अयोध्या में क्या बनना चाहिए ? - तर्कशील भारत

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Friday, November 9, 2018

अयोध्या में क्या बनना चाहिए ?


 राम मंदिर बनाम बाबरी मस्जिद के मुद्दे को एक बार फिर से गरमाया जा रहा है देश की मीडिया इस मुद्दे को हमेशा दो भागों में बांटे रखती है मीडिया के नजरिये से देखें तो इस मुद्दे पर दो ही पक्ष हैं एक पक्ष वह है जिसे हर हाल में मंदिर चाहिए दूसरा पक्ष जिसे हर हाल में मस्जिद चाहिए.

1992 के बाद लगातार इस मुद्दे को मंदिर बनाम मस्जिद की लड़ाई के रूप में ही पेश किया गया है लेकिन इन दोनों प्रायोजित पक्षों से इतर एक बड़ा वर्ग वह भी है जो साम्प्रदायिक राजनीति से खुद को अलग रखते हुए विकास की बात करता है ऐसे लोगों में आम जनता का एक बहुत बड़ा हिस्सा है जो सामाजिक और आर्थिक पायदान पर सबसे नीचे खड़ा है उसे मंदिर मस्जिद से पहले रोजी रोटी की चिंता है वह अपनी आने वाली पीढ़ियों को धर्म की गन्दी राजनीति से दूर रखना चाहता है इसलिए वो वर्तमान राजनैतिक धर्मान्धता से हर हाल में बचना चाहता है.


देखा जाए तो ये पक्ष जो धर्म की संकीर्णता से इतर सामाजिक स्तर पर बदलाव की पैरवी करता है तीसरा और सबसे मजबूत पक्ष है और पूरे देश के परिपेक्ष्य में देखें तो यही तीसरा पक्ष बहुमत में भी है लेकिन सत्ता द्वारा प्रायोजित खबरों में इस पक्ष की मौजूदगी दिखाई नही देती.

राम मंदिर बनाम बाबरी मस्जिद के इस प्रायोजित कार्यक्रम में तीसरा पक्ष जो सबसे बड़ा है वो गायब है आखिर क्यों ?



क्यूंकि वर्तमान राजनैतिक माहौल के लिए वो फिलहाल अनुकूल नही है इसलिए उसे दरकिनार कर दिया गया है उसका कोई नेता नही है जो एकाध नेता दिखाई  देते भी है वे मजबूर हैं इसलिए कुछ कर नही सकते और कुछ नेता हालात को देखते हुए चापलूसी में लीन हो चुके है इसलिए  बहुमत वाला यह तीसरा पक्ष मूकनायक बन देश को बर्बादी की ओर जाते देखने को मजबूर है और फिलहाल इसके अलावा उसके पास कोई दूसरा विकल्प ही नही है.



26 साल एक लंबा वक्त होता है इस दौरान ये तीसरा वर्ग राम मंदिर बनाम बाबरी मस्जिद की साम्प्रदायिक सोच से अलग कोई बेहतर जनहितकारी बौद्धिक चेतना जागृत करने में विफल रहा है.

यूपी में मंदिर मस्जिद की कोई कमी नही है कमी है तो बुनियादी सुविधाओं की पिछले साल एक सरकारी अस्पताल में 150 मासूम बच्चे मारे गये लेकिन सरकारों को इससे कोई फर्क नही पड़ता क्योंकि उन्हें पता है कि राजनीति तो सिर्फ अल्पकालिक धर्म है इसलिए राजनीति की जगह वो धर्म को तवज्जों देते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि धर्म दीर्घकाल तक चलने वाली राजनीति है इसलिए धर्म ज्यादा जरूरी है लेकिन दीर्घकालिक धर्म की स्थापना के लिए अल्पकालिक राजनीति भी उतनी ही जरूरी है.



एक दूसरे का पर्याय बन चुका धर्म और राजनीति का यह घिनौना गठजोड़ दिन प्रतिदिन और ताक़तवर होता नजर आ रहा है और इस भयंकर गठजोड़ में इंसानी संवेदनाओं के लिए कोई जगह है ही नही.

बनारस के लोग कई दशकों से वहाँ एक बड़ा हॉस्पिटल बनाये जाने की मांग कर रहे हैं लेकिन आज तक ये मांग उनके लिए बस एक अधूरा सपना बन कर रह गया है उत्तर प्रदेश में जहां की आबादी 22 करोड़ तक पहुंच चुकी है और जहां लाखों मंदिर मस्जिद पहले से तैयार है ऐसे गरीब बीमार और पिछड़े हुए प्रदेश की पहली प्राथमिकता मंदिर मस्जिद नही बल्कि बेहतर बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए.

 22 करोड़ की भयंकर आबादी का बोझ ढोते इस प्रदेश की सबसे बड़ी जरूरत स्कूल कालेज यूनिवर्सिटी और फैक्टरियां हैं मंदिर मस्जिद नही.

राम मंदिर बनाम बाबरी मस्जिद के बनावटी शोरगुल में रोजगार की भयंकर कमी अशिक्षा बढ़ती आबादी और प्रशानिक भ्रस्टाचार ये सारे असली मुद्दे बड़ी चालाकी से छुपा दिए गए हैं और लोगों के हाथ मे धर्म का नकली झुनझुना थमा दिया गया है.

असल मे मीडिया ने अपने आकाओं के आदेश पर पक्ष और विपक्ष का जो माहौल खड़ा किया है उसमें तीसरे पक्ष के लिए कोई जगह नही है वो निर्णायक भूमिका में होने के बावजूद इस लड़ाई से बाहर है और इस थोथे विमर्श या संघर्ष से उसे तब तक बाहर ही रखा जाएगा जब तक वो इन दोनों पक्षों में से किसी एक को चुन नही लेगा यही पिछले 26 वर्षों से किया जा रहा है.

अगर ये तीसरा वर्ग अपना नेतृत्व ढूंढने में कामयाब हो जाता है और राम मंदिर बाबरी मस्जिद से अलग तीसरा बेहतर विकल्प ढूंढ लेता है तब 26 वर्षों से चल रहा ये राजनैतिक मामला भी ठंडे बस्ते में चला जायेगा और महाभारत की तैयारी में लगे कौरव और पांडव दोनों कुरुक्षेत्र को छोड़कर बनवास चले जायेंगे.

ये तीसरा विकल्प उस विवादित जगह पर एक एम्स जैसा बड़ा हॉस्पिटल बनाये जाने का भी हो सकता है जिसे आप राम का नाम दे सकते हैं इससे क्या फर्क पड़ता है इसे मुद्दा बनाकर लोगों के सामने पेश कीजिये.

अगर वास्तव में देश को बचाना है तो राममंदिर बनाम बाबरी मस्जिद के साम्प्रदायिक संघर्ष से अलग सोच रखने वाले लोगों को मुखर होकर सामने आना पड़ेगा और धर्म के नाम पर देश को बर्बाद करने की घृणित सोच को चुनौती देनी होगी वर्ना वो दिन दूर नही जब ये कौरव और पांडव मिलकर देश को एक वास्तविक महाभारत के युद्ध मे झौंक देंगे.


अगर आप मेरी बातों से सहमत हैं तो पोल में हिस्सा लेकर अयोध्या में  AIIMS बनवाने के लिए वोट करें.

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