धरग्रंथों को बारूद से उड़ा दो - तर्कशील भारत

Header Ads Widget

Friday, August 24, 2018

धरग्रंथों को बारूद से उड़ा दो

मनुस्मृति एक पवित्र ग्रंथ है लेकिन उसमें मध्यकाल में मिलावट की गई -दीपक निषाद

जवाब-प्रोपगेंडे को समझिये जब तक नारी और शूद्र अनपढ़ थे जाहिल थे वे मनुस्मृति सहित दूसरे ग्रंथों को नही पढ़ सकते थे तब तक उनमे कोई मिलावट नही थी और संविधान में मिले अधिकारों द्वारा जब सदियों से उपेक्षित वंचित समाज पढ़ने लगा और इन साहित्यिक कबाड़ों के षडयंत्रो को समझने लगा तब उनमे मिलावट की बात की जाने लगी.
जरा सोचिए अगर मनुस्मृति में मिलावट होती तो इतने विद्वान पंडितों के होते आज़ादी से पहले से लेकर अभी तक उन अशुद्धियों को दूर क्यों नही किया गया ? या तो कोई मिलावट हुई ही नही या आपके पास कोई विद्वान पंडित ही नही था अगर मिलावट होती तो क्यों गीता प्रेस जैसे बड़े प्रकाशन से एक अशुद्ध ग्रंथ छापा जाता रहा ?

मनुस्मृति की बात छोड़िये रामायण महाभारत वेद पुराण जैसे धार्मिक कहे जाने वाले ग्रंथों में स्त्री और शूद्रों के प्रति कैसी मानसिकता की अभिव्यक्ति दर्शाई गई है एक बार खुद देख लीजियेगा.

कुरान बाइबिल या कोई भी धार्मिक ग्रंथ स्त्रियों के लिए किसी अभिशाप से कम नही हैं.

इसीलिए तो डॉ. अम्बेडकर ने कहा था "धर्मग्रंथों को बारूद से उड़ा देना चाहिए"

-शकील प्रेम

No comments:

Post a Comment

Pages