आज के दौर में बुद्ध - तर्कशील भारत

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Friday, September 14, 2018

आज के दौर में बुद्ध


बुद्ध की वैज्ञानिक शिक्षाएं हमेशा और हर दौर में प्रासंगिक थीं और सदा रहेंगी क्योंकि उनमें जड़ता नही हैं वो नैसर्गिक हैं और मानवीय मूल्यों पर आधारित हैं हालांकि वक़्त और परिवेश के हिसाब से कुछ मानवीय मूल्य हमेशा बदलते रहते हैं.

मानव के हित के लिए मानव के सुख के लिए सोचो समझो और तर्क करो यही बुद्धिज्म है और सही मायने में यही मानवता भी है यही बात आपको संकीर्णता से मुक्त रखती है लेकिन वर्तमान के बौद्ध खुद ही कई अवधारणाओं में कैद हैं दुनियाभर में कई व्यापक कर्मकांड बुद्धिस्ट लोगों की परंपरा का हिस्सा है अपने देश के बौद्ध भी कई साम्प्रदायों में बंटे हुए हैं नार्थ ईस्ट के बौद्ध तो और भी ज्यादा पाखंडों में ग्रसित हैं मेघालय में किंत नामक बौद्ध भिक्षु मुर्दों से मुलाकात कराते हैं तो अरुणाचल के शिम्पू बौद्ध भिक्षु तंत्र मंत्र की क्रियाओं में पशुओं का खून पीते हैं ऐसे न जाने कितने पाखंड हैं जो बुद्ध धर्म के नाम पर पूरी दुनिया मे फैले हुए हैं कैलाश की परिक्रमा के दौरान चीन के बौद्ध भिक्षु आत्माओं से संपर्क साधते हैं अब बताइये की इनमे से कौन बुद्ध के करीब है ?

इसीलिए मैं बुद्ध को मानवता का सबसे बड़ा हितैषी मानते हुए भी खुद को बौद्ध होने की श्रेणी से बाहर रखना ही पसंद करता हूँ.

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