13 साल की संजली जिसे जिंदा जला दिया गया - तर्कशील भारत

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Saturday, December 22, 2018

13 साल की संजली जिसे जिंदा जला दिया गया

13 साल की संजली 
जिसे जिंदा जला दिया गया
आज उस मासूम बच्ची ने 
दम तोड़ दिया....

इस खबर ने मुझे झकझोर दिया है 
मैं हिल चुका हूँ 
जल चुका हूँ 
भुन चुका हूँ 
दिमाग काम नही कर रहा 
फिर भी 
सोचने पर मजबूर हूँ 
कि ये कैसे लोग हैं 
ये कैसा रोग है
ये कैसा दौर है 
जहां चारों ओर बस नफ़रतें हैं
चारों ओर बस चीख पुकार है
मातम है बेबसी है
दर्द है आंसू है 
और
चारों ओर बस आग ही आग है

जिस फूल सी बच्ची ने
अभी दुनिया को 
ठीक से समझा भी नही था
उसी क्रूर दुनिया ने 
उसे फूँक दिया
जला दिया
भस्म कर दिया 

अरे उसे थोड़ा तो और जी लेने देते
दुनिया को थोड़ा सा और 
समझ लेने देते 

क्या गुनाह था उसका
क्या उसने देश को लूटा था
क्या उसकी वजह से 
दुनिया खाक होने वाली थी
उसके वजूद से 
ऐसा कौन सा भय था
की उसके जलने से 
सब ठीक हो गया

उस समय कहाँ था वो परवरदिगार
कहाँ छुप गया था वो सर्वशक्तिमान 
न्यायकर्ता दयालु खुदा

उस मासूम की चीखें 
उसके कानों तक क्यों नही पहुंची
वो जलती रही लेकिन 
उस दयालु को दया क्यों नही आई
कुछ दरिंदे उसे फूंकते रहे
लेकिन वो सर्वशक्तिमान 
बस तमाशा देखता रहा

अरे तू झूठा है क्या खाक न्याय करेगा ?

कहाँ मर गए 
वो समाज के शुभचिंतक
देश के हितैषी
मानवता के रक्षक
राष्ट्रवाद की जय वाले
भारत माता चिल्लाने वाले
विकास के चौकीदार
अल्लाह के चाटुकार
भगवान के पहरेदार

मैं तुम सबसे पूछता हूँ
नफरतों की 
इस घिनौनी संस्कृति का
जिम्मेदार कौन है 
जिंदा जला देने की
ऐसी घिनौनी परंपरा का
कुसूरवार कौन है
क्रूरता भरी इस 
भयानक तस्वीर का
चित्रकार कौन है

तुम नही बताओगे कभी नही
क्योंकि इस पसमंज़र के 
असली गुनहगार
तुम सब हो 
और तुम्हारे इस गुनाह में
बराबर का भागीदार मैं भी हूँ.

 मुझे अफसोस है कि मैं उस समाज मे जिंदा हूँ जहाँ संवेदनाएँ मर चुकी हैं....

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