ब्लॉगर ने लिखा, 'इंसान बनकर जीना चाहता हूं मुसलमान नहीं' मिली धमकी, जान बचाकर बांग्लादेश से भागकर आया भारत - तर्कशील भारत

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Sunday, November 4, 2018

ब्लॉगर ने लिखा, 'इंसान बनकर जीना चाहता हूं मुसलमान नहीं' मिली धमकी, जान बचाकर बांग्लादेश से भागकर आया भारत

मोहम्मद सज़ादुल होक (कोलकाता)

बांग्लादेश के सज्जादुल को ढाका स्थित कॉलेज से डेढ़ साल के लिए निष्कासित कर दिया गया। वह कोलकाता के पास टूरिस्ट वीजा पर रह रहे हैं। सज्जादुल का दोष सिर्फ इतना था कि उसने अपने ब्लॉग में धर्मनिरपेक्षता, नास्तिकता, लिंग समानता, सेक्स और मानवाधिकार के समर्थन में और बांग्लादेश के ब्लॉगरों के उत्पीड़न का विरोध करने वाले मुद्दे लिखे थे।

21 साल के मोहम्मद सज्जादुल हक को उन सभी लोगों ने त्याग दिया है जो कभी उनकी परवाह करते थे। हक का परिवार बांग्लादेश के चटगांव में रहता है, लेकिन उन लोगों ने भी सज्जादुल का समर्थन नहीं किया और उसे अपने ही ढाका स्थित कॉलेज से डेढ़ साल के लिए निष्कासित कर दिया गया। वह कोलकाता के पास टूरिस्ट वीजा पर रह रहे हैं। सज्जादुल का दोष सिर्फ इतना था कि उसने अपने ब्लॉग में धर्मनिरपेक्षता, नास्तिकता, लिंग समानता, सेक्स, मानवाधिकार और बांग्लादेश के ब्लॉगरों के उत्पीड़न का विरोध करने वाले मुद्दे लिखे थे। सज्जादुल ने बताया, 'मुझे अब मेरे परिवार की चिंता है। भारत में भी कट्टरपंथी जो बांग्लादेश का समर्थन करते हैं, वे मेरी हत्या कर सकते हैं। मैं व्यवस्थित राजनीतिक भ्रष्टाचार और अंधविश्वास पर भी लिखता हूं। मैंने बी ह्यूमन फर्स्ट (पहले इंसान बनो) अभियान भी शुरू किया, जिससे सामान्य नागरिकों को स्वतंत्रता मिल सके। अब मेरे पास कोई जगह नहीं है जहां मैं जा सकूं।'

'बचपन से ही धार्मिक पाठ पढ़ाया गया'

उन्होंने बताया कि वह बहुत ही रूढ़िवादी परिवार से हैं। उन्होंने बचपन से ही धार्मिक पाठ पढ़ाया गया। हालांकि जैसे-जैसे वह बड़े हुए, उन्होंने रीति-रिवाजों को लेकर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। वह कहते हैं, 'वे लोग जो मेरे बहुत अच्छे दोस्त थे, आज वह मेरे सबसे बड़े दुश्मन हो गए हैं। अब मेरे ऊपर कभी भी कट्टरपंथी हमला कर सकते हैं। भारत आने से पहले मैं यहां से वहां छिपता भाग रहा था। मुझे बांग्लादेश में एक नास्तिक के तौर पर प्रचारित कर दिया गया, जिसे इस्लाम के कानून के अनुसार मौत की सजा दी जाती है।'


सज्जादुल ने बताया कि 25 मई 2017 से उसने मौखिक रूप से वहां चल रही गड़बड़ियों का विरोध करना शुरू किया था, बाद में फेसबुक पर भी इसके बारे में लिखा। उन्होंने कहा, 'मैंनें फेसबुक पर लिखा कि मैं एक इंसान बनकर जीना चाहता हूं, मुसलमान नहीं। जो चीजें मुझे सिखाई गई थीं और विश्वास करने को कहा गया था वे गलत हैं।'

'मौसी को भी जलाने की धमकी दी'
उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया में वायरल हो गईं और उनका फेसबुक अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया। सज्जादुल ने बताया, 'मेरी पोस्ट वायरल होने के बाद से मुझे धमकियां मिलने लगीं। मैं जान बचाकर अपने गांव गया लेकिन जब लोगों को यह बात पता चली तो वहां भी मेरी जान को खतरा हो गया। अपने गांव से मैं अपनी मौसी के यहां पहुंचा, लेकिन उन्हें भी जलाने की धमकी दी गई। ऐसे में मुझे भारत में शरण लेनी पड़ी।'

-साभार 

नवभारत टाइम्स ब्लॉग 
https://navbharattimes.indiatimes.com/state/other-states/kolkata/life-threatened-in-bangladesh-bangladeshi-blogger-is-living-in-india/articleshow/66495506.cms

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