संयोग और संघर्ष का नाम ही किस्मत है ! - तर्कशील भारत

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Friday, May 4, 2018

संयोग और संघर्ष का नाम ही किस्मत है !


ब्रह्मण्ड में जो कुछ भी हम देखते हैं वो सब किसी दूसरी बड़ी घटना के बाद का परिणाम ही तो है ये चाँद सितारे ग्रह आकाशगंगाये धरती और हमारा जीवन सब का अपना एक इतिहास है और सृस्टि के सभी तत्वों का वर्तमान उसके इतिहास में हुई किसी खास घटना का ही परिणाम मात्र है !

इतिहास में हुई बहुत छोटी और मामूली घटनाओं के संयोगवश  घटने की क्रिया से उत्पन्न हुई प्रतिक्रिया के परिणाम स्वरूप ही ये प्रकृति ये धरती और इस धरती पर मौजूद समुद्र पेड़ पौधे विभिन्न प्रकार के जीव जंतु नदी पहाड़ और मनुष्य का अस्तित्व सम्भव हुआ है !

एक बूंद वीर्य में 10 अरब शुक्राणु होते है जो स्खलन से अपनी यात्रा की शुरुआत करते है लेकिन उनमें से कोई एक ही मादा के डिम्ब तक पहुंचने में सफल होता है बाकी सब मारे जाते हैं जो शुक्राणु सफल हुआ वो कई छोटे छोटे संयोगों के कारण वहां तक पहुंचा और सब कुछ ठीक रहा तो 9 महीने के बाद वो एक शिशु के रूप में जन्म लेता है !

शिशु से एक वयस्क मनुष्य बनने में भी कई छोटी छोटी घटनाये अहम भूमिका अदा करती हैं जैसे अगर वो शिशु बड़ा होकर इंजीनयर डॉक्टर या वकील बनता है तो इसमें उसके जीवन की शुरुआत से घटित हुई कई छोटी बड़ी घटनाओं का अहम रोल होता है यही छोटे बड़े संयोग मिलकर किसी को सफलता के ऊंचे मकाम तक पहुंचाते हैं और किसी को अपराध की अंधेरी दुनिया मे भटकाकर जेल की कोठरियों तक पहुंचाते हैं !

हम सबका जीवन परिवार समाज और परिस्थितियों के संयोग और मिश्रण से तैयार होता है इसी से तय होता है की हम क्या है कैसे है और कौन हैं इसी को किस्मत भाग्य या डेस्टिनी कहते है !

ऐसे कई छोटे छोटे संयोगों से ही ब्रह्मण्ड के सभी तत्व वजूद में आये हैं !

हाइड्रोजन के जिन विशाल बादलों से हमारा सूरज बना है वो बादल 6 अरब साल पहले हमारी गैलेक्सी मिल्की वे से 500 करोड़ प्रकाशवर्ष की दूरी पर स्थित दो विशाल सूर्यों के आपस मे टकराने के बाद बिखरे हुए हाइड्रोजन के मलबों से बना है जो सोलर विंड के थपेड़ों में हमारी गैलेक्सी में शामिल हुआ और 5 अरब साल पहले इसी विशाल हाइड्रोजन के मलबों से हमारा सूरज बना !

सूरज के बनने के बाद बचे हुए मलबों ने सैंकड़ों ग्रहों का आकार लेना शुरू किया और फिर इन सैंकड़ों ग्रहों में से ज्यादर  आपस मे टकरा गये !

एक अरब वर्षों तक चली ग्रहों के बनने और नष्ट होने की इस प्रक्रिया में आख़िरकार आठ गृह शेष बचे !
चार बड़े और चार छोटे ग्रह 

जुपिटर सैटर्न नेप्च्यून और युरेनस ये चारों ग्रह बड़े आकार के हैं और इनका कोई ठोस धरातल नही क्योंकि ये चारों ग्रह गैस से बने हैं !

ये बड़े ग्रह कूपर बेल्ट से आने वाले भूले भटके पत्थरों और धूमकेतुओं को अपनी ग्रेविटी में खींच लेते हैं जिससे पृथ्वी सुरक्षित रहती है !

बुद्ध शुक्र पृथ्वी और मंगल ये चारों ग्रह छोटे आकार के हैं और इन चारों का ठोस धरातल है !

चार अरब वर्षों में कई छोटी बड़ी घटनाओं के परिणामस्वरूप ही ग्रहों की यह स्थिति बनी है !

इनमे से भी केवल पृथ्वी पर ही जीवन के अनुकूल वातावरण विकसित हुआ क्योंकि संयोग से पृथ्वी सूरज से इतनी दूरी पर चक्कर लगाती है कि सूरज की गर्मी धरती पर जीवन के लिए वरदान साबित होती है !

 कई छोटे बड़े संयोग ने मिलकर धरती पर जीवन की शुरुआती रूपरेखा तैयार की इन्ही शुरुआती जीवन से विकसित होकर विशाल जीव आस्तित्व में आये !

साढ़े तीन अरब साल पहले शुरू हुई जीवन की कहानी में 80 करोड़ वर्षों तक राज करने वाले विशाल डायनासोर्स का पतन भी एक मामूली संयोग से हुआ !

साढ़े छह करोड़ साल पहले धरती से 9 मील लंबा एक धूमकेतु जो धरती से जा टकराया !

आज के मेक्सिको के पास इस टक्कर के निशान आज भी देखे जा सकते हैं !

इस भयंकर टक्कर से एक फुट से ऊपर के सभी जीव मारे गए और साढ़े छह करोड़ साल पहले हुए इसी मामूली संयोग से आज के सभी जीव आस्तित्व में आये यदि वो घटना नही हुई होती तो आज धरती पर जीवन की तस्वीर कुछ और ही होती !

इस तबाही के बाद बचे एक फुट से कम हाइट के जीवों से ही आज के तमाम जीव विकसित हुए हैं !

साढ़े छह करोड़ साल पहले धरती से टकराने वाले उस धूमकेतु की टाइमिंग में केवल 30 सेकंड का अंतर होता तो उसकी तबाही इतनी भयानक नही हुई होती 40 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की भयंकर रफ्तार से ये पिंड उस धरती से टकराया था जो 30 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से घूम रही थी मात्र 30 सेकंड का अंतर होने पर वो धुमकेतू जमीन से टकराने की बजाय समुद्र में गिरता समुद्र से टकराने पर विशाल सुनामी उत्पन्न होती और इस सुनामी से मात्र दस प्रतिशत बड़े जीवों का ही सफाया हो पाता !

धूमकेतु के जमीन से टकराने का परिणाम ये हुआ कि इस तबाही के बाद उठे धूल और गर्द ने वातावरण को घेर कर सूरज को कई सालों तक पूरी तरह ढक लिया जिससे बड़े जीवों का दम घुट गया और वे सारे के सारे मारे गये !

 ऐसे ही न जाने कितने संयोग और उनके परिणामों से मिलकर ये पृथ्वी और इसके तमाम तत्व बने हैं और ऐसे ही अनगिनत संयोगों से दुनिया के तमाम द्वीप और महाद्वीप आस्तित्व में आये !

 हमारा देश और इस देश की वर्तमान समस्याएं भी इतिहास की छोटी बड़ी घटनाओं के कारण तैयार हुई हैं !

इतिहास में घटने वाली छोटी बड़ी अलग अलग प्राकृतिक घटनाओं ने वर्तमान दुनिया की भौगोलिक रूपरेखा तैयार की !

प्रकृति के इस भौगोलिक परिदृश्य को इंसान ने देश की सीमओं संस्कृति धर्म मान्यताओ परंपरायओ और सभ्यताओ से सजाया ! 

अलग अलग सभ्यताओं के विकास में भी कई छोटी बड़ी घटनाओं और संयोगों की अहम भूमिका रही ! 

इतिहास की कई छोटी छोटी घटनाओं ने दुनिया को बदला अगर 45 हजार साल पहले हिमयुग न आया होता तो आज दुनिया कुछ और होती अगर अमेरिका में 1775 का विद्रोह विफल हो जाता तो शायद आज अमेरिका वैसा नही होता जैसा हम उसे देखते हैं 
अगर नेपोलियन 1812 में रूस पर विजय हासिल कर लेता तो रूस और फ्रांस का वर्तमान कुछ और होता !





प्रथम और दूसरे विषयुद्ध की सुरुआत का कारण भी कुछ मामूली घटनाये ही थी जिनकी वजह से ये भयंकर युद्ध हुए वे मामूली घटनाये न हुई होती तो ये विश्वयुद्ध भी नही हुए होते और आज दुनिया का वर्तमान कुछ और ही होता !

1193 में हुई तराइन की दूसरी लड़ाई में पृथ्वी राज चौहान जीत गया होता 1526 के पानीपत की लड़ाई में बाबर हार गया होता या 1556 कि पानीपत की दूसरी लड़ाई में हेमू की आंख में तीर नही लगता या 1757 के प्लासी युद्ध मे मीर जाफर गद्दारी न करता या 1857 कि क्रांति सफल हो गई होती तो आज शायद भारत का वर्तमान कुछ और ही होता !
 
आज जो देश तरक्की की दौड़ में सबसे आगे नजर आते हैं उन देशों की कामयाबी का रहस्य लोगों के संघर्षों के लंबे इतिहास में छुपा हुआ है !

और जो देश तरक्की की दौड़ में पिछड़ गए हैं उसकी वजह भी उस देश के लोगों के इतिहास में ही छुपा हुआ है !

जिस देश की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि असमानता अज्ञानता पाखंड लूट और शोषण पर खड़ी हो और उस देश के लोगों ने इतिहास में इस शोषणवादी व्यवस्था को मिटाने का संघर्ष ही न किया हो और इसी वजह से इतिहास का वो शोषणवादी भूत आज भी उस देश की सामाजिक व्यवस्था पर हावी हो उस देश का वर्तमान कुरूप ही होगा ये तय है भयंकर गरीबी और बदहाली का दंश झेल रहे भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश इस बात का उदाहरण हैं 

संयोग अच्छा या बुरा नही होता संयोग बस संयोग होता है लेकिन अनेकों संयोगों से बना मनुष्य इन संयोगों के परिणाम को बदल भी सकता है !

इतिहास में जो घटनाये हुई या हमारे पूर्वजों ने जो गलतियां की उन्ही के परिणामों पर हमारा आज का वर्तमान खड़ा है !

और आज हम जो कुछ भी करेंगे उसी की बुनियाद पर भविष्य की इमारत खड़ी होगी !

हमारा भविष्य कैसा होगा अच्छा होगा या बुरा ये हमारे वर्तमान के संघर्षों पर निर्भर होगा !

अगर आज हम समाज मे व्याप्त विसंगतियों को दूर नही करते गरीबी बदहाली और शोषणवादी धार्मिक व्यवस्था को समाप्त नही करते तो निश्चय ही देश का भविष्य अराजकता और बदहाली के उस भयंकरतम स्थिति में पहुंच जाएगा जहाँ बदलाव और सुधार की गुंजाइश भी बाकी नही रहेगी और भविष्य का वो समाज समाज नही बल्कि खूंखार और आदमखोर जानवरों का झुंड बन जायेगा !

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