आरक्षण का विरोध होना ही चाहिए - तर्कशील भारत

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Saturday, September 15, 2018

आरक्षण का विरोध होना ही चाहिए


जो सामान्य वर्ग का आदमी आज सबसे गरीब है उसकी पिछली केवल 3 पीढ़ीयों का ही इतिहास उठा कर देखिये पता चल जाएगा कि उसकी आज की गरीबी परंपरागत नही है बल्कि पिछले कुछ दशकों की देन है लेकिन आरक्षित वर्ग के सबसे सक्षम अमीर आदमी की पिछली तीन पीढ़ियों का इतिहास देख लीजिएगा जातिगगत आरक्षण का महत्व पता चल जाएगा.

आप ईमानदारी से समानता पर आधारित आरक्षण मुक्त समाज बनाना ही चाहते है तो सभी प्रकार के आरक्षण का विरोध कीजिये.

20 करोड़ से ज्यादा लोग नालो और फुटपाथों पर जिंदगियां काटने को मजबूर हैं इतने ही लोग दड़बेनुमा जुग्गियों में ठुसे हुए है इसके अलावा गांवों में जाकर आरक्षित वर्ग की हालत देख लीजिए आजादी के इतने वर्षों बाद आज भी उन तक विकास नही पहुंच पाया ये कौन लोग हैं ?

जानते हैं...? नही क्योंकि आपको देश की सामाजिक व्यवस्था की तार्किक समझ ही नही है अगर समझ होती तो शायद आप ऐसी बेवकूफी वाली बात नही करते...
इतना समझ लीजिए कि आरक्षण गरीबी उन्मूलन का कार्यक्रम नही है वो प्रतिनिधित्व का मसला है गरीबी उन्मूलन के लिए हजारों योजनाएं आज़ादी के बाद से चल रही हैं जिनमे कोई आरक्षण नही है.

सभी प्रकार का आरक्षण खत्म होना चाहिए मैं आरक्षण का विरोधी हूँ लेकिन केवल संवैधानिक आरक्षण का विरोधी नही हूँ जातिवाद के नाम पर जो आरक्षण सदियों से चल रहा है उसके विरुद्ध आप कभी क्यों नही खड़े होते ?

देश मे सदियों से समाज के एक वर्ग को धार्मिक आरक्षण प्राप्त है जिससे इस वर्ग ने सामाजिक तौर पर श्रेष्ठता हासिल की और आर्थिक रूप से मजबूत हुआ संसाधनों पर कब्जा जमाया और राजनैतिक ताक़त प्राप्त की इस आरक्षण ने देश को बर्बाद किया और शताब्दियों से चल रहे इसी आरक्षण की वजह से समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग उपेक्षित और दीन हीन होकर हाशिये पर पहुंच गया जिसके लिए इस संवैधानिक आरक्षण की व्यवस्था करनी पड़ी जिससे आपको बहुत दिक्कत है.
नजरिया बदलिये देश बदलने लगेगा.

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