धार्मिक कहानियों में छुपे हैं अनोखे षड्यंत्र. - तर्कशील भारत

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Wednesday, October 10, 2018

धार्मिक कहानियों में छुपे हैं अनोखे षड्यंत्र.


दुनिया भर में सैंकड़ों धर्म हैं हर धर्म के पास ईश्वर की दी हुई किताब है और उन किताबों में हजारों कहानियां ठूंसी हुई है इनमे  से ज्यादातर कहानियां झूठ के धरातल पर बनाई गईं है जिनमे ईश्वर फरिश्ते और अवतारों की लीलाएं हैं तो कुछ कहानियां पुराने समय के राजघरानों से जुड़ी हैं.

धर्म की इन कहानियों का असली मकसद धार्मिक गिरोहों द्वारा लोगों का मानसिक परिवर्तन करना था जिससे आम जनता हमेशा इनकी मानसिक गुलाम बनी रहे और ये तमाम धार्मिक गिरोह राजसत्ता के साथ मिलकर जनता का आसानी से शोषण करते रहें.

पिछले वीडियो में मैंने रावण और शैतान के उस पहलू के बारे में बताया था जिसे ज्यादातर लोग नही जानते थे आज के वीडियो में मैं धार्मिक कहानियों के कुछ ऐसे राज खोलूंगा जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे.

इस कड़ी में सबसे पहले बात करते हैं कुरान की एक कहानी के बारे में...

खुदा ने आदम को बनाया उसके दो बेटे हुए उन दोनों के कई संतानें हुई इस तरह दुनिया मे इंसानों की जमात बढ़ती चली गई फिर इन जमातों में सैंकड़ों कबीले बने आगे चलकर कुछ कबीले खुदा के विरुद्ध काम करने लगे तो खुदा ने उन लोगों के बीच नबीयों को भेजा जो उन्ही में से एक था इस तरह खुदा ने हजरत आदम से लेकर हजरत मुहम्मद तक एक लाख चौरासी हजार नबियों को भेज दिया इंसानों को सुधारने के लिए भेजे गए इन नबियों में कमाल की खूबियां थी वे लोगों को खुदा का सही मार्ग बताते लेकिन उनमे से ज्यादातर नबियों की कोई सुनता ही नही उन्हें पीटा जाता खदेड़ा जाता और कई नबियों को तो जान से हाथ भी गंवानी पड़ी.

 ये है खुदा का करिश्मा जो अपने नबियों को ही सुरक्षा नही दे पाया वो आम आदमी की भला क्या मदद कर सकता है खैर सभी नबी ऐसे नही थे लोगों ने जिनकी हत्या कर दी कुछ नबी तो कमाल के थे जिन्होंने अपनी महानता सिद्ध करने के लिए लोगों की हत्यायें कीं.

कुरान में कुछ महान नबियों की ऐसी सैंकड़ों कहानियां मौजूद हैं जिन्होंने बहुत बड़े बड़े कारनामे किये हैं.

कुरान के सूरह 110 अलकहफ में ऐसे ही एक महान नबी की दिलचष्प कहानी है जिसे सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे.

एक बार मूसा को भ्रम हो गया कि सृष्टि का सारा ज्ञान खुदा ने उन्हें दे दिया है उनसे बड़ा ज्ञानी दुनिया मे दूसरा कोई नही है अपने इस वहम को पक्का करने के लिए उन्होंने खुदा से इस बात की चर्चा की तब उनके रब ने उन्हें एक व्यक्ति से मिलने को कहा जो किसी अनजान जगह पर रहता है साथ ही खुदा ने उन्हें बताया कि उस तक पहुंचने लिए वो अपने साथ एक मछली को ले जाएं वो मछली जहां गायब हो जाएगी वही वो व्यक्ति मिल जाएगा उस व्यक्ति से मिलने के बाद उनका सारा भ्रम भी दूर हो जाएगा.

मूसा ने वैसा ही किया एक मछली को लेकर वो कई दिनों तक पहाड़ों नदियों और घाटियों की भूलभुलैया में भटकते रहे उन्हें कोई नही मिला भूख से बेहाल मूसा ने सोचा कि क्यों न उस मछली को खा कर भूख मिटा लिया जाये ?

जब उन्होंने अपने झोले में मझली को ढूंढा तो वो गायब थी इसका मतलब था कि वो उस महान नबी तक पहुंच चुके थे सामने पहाड़ पर उन्हें वो चमत्कारी पुरुष भी मिल गया उससे उन्होंने कहा कि मुझे आपके पास खुदा ने भेजा है ताकि मैं आपके ज्ञान को जान सकूँ.

उस नबी का नाम था खिज्र 

खिज्र ने उनसे कहा कि ठीक है मैं तुम्हे कही ले चलूंगा लेकिन ध्यान रखना की मैं जो भी करूँ आप कोई सवाल नही करोगे ?

मूसा ने कहा ठीक है तब वो आगे बढ़े और चलते चलते एक विशाल नदी तक पहुंचे उसको पार करने के लिए वे एक नांव में बैठे जब नौका बीच नदी में पहुंची तो खिज्र ने उसमे छेद कर दिया ये देखकर मूसा को बड़ा गुस्सा आया उन्होंने कहा कि तुमने ये क्या किया जिस नाविक ने तुम्हे अपनी नांव का सहारा दिया तुमने उसी में छेद कर दिया ?

तब खिज्र ने मूसा को उसका वादा याद दिलाया कि वो जो कुछ भी करे उसे कोई सवाल नही करना इस घटना पर खिज्र ने बस इतना कहा कि मैंने नाविक पर एहसान किया है.

वे आगे बढ़े एक गांव के करीब पहुंचने पर उन्हें बहुत से बच्चे खेलते नजर आए खिज्र ने उन बच्चों में से एक को अपने पास बुलाया और उसे एकांत में ले जाकर मूसा के सामने उस बच्चे का कत्ल कर दिया.

इस वारदात को देखकर मूसा को फिर गुस्सा आया उन्होंने कहा कि तुमने इस बच्चे को क्यों मारा तब खिज्र ने फिर से मूसा को उसका वादा याद दिला दिया और कहा कि मैने इस बच्चे की हत्या कर इसके घरवालों पर एहसान किया है.

वे आगे बढ़े एक और गांव में पहुंचे उस गांव के लोग बिल्कुल मिलनसार नही थे वहां उन दोनों को किसी ने भी नही पूछा.

वे गांव में और आगे बढ़े ही थे कि उन्हें एक पुराने मकान की दीवार नजर आई जो गिरने वाली थी खिज्र ने मूसा को रुकने का हुक्म दिया और खुद उस दीवार की मरम्मत में लग गए.

मरम्मत का काम जब पूरा हुआ तब मूसा ने उनसे फिर सवाल किया कि जिस गांव में हमे किसी ने पानी तक नही पूछा वहां बेमतलब में तुम्हे किसी की दीवार ठीक करने की जरूरत क्या थी ?

तुम या तो पागल हो या तुममे बिल्कुल भी ज्ञान नही है शायद मैं जिस आदमी को ढूंढ रहा था वो कोई और होगा जिसे खुदा ने अपना महान ज्ञान दिया है वो तुम नही हो सकते ?

तब खिज्र ने उन्हें बारी बारी से तीनों घटनाओं के पीछे का कारण बताया.

उन्होंने बताया कि नांव में छेद करके मैंने उस नाविक को समुद्री लुटेरे से बचा लिया था जो अच्छी नावों को लूट लेता है नांव में छेद देखकर लुटेरा उस नांव को छूएगा भी नही मैं लुटेरे के बारे में पहले से जान गया था.

बच्चे की हत्या मैंने इसलिए कि क्योंकि मुझे इस बात का ज्ञान था कि वो बच्चा बड़ा होकर अपने माँ बाप को बहुत परेशान करेगा.

और दीवार को दुरस्त करने के पीछे कारण यह था कि मैं जान गया था इस दीवार के नीचे बड़ा खजाना छुपा है जो उस घर मे रहने वाले दो यतीम भाइयों के काम आ सकता है अगर दीवार गिर जाती तो वो खजाना उजागर हो जाता जिसे इस गांव के मक्कार लोग लूट लेते.

ये है खुदा के महान नबी और उनका महान ज्ञान.

कुरान में दर्ज इस कहानी की पड़ताल जरूरी है.

मूसा ज्ञान की खोज में खिज्र से मिले थे खिज्र को खुदा का दिया हुआ पूरा ज्ञान था वो सबकुछ जानते थे खुदा की तरह वह भी सर्वज्ञानी थे इसलिए उन्हें लुटेरों के बारे में पूरा ज्ञान पहले से था उन्होंने नांव में छेद कर एक गरीब नाविक की नांव को लुटने से बचा लिया.

लेकिन सवाल ये है कि मूसा ने उन्हें जांचने की कोशिश ही कब की वे कितने सच्चे हैं ? 

मूसा ने तीनों घटनाओं के बाद खिज्र के स्पष्टीकरण पर ही यकीन करके उन्हें ज्ञानी मान लिया.

सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि वे नाविक के साथ लुटेरों तक गये ही नही तो खिज्र सच्चे थे मूसा ने इसे कैसे मान लिया ?

चलो मूसा ने इस बकवास पर यकीन कर भी लिया तो क्या हमें भी उनकी तरह इस मनगढंत बात को मान लेना चाहिए ?

असल मे मूसा के पास सच मे ज्ञान नही था इसलिए वो किसी ज्ञानी पुरुष की तलाश में निकले लेकिन उन्हें कोई ज्ञानी पुरुष मिला ही नही खिज्र के रूप में वो जिस आदमी से मिले वो जरूर कोई सनकी रहा होगा उसने हजारों साल पहले मूसा को बेवकूफ बनाया और आज भी ऐसी कहानियों को सच मान कर करोड़ो बेवकूफ बन रहे हैं.

वो अच्छा हुआ कि मूसा उस सनकी आदमी की बातों पर यकीन कर उसकी बातों को जांचने नही गये.

अगर इन घटनाओं की सत्यता को जांचने के लिए मूसा खिज्र से कहते तो जाहिर है कि उनकी पोल खुल जाती लेकिन मूसा ने उनकी सारी बातों को जांचे बिना ही उन्हें सर्वश्रेष्ठ ज्ञानी होने का प्रमाणपत्र दे दिया.

एक बात मेरी समझ मे नही आती की पहली घटना में जब एक चलती हुई नांव में खिज्र मियां ने छेद किया था तब नाविक ने उन्हें जाने कैसे दिया होगा ?

कुरान में इस घटना का पूरा विवरण नही है इसलिए मैं शंशय में हूँ कि जब खिज्र ने नांव में छेद किया था तब नाविक ने उन्हें कैसे छोड़ दिया ?

अब बात करते हैं दूसरी घटना की जिसमे खिज्र मियां एक मासूम बच्चे की हत्या कर देते हैं और इस जघन्य हत्या के पीछे घटिया दलील देते है की वो बड़ा होकर अपने माँ बाप को दुखी करता इसलिए उसकी हत्या की.

ये बात किसी भी तरह हजम नही होती जरा सोचिए एक मासूम बच्चे के भविष्य के बारे में तुम्हे जानकारी थी की वो बड़ा होकर अपने माँ बाप को तंग करेगा लेकिन तुमने उसे बड़ा होने कब दिया ? इसका अर्थ ये हुआ कि आपकी जानकारी गलत थी ?
वो बच्चा तो कभी बड़ा होता ही नही क्योंकि उसकी हत्या तो बचपन मे ही हो जानी थी और हुई भी.

और उस हत्या का कारण ये था कि वो बड़ा होता तो बुरा आदमी बनता अरे भाई तुम महाज्ञानी थे तुमने उसका भविष्य देख लिया लेकिन भविष्य में उसके वजूद को तुमने देखा कैसे जब वर्तमान में तुमने उस बालक का कत्ल कर दिया ?

खिज्र को ये पता था कि वो बच्चा बड़ा होकर आतंकवादी बनेगा लेकिन उन्हें ये नही पता था कि उस बच्चे की हत्या हो जाएगी वो भी उन्ही के द्वारा.

अगर उन्हें ये पता होता तो वो ये झूठ नही बोलते की ये बच्चा बड़ा होकर अपने परिजनों को दुखी करेगा.

किसी बच्चे की हत्या इसलिए कर दी जाए कि वो बड़ा होकर अपराधी बनेगा ये पागलपन नही तो और क्या है ?

इस घटना में अगर मूसा खिज्र मियां के साथ उस बच्चे के घर जाते और उसकी हत्या के बारे में बताते तो उसके मां बाप इन दोनों की सारी नबिगिरी जरूर उतार दिए होते.

तीसरी घटना में खिज्र ने पागलपन में ही सही लेकिन अच्छा काम ही किया है दो अनाथ बच्चों की ढहती हुई दीवार को फिर से सही कर दिया ये अच्छी बात है उन्हें बड़े होने पर खजाना मिला कि नही ये तो पता नही लेकिन इसके लिए वे जिंदगी भर खिज्र के प्रति कृतज्ञ जरूर रहे होंगे. 

चलिए अब बात करते हैं भारतीय मिथकों में सबसे प्रसिद्ध कहानी रामायण की

वाल्मीकि द्वारा रचित इस काव्य रचना में एक बहुत ही महत्वपूर्ण अध्याय है जिसका नाम है

लक्ष्मण निष्कासन

इस अध्याय में लक्ष्मण के साथ एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना होती है जिसकी वजह से उन्हें राजशी सुख त्याग कर सरयू नदी में डूब कर जल समाधि को मजबूर होना पड़ता है.

आइये जानते हैं इस घटना के पीछे की असली वजह.

लक्ष्मण एक विद्रोही स्वाभाव के गुस्सैल व्यक्ति थे साथ ही वह सोचने समझने तर्क करने वाले एक बेहतर इंसान भी थे.

लक्षण का यही स्वाभाव कुछ लोगों की आँखों की किरकिरी बना हुआ था इसलिए लक्ष्मण को रास्ते से हटाना जरूरी था इसके लिए एक ऐसे षड्यंत्र की रचना की गई जिसे जान कर रौंगटे खड़े हो जाते है.

रामायण के अनुसार जब राम को राज करते बहुत वर्ष बीत गए तब एक दिन राम के पास एक काल नाम का ब्राह्मण आया और राम को एकांत में ले जाकर उसने कहा की "मुझे आपसे एक बहुत ही गोपनीय बात बतानी है" 

इसलिए आप यह सौगंध लीजिये की हमारी बातचीत के बीच में यदि कोई आ जाये तो आप उसकी हत्या कर देंगे" 

श्री राम ने ब्राह्मण की बात का यथार्थ समझे बिना ही वचन दे दिया की ठीक है जैसी आपकी इच्छा प्रभु.

और लक्ष्मण को बाहर से बुलवाया और उससे कहा की तुम द्वारपाल को हटाकर स्वयं खड़े हो जाओ और किसी को भी अंदर मत आने देना लक्ष्मण ने वैसा ही किया इसके बाद राम ने काल से पुछा की महाराज अब बताइये की बात क्या थी.

अभी इनकी बात शुरू ही हुई थी कि इसी बीच द्वार पर दुर्वासा ऋषि आ जाते है और तुरंत राम से मिलने की बात करते है लक्ष्मण द्वारा मना किये जाने पर वह पूरी अयोद्ध्या को बर्बाद करने की धमकी देते है.

अयोद्ध्या के विनाश की बात से घबराकर लक्ष्मण महल में आ जाते हैं और अंदर काल और राम की वार्तालाप में हस्तक्षेप का कारण बन जाते है राम ने काल को पहले ही वचन दिया हुआ था की कोई भी बीच में आएगा तो मैं उसकी हत्या कर दूंगा ऐसी विचित्र स्थिति में फंसे राम दुर्वासा को अंदर बुलाते है.

दुर्वासा कहते है राम मैं आपके यहाँ का स्वादिष्ट भोजन खाने आया था.

दुर्वासा और काल के जाने के बाद राम वशिष्ठ से सलाह लेते है की ऐसी विकट परिस्थिति में वे क्या करें ? एक तरफ़ काल नामक ब्राह्मण से किया हुआ वादा था तो दूसरी ओर उनके सगे भाई लक्ष्मण थे जिन्हें वे जान से ज्यादा प्यार करते थे.

ऐसे धर्म संकट में फंसे राम को वशिष्ठ ऋषि लक्ष्मण के निष्कासन का फ़ार्मूला बतलाते है षड्यंत्र के शिकार लक्ष्मण अंततः जल समाधि को मजबूर होते हैं.

अब इस पूरे घटनाक्रम पर गौर कीजिए
यहाँ सोचने वाली बात यह है की इतनी ही गोपनीय कोई बात थी तो कमरा अन्दर से भी बंद किया जा सकता था या इतनी गंभीर बात कही एकांत में हो सकती थी.

इतने बड़े महल में अनेकों एकांतकक्ष तो होंगे ही.

फिर द्वारपाल की जगह लक्ष्मण को ही क्यों खड़ा किया गया ?

दुर्वाशा कुछ समय अपने भूख पर काबू क्यों नहीं रख सकते थे ?

दुर्वासा के लिए अपना पेट भरना राम राज्य से ज्यादा प्रिय क्यों था ?

दुर्वासा को दरबार का स्वादिष्ट भोजन ही करना था तो ये बात वो लक्ष्मण से भी कह सकते थे.

काल ने हसक्षेप करने वाले को मारने का ही वचन क्यों लिया ?

अब जानते हैं कि काल की वो गुप्त बात क्या थी जिसकी वजह से उन्हें बीच मे आने वाले को मारने का वचन लिया ?

काल की गुप्त बात यह थी "राजन अब आपका स्वर्गआरोहण का समय आरम्भ होने वाला है अब आप राज पाट त्याग दो"

स्वर्गारोहण की इस बात के लिए इतना बवाल हुआ बाद में ये बात पूरी अयोध्या को पता भी चल गई तो इसकी गोपनीयता का क्या अर्थ रह गया ?

इस पूरे घटनाक्रम में लक्ष्मन कि क्या गलती थी ?

कहीं ऐसा तो नहीं इस पूरे षड्यंत्र में किसी का षड्यंत्र काम कर रहा हो ?? क्योंकि इस घटनाक्रम के बाद श्री राम को भी स्वर्गारोहण के नाम पर रास्ते से हटा दिया जाता है.

खैर सच्चाई चाहे जो भी हो इतना तो तय है कि हम श्रध्दा के चश्मे को उतार कर अगर धार्मिक कहानियों का पोस्टमार्टम करेंगे तो वहां सिर्फ और सिर्फ षड्यंत्र ही नजर आएगा.

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