भेड़ो का भीड़तंत्र नही ये भेड़ियातंत्र है. - तर्कशील भारत

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Wednesday, September 5, 2018

भेड़ो का भीड़तंत्र नही ये भेड़ियातंत्र है.

तेजी से बदलती दुनिया मे 
जंगल विलुप्त हो रहे हैं
जीवों की असंख्य प्रजातियां भी
अपना अस्तित्व खो चुकी हैं
इंसान कम हो रहे हैं
लेकिन
दुनिया की आबादी
लगातार बढ़ रही है

बाकी जीवों के वजूद को खतरा है
फिर भी
भेड़ और भेड़ियों की 
आबादी लगातार बढ़ रही है.

तेजी से बढ़ती इस भीड़ में
ज्यादातर भेड़ हैं
कुछ भेड़िये भी है
जो भेड़ो की इस भीड़ में
भेड़ो जैसे ही दिखते हैं.

भेड़िये इस भीड़तंत्र को
भेड़तंत्र कहते हैं
जो असल मे 
भेड़ियातंत्र है

कभी कभी
भेड़ो की ये भीड़ 
दूसरे भेड़ों को ही
कुचल डालती है
क्योंकि
उन्हें अपने और पराये का
इल्म नही
इनमें 
इतनी हिम्मत नही
की वे भेड़ियों का 
मुकाबला करें
उनमे इतनी समझ नही 
की वे अपने बीच छुपे 
भेड़ियों को पहचान लें
क्योंकि
भेड़ो की इस भीड़ को
हांकने का डंडा भी
भेड़ियों के पास ही है
उन्हें
कंट्रोल भी
भेड़िये ही करते हैं
और उन पर राज भी

भेड़िये इस भीड़तंत्र को
भेड़तंत्र कहते हैं
जो असल मे 
भेड़ियातंत्र है

भेड़ों को 
 जंगल के नियमो का ज्ञान
और चारा भेड़िये ही देते हैं
इसलिए 
भेडियो की बनाई
 इस व्यवस्था के विरुद्ध 
कोई भेड़ 
विद्रोह नही होता.

क्योंकि भेड़ो की ये भीड़ 
भेड़ियों के बनाये
 नियमों को 
अपना धर्म समझती है
इसलिये 
ज्यादा आज्ञाकारी भी है.

इन्हें कई बड़ों में 
बांटा गया है
रंगों के आधार पर 
बाड़े है
नस्लों के आधार पर 
बाड़े है
नियमों और जातियों के आधार पर भी 
बाड़े बनाये गए हैं
इन बाडों के अंदर भी 
कई बाड़े हैं
और इनके अंदर भी 
कई लकीरे खींच दी गई हैं

जंगल की सीमाएं निर्धारित हैं
इन संकुचित सीमाओं के बीच 
भेड़ आज़ाद हैं
और इस आज़ादी पर
भेड़ो को फख्र भी है
अपनी घेराबंदी की सीमाओं पर
उन्हें नाज भी है
क्योंकी वे राष्ट्रवादी हैं

दूसरे जंगलों के भेड़ो से
उनका कोई संपर्क नही
लेकिन भेडियो को आज़ादी है
दूसरे जंगल के भेडियो से
उनके बेहतर रिश्ते हैं.

भेड़िये इस भीड़तंत्र को
भेड़तंत्र कहते हैं
जो असल मे 
भेड़ियातंत्र है

इस भेड़ियातंत्र में
अभिव्यक्ति की आज़ादी है
लेकिन भेड़ 
इस आज़ादी से बाहर हैं
इस भेड़िया तंत्र में भेड़ो को
वोट का अधिकार भी है
लेकिन वे सत्ता से बाहर हैं
इस भीड़तंत्र में
शिक्षा की आजादी भी है
लेकिन
भेड़ों की भीड़ से 
शिक्षा ही गायब है.

भेड़िये इस भीड़तंत्र को
भेड़तंत्र कहते हैं
जो असल मे 
भेड़ियातंत्र है

इस भेड़ियातंत्र मे
भेड़ों के 
विकास की भारी जिम्मेदारी
भेड़ियों के कंधों पर है
भेड़ों के जंगल का 
सभी भेड़िये मिलकर
ईमानदारी से 
विकास करते हैं
विकास और प्रगति की इस प्रक्रिया में
थोड़ा सर्वनाश भी करते है
क्योंकि विकास के लिए
विनाश जरूरी होता है.

भेड़िये इस भीड़तंत्र को
भेड़तंत्र कहते हैं
जो असल मे 
भेड़ियातंत्र है.

-शकील प्रेम

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