देश की बरबादी का कारण है धर्म - तर्कशील भारत

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Saturday, December 1, 2018

देश की बरबादी का कारण है धर्म


पूरी दुनिया को एक साथ नही बदला जा सकता इसी तरह पूरी दुनिया को एक साथ धर्मविहीन भी नही किया जा सकता मैं आपकी इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ लेकिन धर्म का जो वीभत्स रूप हम भारत मे देख रहे है वैसा तो दुनिया मे कही नही है.

इस्लाम के आतंक से पूरी दुनिया ग्रसित है ये एक अंतरराष्ट्रीय समस्या भी है लेकिन आज बहुत तेजी से दुनिया मे इस्लाम के विरुद्ध आवाजे भी उठ रही हैं.

भारत मे ईश्वर केंद्रित धर्मों के विरुद्ध आवाज उठाने की लंबी परंपरा रही है जब जब धर्म जनसमूहों के शोषण का आधार बना है तब तब इसी समाज के लोगों ने ही उसके विरुद्ध आवाज भी बुलंद की है आपने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने धर्म को अशुद्ध किया लेकिन आपने ये नही बताया कि विदेशी आक्रमणकारियो ने शताब्दियों तक लगातार भारत पर हमले किये ही क्यों ? 

जब चन्द्रगुप्त का शाशन था तब क्यों नही हमले हुए सम्राट अशोक काल मे हमले क्यों नही हुए ? ये आक्रमण तभी क्यों शुरू हुए जब इन अनीश्वरवादी शाशको का पतन हुआ ? सम्राट कुषाण के काल मे कोई हमला नही हुआ सम्राट हर्षवर्धन के काल मे भी कोई हमला नही हुआ और आश्चर्य की बात है कि ये सभी शाशक अनीश्वरवादी थे और याद रहे कि इन्ही के दौर में भारत सोने की चिड़िया था.

इन शाशको से लड़ने वाले विदेशी नही थे वही लोग थे जिन्होंने वर्ण व्यवस्था बनाई पाखण्डों पर अधार्रित धर्म का निर्माण किया जिससे भारत जातियों में बंटा और फिर गुलामी की अंतहीन व्यथा की शुरूआत हुई.

आप स्वामी विवेकानंद की बात करते हैं शिकागो से आने के बाद उनके साथ क्या बर्ताव हुआ उनकी किताबो में पढ़ लीजियेगा और इस देश मे विद्वानों और युगपुरूषो कि एक लंबी परंपरा रही है कभी फुरसत मिले तो ज्योतिबा फुले राहुल संस्कृत्यान डॉ अम्बेडकर रामास्वामी पेरियार ललई यादव रामस्वरूप वर्मा को भी पढ़ लीजियेगा. इतना याद रखिये की कोई भी धर्म कभी भी इंसानियत का हितैषी नही रहा है इतिहास उठाकर देख लीजियेगा.

मुझे सत्य और पाखण्ड का अंतर मालूम है मुझे मत सिखाइये दिमाग से भ्रम निकाल दीजिये मैं यहाँ अपनी दुकान खोल कर नही बैठा हूँ ये मेरा फर्ज है कि मैं लोगों तक सही जानकारी पहुंचाऊं और मैं आपसे भी विनती करता हूँ कि आप भी भारत को अन्धविश्वशों के दलदल से निकालने में अपना सहयोग देने का कष्ट करें क्योंकि ये वो भयंकर नासूर है जो पूरे देश को धीरे धीरे निगल रहा है.

भगत सिंह ने बिल्कुल सही कहा था कि धर्म और ईश्वर को मैं मानवता के लिए सबसे निकृष्ट मानता हूं.

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