विकास परियोजनाओं का सच - तर्कशील भारत

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Friday, June 22, 2018

विकास परियोजनाओं का सच



कोई भी देश अपने शहरों की उन्नति से पहचाना जाता है दुनिया भर के विकसित देशों की पहचान उनके बड़े और उन्नत शहरों के कारण ही होती है इन ताक़तवर देशों के कुछ शहर सैंकड़ो साल पुराने हैं तो कुछ शहर विकास की शुरुआती अवस्थाओं में हैं !!

दुनिया के सबसे उन्नत शहरों की बात करें तो न्यूयॉर्क दुबई सिटी हॉन्गकॉन्ग सिडनी और लंदन जैसे बड़े शहर उन्नति और आधुनिकता के शिखर पर खड़े हैं इन्हीं विकसित शहरों की तर्ज पर भारत में भी शहरों के निर्माण की बड़ी बड़ी परियोजनाएं शुरू की गई हैं जो बदलते वक्त के लिए बेहद जरूरी भी हैं !


भारत के पुराने शहरों में दिल्ली पटना मुम्बई कोलकाता और सूरत जैसे शहरों की हालत देखें तो यहां ऊंची ऊंची इमारते अमीरों के बड़े बड़े शॉपिंग मॉल मेट्रो और बड़े बड़े हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के साथ साथ गरीबों की बदहाल बस्तियां भी बढ़ती हुई दिखाई देती हैं मुम्बई में ही एशिया की सबसे बड़ी झुग्गियां हैं तो देश की राजधानी दिल्ली के आसपास ही सैंकड़ों झुग्गियां बसी पड़ी हैं !

इन झुग्गियों के पुनर्वास के नाम पर पिछले सत्तर वर्षों में अनेकों योजनाएं तैयार की गईं जो भ्रस्टाचार और सरकारी उदासीनता की भेंट चढ़ गईं इसका कारण है गरीबी और गरीबों के प्रति अमीरों की संवेदनहीनता !

जहां लाखों करोड़ों लोग धारावी की झुग्गियों में जिंदगी काट रहे हैं वही मुकेश अम्बानी का छोटा सा परिवार 60 अरब के घर मे रहता है !

देश की जीडीपी के 25 प्रतिशत हिस्से पर केवल 100 परिवारों का कब्जा है और देश के मात्र एक प्रतिशत लोग भारत के 73 प्रतिशत संसाधनों पर कब्जा जमाए बैठे हैं वही देश की 33 प्रतिशत आबादी झुग्गियों में और 30 प्रतिशत आबादी नालों और फुटपाथों पर जिंदगी काटने को मजबूर है 

जब तक अमीरी और गरीबी की इस भयानक खाई को भरने का प्रयास नही किया जाएगा तब तक ये बड़े मेगा प्रोजेक्ट्स सिर्फ और सिर्फ अमीरों को और अमीर बनाने की सरकारी योजनाये ही साबित होंगी !!

-शकील प्रेम 

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