बुद्धम शरणम गच्छामि - तर्कशील भारत

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Thursday, October 11, 2018

बुद्धम शरणम गच्छामि


बाबा साहेब अंबेडकर ने बुद्ध धम्म को अंगीकार किया इसलिए नही की उन्हें बुद्ध की जरूरत थी बल्कि इसलिए क्योंकि उन्हें अपने लोगों को एक वैकल्पिक धर्म देना था.

हमे और आपको किसी भी बुद्धिज्म की जरूरत नही है लेकिन ब्राह्मणवाद से ग्रसित जनता को उस बुद्धिज्म की सख्त जरूरत है जिसे बाबा साहेब अम्बेडकर ने अंगीकार किया था.

विज्ञान चाहे कितना ही उन्नत हो जाये दुनिया में धर्म की प्रासंगिकता बनी रहेगी. आप लोगों को कितना भी जागरूक कर दीजिए समृद्ध बना दीजिये लेकिन कभी भी 100%लोग नास्तिक/वैज्ञानिक नही बन पाएंगे 90%प्रतिशत लोगों को हमेशा एक झुनझुना चाहिए बजाने के लिए.

विज्ञान में उस झुनझुने का कोई विकल्प नही है इसलिए हमें देखना होगा कि आज के सभी झुंझुनो मे कौन सा ज्यादा वैज्ञानिक/तार्किक और मानवीय साबित हो सकता है.

बुद्ध का मार्ग ही मौजूदा सभी धर्मों में सबसे ज्यादा मानवीय है तार्किक है और वैज्ञानिक है इसलिए 90% लोगों के लिये ये झुनझुना ही सर्वोत्तम साबित होगा.

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