विकास के नाम पर चल रहा पूंजीवादी षड्यंत्र. - तर्कशील भारत

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Monday, May 28, 2018

विकास के नाम पर चल रहा पूंजीवादी षड्यंत्र.


दुनिया के तमाम देश बहुत तेजी से आगे बढ़ते जा रहे हैं इन देशों में नए और आधुनिक शहरों का निर्माण हो रहा है साथ ही इन आधुनिक शहरों को एक दूसरे से जोड़ने के लिए हाइवेज सुरंगे और बड़े बड़े पुलों का निर्माण हो रहा है !

बढ़ती जनसंख्या की जरूरतों के हिसाब से दुनिया के सभी देशों को बड़ी बड़ी विकास परियोजनाओं की जरूरत भी है और इसी वजह से दुनिया भर में शहरों के विस्तार की बड़ी बड़ी योजनाएं चलाई जा रही हैं जिसकी वजह से जल्द ही दुनिया का वर्तमान स्वरूप पूरी तरह बदल जायेगा !

वैसे तो इन सभी परियोजनाओं का उद्देश्य जनता को सुखी करना ही है और विकसित देश अपने मेगा प्रोजेक्ट्स से अपनी जनता को सुखी करते भी जा रहे हैं लेकिन जैसे जैसे विकाशशील देशों के शहर इन बड़ी परियोजनाओं की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए विकास की ऊंचाइयों को छूते जा रहे है वैसे वैसे इन विकाशशील देशों की एक बड़ी आबादी विकास की इस ऊंचाई से बहुत दूर भी होती जा रही है !
इसका सबसे बड़ा कारण है इन देशों में फैला भयंकर भ्रस्टाचार !

भारत की आज़ादी के बाद का इतिहास देखे तो भ्रस्टाचार की ये बीमारी बड़ी बड़ी परियोजनाओं को बर्बाद कर चुकी है अभी हाल ही में बनारस में बन रहा एक पुल गिर गया जिसमें 20 लोग मारे गए !

राजस्थान में पिछले महीने ही मलसीसर बांध टूट गया जिसका उद्घाटन 3 महीने पहले ही हुआ था !

वर्तमान की परियोजनाओं का हाल तो यह है कि इनसे बेहतर और अच्छी स्थिति में आज़ादी के पहले बने निर्माण हैं जो अभी तक मजबूती से खड़े हैं !

भारत मे भ्रस्टाचार के ऐसे हजारो उदाहरण हैं जिनका कोई समाधान नही है एक तरफ इन बड़ी परियोजनाओं के नाम पर देश के गरीबो का खरबो रुपया खर्च किया जाता है वही दूसरी ओर देश की एक बड़ी आबादी के पास बुनियादी सुविधाएं तक नही हैं !

जब तक इस भारी सामाजिक असंतुलन को दूर नही किया जाता तब तक इन बड़ी बड़ी सरकारी परियोजनाओं का कोई औचित्य ही नही है !

अगर विकास के नाम पर चलाई जा रही परियोजनाएं समाज के आखिरी आदमी तक नही पहुंच पाती तो ऐसा विकास और ऐसी परियोजनाएं सिर्फ और सिर्फ अमीरों को और अमीर बनाने की योजना ही हैं ! 

ये गरीबों के हक़ में नही है तो समझो ये सभी बड़ी बड़ी सरकारी परियोजनाएं देश के गरीबों के खिलाफ सरकारी नेत्रित्व में चल रहा पूंजीवादी षड्यंत्र ही है !


-शकील प्रेम

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