परिवर्तन चाहिए तो तर्क कीजिये - तर्कशील भारत

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Friday, September 14, 2018

परिवर्तन चाहिए तो तर्क कीजिये


तर्क से आपकी भावनाएं आहत होती हैं तो समझो आपमें बदलाव की प्रक्रिया कुलाचें भर रही है इन्हें रोकिए मत.
गलत भावनाओं का आस्तित्व त्रुटिपूर्ण मान्यताओं के कारण ही होता है.
यह व्यक्ति समाज और देश के लिए घातक हैं इन्हें नष्ट होना ही पड़ेगा इसलिए इन गलत भावनाओं त्रुटिपूर्ण मान्यताओं को ठेस पहुँचाकर नष्ट करना आवश्यक है.
जैसे दूध से मक्खन निकालने के लिए दूध को मथना पड़ता है अखरोट से बादाम निकालने के लिए उसे तोडना होता है वैसे ही सत्य को पाने के लिए श्रम करना पड़ता है सत्य किसी धर्म में नहीं धर्म की किसी किताब में नहीं सत्य आपके तर्क और तर्कशीलता के द्वारा उत्पन्न होता है आप जितना तर्क करेंगे सत्य भी आपको उतना ही मिलेगा. इसलिए बंधू सत्य चाहिए तो तर्क कीजिये.
तर्क आपको "क" से "ख" तक पहुंचा कर गति प्रदान करता है गति से आप प्रगतिवान बनते हैं प्रगति से सुख शांति समृद्धि आती है और क्या चाहिए ?
कल्पना की व्यर्थ उड़ानों में हजारों वर्षो तक उड़ते रहे गुलामी बदहाली उत्पीड़न दमन आंसू जुल्म अन्याय बेबसी भूख गरीबी कुपोषण के सिवा क्या मिला ?
इसलिए बंधु सत्य और परिवर्तन का रास्ता तर्क से ही शुरू होता है आप तार्किक बनिये तो सही सब कुछ बदनले लगेगा.

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