पाकिस्तान में इस्लाम के नाम पर ये क्या हो रहा है ? - तर्कशील भारत

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Sunday, November 4, 2018

पाकिस्तान में इस्लाम के नाम पर ये क्या हो रहा है ?

पाकिस्तान में इस्लाम के नाम पर इंसानियत का सामूहिक बालात्कार हुआ है और इस हैवानियत का शिकार हुई है एक ईसाई औरत.

आसिया बीबी नाम की इस औरत का गुनाह बस इतना सा था कि अपनी पड़ोसी मुस्लिम महिला से एक मामूली बात पर उसकी कहासुनी हो गई थी इसी बीच उसने अपने नबी की तुलना मुसलमानों के पैगम्बर से कर दिया इस मामले में उस पर ईश निंदा का मुकदमा ठोका गया इसके बाद चार बच्चों की माँ आसिया को पैगम्बर की निंदा करने के आरोप में आठ साल कठोर कारावास की सजा भुगतनी पड़ी.
आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने उसे पिछले दिनों रिहा कर दिया लेकिन सर्वोच्च न्ययालय के इस फैसले से बवाल मच गया पूरा पाकिस्तान सड़कों पर आ गया हर तरफ़ विरोध की लहर दिखाई देने लगी कई जगहों पर हिंसा और आगजनी की गई पाकिस्तानी फोर्स को कई इलाकों में कर्फ्यू लगानी पड़ी पाकिस्तान में इसे एक बहुत बड़ा आंदोलन माना जा रहा है.

इस पूरे घटनाक्रम पर गौर करें तो दो बातें निकल कर सामने आती हैं पहली बात तो ये की पाकिस्तान चाहे कितना ही धर्मनिरपेक्षता की वकालत करता नजर आए वो आज भी एक घोर कट्टरपंथी देश ही है जहां अल्पसंख्यकों को दिन रात कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

दूसरी बात ये है कि इस पूरे मामले में इस्लाम की पोल भी खुल गई है इस्लाम एक ऐसा धर्म साबित हुआ है जिसकी चूलें एक औरत की टिप्पणी ने हिला दी हैं.

इससे ये भी साबित होता है कि धर्म या मजहब की बड़ी से बड़ी इमारतों की बुनियाद बहुत कमजोर होती हैं सभी धर्मों की नींव में शोषण झूठ पाखंड और हिंसा ही है इसके अलावा वहां कुछ नही.

कुरान अल्लाह और पैगम्बर के नाम पर एक औरत को फांसी पर लटकाने वाले लोग बताएं की आसिया ने जो कुछ भी कहा उसमे उसका क्या दोष था क्योंकि तुम्हारे अल्लाह द्वारा तुम्हारे पैगम्बर पर उतारी गई आसमानी किताब कुरान में अल्लाह कहता है कि "वो जिसे चाहे सीधे रास्ते पर लाता है और जिसे चाहे राह से भटका देता है" 

आसिया ने जो किया उसमे तो अल्लाह की गलती थी क्योंकि वो जिसे चाहता है राह से भटका देता है और आसिया पूरी तरह दीन से भटकी हुई औरत थी तब इसमे आसिया का ही दोष क्यों ?

क्या तुम्हे अल्लाह की आयत पर ही भरोसा नही है ? अगर भरोसा है तो फिर ये हुड़दंग किसलिए ? 

एक तरफ तुम कहते हो कि सबके गुनाहों की सजा कयामत के दिन खुदा देगा दूसरी ओर तुम एक अबला औरत को मौत की सजा दिलाने के लिए हिंसा कर रहे हो ये सब क्या नौटंकी है ?

एक तरफ तुम कहते हो कि खुदा की मर्जी के बगैर एक पत्ता भी नही हिलता तब आसिया ने जो किया खुदा की मर्जी से ही किया उसमे आसिया दोषी क्यों ?

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