December 16, 2018

ईश्वर की खोज


मुझे किसी के आस्तिक होने से कोई आपत्ति नही है बल्कि मैं तो धर्म और ईश्वर के नाम पर पाखंड फैलाने वाले धार्मिक गिरोहों का विरोधी हूँ जो जनमानस को धर्म और ईश्वर के नाम पर सदियों से लूट रहे हैं.

आज पूरी दुनिया मे ईश्वर पर आधारित लगभग 4000 धर्म आस्तित्व में है लेकिन आज तक कोई भी धर्म ईश्वर को साबित नही कर पाया तमाम धार्मिक गिरोहों ने जितना समय ईश्वर के नाम पर खून खराबे में नफरत फैलाने में सत्य का दमन करने में और षड्यंत्र रचने में बर्बाद किया है उतना समय और संसाधन ईश्वर अल्लाह या गॉड को खोजने में लगाया होता तो आज दुनिया की तस्वीर ही कुछ और होती तब उस तथाकथित ईश्वर के अस्तित्व के होने या न होने का सवाल ही नही बचता.

ईश्वर है या नही ये विज्ञान का सवाल ही नही है ये तो धर्मों की कपोलकल्पना है विज्ञान को जिस दिन किसी ग्रह पर कोई ईश्वर नाम का जीव मिल जाएगा उस दिन विज्ञान के लिए भी ईश्वर की यह खोज बहुत बड़ी उपलब्धि साबित हो जाएगी.

सभी धर्मों की बुनियाद में ईश्वर है यानी धर्मों का पूरा बखेड़ा ईश्वर अल्लाह गॉड के अस्तित्व से ही शुरू होता है वो ईश्वर जो अजान और घण्टे की आवाज सुनता है भक्त जनों की व्यथा को क्षण में दूर करता है उसकी प्रार्थना को स्वीकार करता है नमाज को पसंद करता है हज से खुश होता है जानवर की कुर्बानी का सवाब देता है दुआओं को कुबूल करता है ब्राह्मण गाय और धर्म की रक्षा के लिए समय समय पर अवतार लेता है कबीलों को सही रास्ते पर लाने के लिए पैगम्बरों और नबियों को भेजता है फिर उन नबियों पर आसमान से किताब उतारता है ये वही ईश्वर है जो धरती पर धर्म की स्थापना के लिए किसी कुंवारी लड़की को प्रेग्नेंट भी कर देता है इन सभी सुकर्मों के अलावा और भी बहुत से महान काम ईश्वर करता आया है इसलिए चलिए आज तर्क से उसी ईश्वर अल्लाह गॉड और उसके धर्म की पड़ताल करते हैं.

विज्ञान के अनुसार ईश्वर का कोई वजूद नही उसके होने की बात पूरी तरह से अवैज्ञानिक है क्योंकि थोड़ी देर के लिए अगर मान भी लिया जाये कि कोई ऐसी ताक़त है भी जिसे हम ईश्वर कहते है तो वो भी भौतिकी के नियमों से मुक्त नही हो सकता ये संभव ही नही है क्योंकि ब्रह्मांड का कोई भी तत्व इन नियमों से आज़ाद नही है.

अगर आप कहेंगे कि उसने ही इन नियमों को बनाया है तो इस बात को साबित करने के लिए आपके पास कोई प्रमाण नही है आप कहेंगे कि फलाँ किताब में ईश्वर का प्रमाण है तो माफ कीजियेगा आपके गप्प ग्रंथों को विज्ञान नही मानता जिस ईश्वर को साबित करने के लिए आपकी आसमानी किताबें दलीलें देेेती हैं वो ईश्वर तो खुद ही लापता है अगर इन धर्म ग्रंथों में उसका कोई अता पता होता तब पूरी दुनिया मे उसके नाम पर इतनी अराजकता नही होती आप कहेंगे कि वो है लेकिन सामने नही आएगा तो बताइए उसे डर किसका है ?

चलिए थोड़ी देर के लिए मान लेते हैं कि
उसने बिग बैंग से सृष्टि को एक झटके में बना दिया तो आप ये बताइये की उससे पहले वो कहाँ था ? और उसने ऐसा क्यों किया ? हो सकता है हमारी बुद्धि अभी इतनी विकसित नही हुई कि फिलहाल हम ये न जान पाए कि बिग बैंग के पहले ईश्वर कहाँ था ?
अगर ऐसा ही है तो फिर आप हमें बताएं कि हम उसके नाम पर धरती में इतनी अराजकता का सामना क्यों करें ? उसके नाम पर धर्म का इतना बड़ा साम्राज्य खड़ा कर दिया और उसे ढूंढने जाओ तो वो लापता है कही नही है वाह बहुत खूब...

आप कहेंगे कि ईश्वर नही है तो भौतिकी के नियमों को किसने बनाया तो इसका जवाब है किसी ने भी नही नदी का पानी हमेशा ऊपर से नीचे की ओर ही बहेगा क्योंकि पानी को धरती की ग्रेविटी खींच रही है और गुरुत्वाकर्षण भौतिकी का एक नियम है इसे किसी ईश्वर ने नही बनाया सृष्टि में जहां भी तत्व होगा तो ग्रेविटी भी होगी तत्व नही तो ग्रेविटी भी नही.

अब सवाल है कि तत्व कहाँ से आये ?
इसके लिए देखिये मेरा ये वाला वीडियो

इसी तरह अगर कोई ईश्वर हुआ तो वो भी स्पेस मेटर और टाइम का अभिन्न हिस्सा ही होगा.

अगर ऐसा है तो वो यूनिवर्स से अलग कैसे हुआ ? इसका अर्थ ये है कि यूनिवर्स के साथ ही उसका भी जन्म हुआ होगा और इसके खत्म होते ही वो भी खत्म. मतलब की अगर किसी ईश्वर का वजूद है तो वो ब्रह्मांड का ही कोई तत्व हो सकता है इससे अलग उसका कोई अस्तित्व सम्भव ही नही.

यूनिवर्स का कोई भी तत्व स्वाभाविक रूप से जड़ रूप में ही है चेतन में नही क्योंकि चेतन जड़ से प्रारंभ होकर फिर जड़ में विलीन हो जाता है यही प्रकृति का सिद्धांत है तो आपका वो सुपरपावर ईश्वर सृष्टि के प्रारंभ में जड़ रूप में ही पैदा हुआ होगा जो आगे चलकर चेतन बना होगा क्योंकि आपको जिस परमात्मा की जरूरत है उसे चेतनावस्था में ही होना चाहिए तभी तो वो आपकी पुकार सुनेगा ? उसके जड़ होने से आपका क्या लाभ ? 

अब आप जिस परम चेतना शक्ति को खोज रहे हैं अगर वो प्रकृति के नियमों के अनुरूप है तो लॉजिक से देखें तो एलियन्स की अवधारणा की तरह उसका अस्तित्व भी सम्भव है लेकिन आपको ये भी मानना पड़ेगा की वो भी एलियंस की तरह ही भौतिकी के नियमों में बंधा होगा और इन नियमों से छेड़छाड़ करना उसके बस की बात नही होगी क्योंकि वो इस रूप में प्रकृति का हिस्सा तो हो सकता है लेकिन स्वयं प्रकृति से ऊपर नही हो सकता सृस्टि का अंग तो हो सकता है लेकिन सृष्टि का बाप नही हो सकता.

अब सवाल ये है कि अगर वो परमएलियन अथवा परमप्राणी या परमपिता भौतिकी के नियमों से मुक्त नही है तो फिर निश्चित है कि उसका भी विकास ही हुआ होगा.

प्रकृति के तीन ही सिद्धांत है जो सार्वभौमिक हैं उत्सर्जन विकास और विनाश.

सृजन विकास और विनाश का यह सिद्धांत जड़ और चेतन दोनों पर लागू होता है क्योंकि ईश्वर भी प्रकृति का हिस्सा है इसलिए सृजन विकास और विनाश का सार्वभौमिक सिद्धांत सभी तत्वों के साथ आपके ईश्वर पर भी लागू होना चाहिए क्योंकि सृस्टि में जड़ हो या चेतन उसका सृजन होता है वो विकास करता है और आखिरकार उसका अंत हो जाता है यही सृष्टि का नियम है.

आपका ईश्वर भी सृष्टि के इन तीनों सिद्धांतों से अलग नही हो सकता ब्रह्मण्ड का हिस्सा होने के कारण आपके ईश्वर का भी सृजन विकास और विनाश तय है.

अब जरा सोचिए पृथ्वी नामक छोटे से मामूली ग्रह पर रहने वाले मामूली से मनुष्य की पूजा प्राथना और नमाज से खुश होने वाला ये परमप्राणी या ईश्वर अगर खुद ही भौतिकी के नियमों में बंधा है तो इन नियमों के विरुद्ध जाकर कोई भी काम वह कैसे कर सकता है ?

इसका अर्थ ये हुआ कि पृथ्वी नामक ग्रह से उसे पुकारते रहना बिल्कुल व्यर्थ है क्योंकि वो सुनेगा ही नही हमारी प्रार्थना पूजा नमाज उस तक कभी नही पहुंचेगी सर पटकते रहिये घंटा बजाते रहिये भजन गाते रहिये और लॉडस्पीकर से चाहे कितना ही तेज अजान दीजिये नमाज पढ़िए कुछ नही होने वाला क्योंकि प्रकाश की गति से तेज कोई नही चल सकता अगर ईश्वर है तो वो भी हमारे यूनिवर्स का हिस्सा ही होगा और वो भी ब्रह्मांड के नियमों में ही बंधा होगा इसलिए वो प्रकाश की गति से तेज नही हो सकता.

इसका अर्थ ये है कि वो हमारे किसी काम का नही हो सकता क्योंकि न तो वो हमारी पुकार कभी सुन पायेगा और न ही कभी वो हमारी अरदास का जवाब ही दे पाएगा इसलिए उसके होने के बावजूद भी वो कभी भी हमारे लिए किसी काम का साबित नही हो सकता.

सच तो ये है कि ईश्वर जैसी किसी भी शक्ति का कोई अस्तित्व नही है ये सिर्फ इंसान का बनाया दिमागी फितूर है वैसे ही जैसे भूत और प्रेत.

ईश्वर के डर से लोग पाप नही करते ?

सच्चाई तो ये है कि सबसे ज्यादा गुनाह वही होते हैं जहां सबसे ज्यादा धार्मिक लोग रहते हैं दुनिया भर की जेलें इन आस्थावान लोगों से ही भरी पड़ी हैं इसके उलट नास्तिक देशों में अपराध न होने के कारण वहां की जेलों को बंद किया जा रहा है. ईश्वर का डर अपराध रोकने के लिए नही है बल्कि इसका असली मकसद आस्था में अंधे लोगों को ईश्वर/अल्लाह का डर दिखाकर उन्हें मानसिक गुलाम बनाये रखना होता है.
आप दुनिया मे अपराधों का ग्राफ उठा कर देख लीजिए पता चल जाएगा कि सबसे ज्यादा पाप ईश्वर को मानने वाले लोग ही करते हैं स्वीडन नार्वे डेनमार्क न्यूज़ीलैंड जैसे नास्तिक देशों में अपराध दर में इतनी गिरावट हुई है कि अगले कुछ वर्षों में शायद वहां पुलिस और जेल का वजूद भी बाकी न रहे.

दुबई समेत ज्यादातर खाड़ी देशों में भी अपराध दर बहुत कम है और ये सभी अल्लाह को मानते हैं ऐसा क्यों ?

इसके पीछे किसी ईश्वर का डर नही बल्कि कठोर कानून और सम्पन्न आर्थिक व्यवस्था के कारण वहां ऐसा संभव हुआ है वर्ना इन मुल्कों का पुराना इतिहास उठा कर देख लीजिए जब वहां तेल नही था तब इन सभी मुल्कों की स्थिति आज के सूडान और सीरिया से भी बुरी थी तब वहां केवल धर्म अल्लाह शोषण भुखमरी कुपोषण अपराध और आराजकता के सिवा कुछ नही था.



ईश्वर पर आधारित सामाजिक व्यवस्था तब तक ही मानवीय बनी रह सकती है जब तक ईश्वर केवल व्यक्तिगत विश्वाश तक सीमित रहता है जैसे ही ईश्वर धर्म का हिस्सा बन जाता है वह शोषण का हथियार बन जाता है या बना दिया जाता है इसलिए आज वक्त की यही मांग है कि हम ईश्वर नामक बीमारी से सदा के लिए मुक्त हो जाएं ईश्वर खत्म तो समझिए कि ईश्वर पर आधारित तमाम धार्मिक गिरोह भी समाप्त हो जाएंगे और इन धार्मिक गिरोहों के बनाये सभी पाखण्ड भी इनके साथ ही खत्म हो जाएंगे और जब धरती इन धूर्तों के बनाये शोषणवादी धर्मों के मकड़जाल से मुक्त हो जाएगी तब हमें कही और स्वर्ग खोजने की जरूरत ही नही पड़ेगी क्योंकि तब ये धरती ही स्वर्ग से सुंदर हो जाएगी.

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