भारत मे विज्ञान की दुर्गति क्यों हुई ? - तर्कशील भारत

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Sunday, September 16, 2018

भारत मे विज्ञान की दुर्गति क्यों हुई ?

उन्नीसवी और बीसवी सदी के नविन खोज भी भारतीयो को नहीं बदल पाये जिनकी बदौलत आज पूरी दुनिया बदल चुकी है.

डार्विन के क्रांतिकारी सिद्धान्त भारत पहुंचे जरूर लेकिन वह भारतियों के मानसिकता में बैठे आदम और ब्रह्मा को बाहर नहीं निकाल पाये.

भारत में यही हश्र विज्ञान द्वारा खोजे गए सभी सिद्धांतो का हुआ.

आज मानव की उत्पत्ति कैसे हुई स्कूल की किताबों में सभी पढ़ते हैं भारतीय घरों में धार्मिक किताबों का महत्व घरों में सोने चांदी से ज्यादा है और ज्यादातर विज्ञान की किताबें रद्दी की दुकानों में पड़ी मिलती हैं.

बचपन से ही हमारी मानसिकता में यह बिठा दिया जाता है की ईश्वर ने हमे पैदा किया है यह मानसिक परिवर्तन का जाल कोई एक आदमी नहीं बुनता बल्कि पूरे समाज की व्यवस्था ही ऐसी बना दी गयी है की कोई विरला ही इस व्यूह रचना से बच सकता है.

यही है भारत की ब्राह्मणवादी व्यवस्था जिसको कितना भी बड़ा वैज्ञानिक चिंतन या चिंतक नहीं मिटा सकता.

देश में ब्राह्मणवाद और मुल्लावाद के होते वैज्ञानिक चिंतन का स्वच्छ वातावरण कभी तैयार नहीं किया जा सकता इसलिए इस सांस्कृतिक प्रदुषण को दूर करने के लिए सांस्कृतिक उपाय ही ढूंढने पड़ेंगे !


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