मानवता की परिभाषा - तर्कशील भारत

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Saturday, September 8, 2018

मानवता की परिभाषा


सबसे पहले आप विकासवाद के सिद्धांत को समझिये कभी भी किसी चीज की शुरुआत नही होती बल्कि विकास होता है.

मानवता विकसित हुई है एक खानाबदोश हिंसक पशुओ के झुंड से सभ्यता की ओर बढ़ते हुए इंसान को नैतिक मूल्यों की जरूरत हुई और उसने अलग अलग परिवेश और परिस्थियों के अनुरूप इन्हें गढ़ना शुरू किया इसलिए दुनियाभर में मानवता के नियम अलग अलग हैं.

कही मुर्दों को जला दिया जाता है कहीं उन्हें वीभत्स तरीके से काटकर कुत्तों को खिला दिया जाता है इनमे से आप किसे अमानवीय या मानवीय कहेंगे ?

मानवता की परिभाषा युग और परिवेश के आधार पर बदलती रही है और आज भी इसे बदलने की जरूरत है मानवता की परिभाषा को और ज्यादा उन्नत होने की जरूरत है.

आज के समय मानवता सबसे सरल व्याख्या ये होगी कि ज्ञान और जागरूकता को हर आखिरी मनुष्य तक पहुंचाया जाए ताकि वो भी संसाधनों की बंदरबांट में अपना हिस्सा प्राप्त कर सके.


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