मनुस्मृति एक अभिशाप - तर्कशील भारत

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Friday, August 24, 2018

मनुस्मृति एक अभिशाप

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला: क्रिया:
अर्थात- जहां नारियों की पूजा होती है वहां देवता निवास करते हैं और जहां नारियों की पूजा नही होती वहाँ सभी अच्छे फल निष्फल हो जाते हैं.
मनुस्मृति अध्याय 3 श्लोक 56

अब इस श्लोक से ये मत समझ लेना कि धर्मग्रंथ स्त्रीविरोधी नही हैं इस श्लोक में नारी पूजा का अर्थ ब्राह्मणों की दक्षिणा से है मनुस्मृति का एक और श्लोक पढ़िए आपको पता चल जाएगा कि इन ग्रंथों में नारी के प्रति कितनी घृणा है.

भर्तारं लगयेध्या स्त्री ज्ञाति गुणदर्पिता |
ताँ शवाभि: खादयेद्राजा संस्थाने बहुसंसिथे ||
मनुस्मृति अध्याय 8 श्लोक 370
अर्थात- जो स्त्री अपने पिता के उच्च कुल ऊंची जाति और धनादि के अहंकारवश अपने पति को छोड़ देती है प्रशाशन द्वारा ऐसी स्त्री को सार्वजनिक स्थान पर भीड़ के सामने कुत्तों से नोचवा देना चाहिए.

खुल गई नारी सम्मान की पोल.
भारतीय स्त्री को मुक्ति का मार्ग भारतीय संविधान से मिला आज जो औरतें संविधान का विरोध कर रहीं हैं उन्हें एक बार संविधान और धर्मग्रंथों में अपनी औकात का अध्ययन जरूर करना चाहिए.

-शकील प्रेम

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