जादू टोना और सम्मोहन की वैज्ञानिकता क्या है ? - तर्कशील भारत

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Friday, June 22, 2018

जादू टोना और सम्मोहन की वैज्ञानिकता क्या है ?


क्या जादू टोना टोटका जैसी कोई चीज होती है ?

हम कहेंगे कि जादू टोटा टोटका तंत्र मंत्र दुआ ताबीज काला जादू ये सब सिर्फ और सिर्फ पाखंड है इसके सिवा कुछ भी नही तो सवाल उठता है अगर ये पाखंड है तो क्यों लोग आज भी इस पर यकीन करते हैं ?

हजारों वर्षों से लगभग पूरी दुनिया मे जादू टोने की चर्चा रही है और जादू टोने के एक से बढ़कर एक किस्से हमें सुनने को मिलते रहे हैं इसका कारण क्या है ?

ये बात बिल्कुल सही है कि जादू टोना दुनिया की सभी प्राचीन संस्कृतियों का हिस्सा रहा है लेकिन ये सिर्फ अज्ञानता से उपजी एक सामाजिक कुरीति से ज्यादा कुछ नही है इससे किसी का कोई भला या बुरा नही होता !

प्राचीन काल मे बहुत सारे अनुष्ठान प्रचलित थे उस समय के लोग किसी भी प्राकृतिक घटना को दैवीय प्रकोप समझते थे और कुदरत में होने वाली अलग अलग घटनाओं के लिए अलग अलग देवताओं को कारक मानते थे बारिश बिजली भूकंप तूफान या सूखा पड़ने पर इन अलग अलग देवताओं के लिए अलग अनुष्ठान किये जाने लगे !



आगे चलकर कुछ इन अनुष्ठानों के द्वारा समाज के धनी लोगों की समस्याएं दूर की जाने लगीं !

धीरे धीरे ये अनुष्ठान जादू टोने में बदल गए और लोगों की कुंठा लालच भय और घृणा का हथियार बन गए या बना दिये गये !

आज भी कई देशों यहाँ तक विकसित माने जाने वाले देशों में भी ये सब किसी न किसी रूप में होता है !

अब सवाल ये उठता है कि अगर जादू टोना सिर्फ अन्धविश्वाश है तो लोग आज भी इसको क्यों मानते हैं ?

इसका कारण है अन्धविश्वाश लालच भय घृणा होड़ और कुंठा !

आज की दुनिया मे इंसान खुद की बनाई व्यवस्था का शिकार है किसी को अपनी समस्याओं के समाधान का शॉर्टकट रास्ता चाहिए तो किसी को मनचाही मुराद करनी है कोई दूसरे की कामयाबी से जला हुआ बैठा है तो किसी को हर हाल में अपना टारगेट पूरा करना है !

इन सब के साथ दुआ ताबीज टोना टोटका किया कराया का बाजार भी तेजी से बड़ा होता जाता है !

मंदिर मस्जिद चर्च और गुरुद्वारा से जब उसकी मुश्किले आसान नही होती तब वह मुल्ला पंडित बाबा और पादरियों की गुलामी में जुट जाता है जब इनसे भी उसे शोषण के सिवा कुछ नही मिलता तब वह गीता कुरान और बाइबिल में अपनी परेशानियों का हल ढूंढता है और जब ये किताबें उसे और भटका देती हैं तब वह तीर्थ हज जमात पर निकल पड़ता है लेकिन यहां भी उसे कुछ नही मिलता तब वह आखिरकार जादू टोना और टोटके का उपाय आजमाता है !

इसमे खास बात ये है कि जिन समस्याओं के उपाय के लिए एक आम आदमी इतना धार्मिक प्रपंच करता है उन समस्याओं में ज्यादातर का तो आस्तित्व ही नही होता जैसे की एक आदमी को भ्रम है कि उसके ऊपर किसी ने कुछ करवा दिया है तो ये केवल उसका भ्रम है इसमें कुछ भी सच्चाई नही है किसी को भ्रम है कि वह कितना भी कमाता है बचता ही नही इसके लिए वो और अधिक मेहनत करने की बजाए जादू टोने का सहारा लेता है ऐसे ही किसी को अपने दुश्मन को बर्बाद करना है किसी को अपने प्यार को हासिल करना है और किसी को मुकदमे में जीत हासिल करनी है !

ये सब ऐसी समस्याएं हैं जिनके खुद ब खुद हल होने की पहले से संभावना होती हैं !

मान लीजिए एक तांत्रिक के पास 10 लोग अपनी अपनी इसी प्रकार की समस्याएं लेकर पहुंचते हैं किसी को एग्जाम में टॉप करना है किसी को विदेश जाना है किसी को सौतन से छुटकारा चाहिए किसी को बेटा चाहिए अब ये दसों लोग तांत्रिक से अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए जादू टोना करवाते हैं !

और मान लीजिए 10 लोगो मे से 6 लोगों का टोटका फेल हो जाता है उनका काम पूरा नही हो पाता तो ये 6 लोग उस तांत्रिक को झूठा समझ उसके पास दुबारा नही जाएंगे लेकिन जिन 4 लोगों का काम बन गया उनके लिए तो वो तांत्रिक बहुत बड़ा सिद्ध साबित होता है ये चार लोग 400 जगह उस तांत्रिक के जादू टोने के कारनामे की चर्चा करेंगे और इसका परिणाम ये होगा कि इस तांत्रिक के 400 नए ग्राहक तैयार हो जाएंगे !

यही है जादू टोने टोटके की सफलता का रहस्य और यही फॉर्म्युला मनोकामना पूरी करने वाले धर्म के सभी अड्डो पर भी लागू होती है इसी लिए धर्म के धंधेबाजों का ये धार्मिक धंधा कभी मंदा नही पड़ता !

 जादू टोने के कई नये अविष्कार मार्किट में हैं तो बहुत से पुराने उपाय आज तक सफलतापूर्वक चल रहे हैं !

पुराने उपायों में सबसे प्रसिद्ध है
सम्मोहन या हिप्नोटिज्म

क्या किसी इंसान को सम्मोहित किया जा सकता है क्या किसी इंसान के दिमाग को वश में किया जा सकता है ?
क्या सम्मोहन या वशीकरण का अस्तित्व है ?
अगर ये सच है तो इसका वैज्ञानिक कारण क्या है ये कैसे होता है और अगर ये केवल पाखंड है तो क्यों प्राचीन काल से अलग अलग सिविलाइज़ेशन में इसके होने के सबूत मिलते हैं !!

सम्मोहन के बारे लोगों के मन मे अलग अलग अवधारणाएं मौजूद है उनके अनुसार तंत्र मंत्र या काला जादू द्वारा किसी भी इंसान के दिमाग को कंट्रोल किया जा सकता है और उस hipnotized व्यक्ति से मनचाहा काम करवाया जा सकता है !

सम्मोहन वशीकरण या हिप्नोटाइज़ के बारे में जादू टोना तंत्र मंत्र वाली बात में कितनी सच्चाई है और इसका वैज्ञानिक पहलू क्या है ?

सम्मोहन या हिप्नोटाइज़ का पूरा सच जानने के सबसे पहले हमें अपने दिमाग को समझना पड़ेगा हमारा दिमाग दो हिस्सों में बंटा हुआ है एक चेतन मस्तिष्क या consius माइंड और दिमाग का दूसरा हिस्सा अवचेतन मस्तिष्क या sub कांशियस माइंड !

हमारा चेतन मष्तिष्क हमारे सभी  सेंस को तो कंट्रोल करता ही है साथ ही वो हमारे रोजमर्रा के सभी कामों को भी कण्ट्रोल करता है जैसे बातचीत संगीत सुनना गाना गाना चलना प्यार करना हंसना रोना एक्स्ट्रा एक्स्ट्रा !!

हमारा अवचेतन मन हमारे चेतन मष्तिक की क्रियाओं की मेमोमेरिज को स्टोरेज करता है साथ ही हमारा sub कॉन्शियस माइंड हमारे चेतन माइंड की apsense में हमारे शरीर को कंट्रोल करता है मतलब जिस समय हम सोये रहते है उस समय हमारा कॉन्शियस माइंड आराम करता है और sub कोसिस माइंड एक्टिव हो जाता है हम करवट लेते है गर्मी लगने पर नींद में ही चादर हटा देते है या सर्दी लगने पर ओढ़ लेते हैं ये सब क्रिया हम अवचेतन अवस्था मे ही करते हैं और जागने पर अवचेतन की वे सभी क्रियाएं हम भूल जाते हैं !!

ये तो थी दिमाग की चेतन और अवचेतन अवस्था की बातें लेकिन इससे सम्मोहन का क्या संबंध है ?

सम्मोहन या Hypnotism
के द्वारा मनुष्य को अवचेतन की अवस्था में लाया जा सकता है जी हां ये बिल्कुल सच है कि किसी इंसान के दिमाग को कोई दूसरा इंसान कंट्रोल कर सकता है !
सम्मोहन या Hypnotism
के द्वारा मनुष्य को अवचेतन की अवस्था में लाया जा सकता है लेकिन सम्मोहित अवस्था में मनुष्य की कुछ या सब इंद्रियाँ उसके वश में रहती हैं। वह बोल, चल और लिख सकता है; हिसाब लगा सकता है तथा जाग्रतावस्था में उसके लिए जो कुछ संभव है, वह सब कुछ कर सकता है, किंतु यह सब काम वह सम्मोहनकर्ता के सुझाव पर करता है। इसे ही सम्मोहन या ‘हिप्नोटिज्म’ कहते हैं।

भारत में सम्मोहन यानी हिप्नोटिज्म (Hypnotism) को एक चमत्कार के रूप में देखा जाता है। 

आजकल कई टीवी धारावाहिकों में सम्मोहन का जो रूप दिखाया जाता है वो पूरी तरह गलत और अवैज्ञानिक है !

जबकि विदेशों में इसे गंभीर विषय मानते हुए शोध हो रहे हैं। सम्मोहन या हिप्नोटिज्म पर साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट 18वीं शताब्दी से शुरू हुआ था। इसे साइंटिफिक बनाने का श्रेय ऑस्ट्रियावासी फ्रांस मेस्मर को जाता है। हिप्नोटिज्म शब्द का आविष्कार 19वीं शताब्दी के डॉ. जेम्स ब्रेड ने किया।

हालांकि हिप्नोटाइज़ के इस नए स्वरूप के साइंटिफिक होने से पढ़े लिखे लोगों के बीच ये प्रमाणिक रूप से मशहूर होने लगा इसके बावजूद इसके साथ जुड़े मिथक समाप्त नही हो पाए पिछड़े इलाकों में आज भी सम्मोहन को जादू टोना तंत्र मंत्र का हिस्सा ही माना जाता है !

अधिकतर लोग समझते हैं कि सम्मोहन वह अवस्था है जिसमें मनुष्य अवचेतन अवस्था में रहता है। न तो वह जागता रहता है न ही वह सोता रहता है। उसकी इंद्रिया उसके वश में होती है लेकिन उसका कंट्रोल किसी और के हाथ मे होता है वह सब कुछ करता है लेकिन सम्मोहन करने वाले के इशारों पर। वह अपने फैसला लेने की अवस्था में नहीं होता !

हां यह बात सही है !

सम्मोहित किये जाने वाले आदमी को अवचेतन की अवस्था मे पहुंचाने के लिए विसेसज्ञ मनोवैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं इसी काम के लिए तांत्रिक तंत्र मंत्र जादू टोना का इस्तेमाल करते हैं यहां जादू टोना तंत्र मंत्र की नौटंकी केवल उस व्यक्ति पर मनोवैज्ञानिक असर डालने के लिए होता है !

यहां गौर करने वाली बात ये है कि अगर मान लीजिए एक आदमी जो नास्तिक है किसी भी तंत्र मंत्र जादू टोने को नही मानता उस पर किसी भी तांत्रिक का कोई भी टोटका काम नही करेगा !


अब आप समझ गए होंगे कि सम्मोहन के मामले में जादू टोना का क्या रोल होता है ?

 असल मे हम सभी के भीतर एक सम्मोहन शक्ति होती है जिसे हम समझ नहीं पाते हैं सम्मोहित वही होता है जो होना चाहता है।

एक उदाहरण से समझिये अल्कोहल की अधिक मात्रा लेने वाले कुछ आदमी नशे के ओवरडोज के बाद अजीब अजीब हरकतें करते है लेकिन नशा उतरते ही उन्हें कुछ याद नही रहता क्योंकि नशे की हालत में उनके कॉन्शियस माइंड पर subconsius हावी हो जाता है हम कह सकते हैं इस अवस्था मे ये लोग सम्मोहित हो चुके होते हैं एल्कोहल के सम्मोहन में 

जैसे जब हमें गुस्सा आता है तो हम उस पर नियंत्रण नहीं कर पाते। लेकिन बाद में हमें अपने ही गुस्से पर गुस्सा आने लगता है। कारण यही है कि उस समय हमारा पूरा ध्यान गुस्से पर होता है न कि किसी और चीज़ पर। उस समय हम सम्मोहन में होते हैं अपने गुस्से के सम्मोहन में। 

यही है सम्मोहन का विज्ञान 

ऐसा नही है कि किसी आदमी को सम्मोहित नही किया जा सकता बिल्कुल किया जा सकता है 
लेकिन इसके पीछे कोई चमत्कार नही है ये पूरी तरह एक मनोवैज्ञानिक मामला है !

सम्मोहन व्यक्ति के मन की वह अवस्था है जिसमें उसका चेतन मन धीरे-धीरे निन्द्रा की अवस्था में चला जाता है और अवचेतन मन सम्मोहन की प्रक्रिया द्वारा निर्धारित होने लगता है। साधारण नींद और सम्मोहन की नींद में अंतर होता है साधारण नींद में हमारा चेतन मन अपने आप सो जाता है तथा अवचेतन मन जागृत हो जाता है। इस परिवर्तन के लिए किसी बाहरी शक्ति का उपयोग नहीं होता, जबकि सम्मोहन निन्द्रा में सम्मोहनकर्ता चेतन मन को सुलाकर अचेतन को आगे ले आता है यही सम्मोहन का मनोविज्ञान है !


सच्चाई तो ये है कि जादू टोना टोटका जिन्न भूत प्रेत आत्मा जोगन डायन गंडा ताबीज किया करवाया ये सब खेल मन का वहम मात्र है जो अशिक्षा के माहौल में खूब पनपता है !

ये सब खेल शातिर लोगों के दिमाग की उपज हैं जिसे वो बेहतरीन तरीके
से अंजाम देते हैं !

आर्थिक पूंजीवाद के पहिये में जुते हुए लोग धार्मिक पूंजीवाद के शिकार हो जाते हैं तब कोई मस्जिद की दौड़ शुरू करता है तो कोई मजारों पर हाजिरी लगाने लगता है मस्जिदों की जमाते बड़ी होने लगती है तो मंदिरों की लाइनें और बड़ी होने लगती हैं लोकतंत्र फेल हो कर भीड़तंत्र में बदल जाता है और फिर भीड़तंत्र भेड़तंत्र में बदल जाती है इंसान जंगल के नियमों को फॉलो करने लगता हैं शिकार और शिकारी का खेल शुरू हो जाता है मुल्लागिरी पडरिगिरी बाबागिरी सत्संग बाजी भजन कीर्तन ढोल नगाड़े डीजे हिंसा लूट पाखंड शोषण और अराजकता ये सब धर्म का हिस्सा हो जाते हैं !

ऐसे में इंसान जानवरों से भी दो पायदान नीचे गिर जाता है और सही और गलत के अंतर में कन्फ्यूज्ड कर दिया जाता है गुड़ और गोबर के अंतर को वो नही समझ पाता ईसी वजह से वह धार्मिक षड्यंत्रों के दलदल में धंसता चला जाता है !

-शकील प्रेम 

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