बिहार में हुए दंगों से फायदा किसका ? - तर्कशील भारत

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Friday, April 20, 2018

बिहार में हुए दंगों से फायदा किसका ?


आज देश मे जो हालात दिखाई दे रहे हैं उनसे अगर आपको डर नही लगता तो समझिये आप भी इंसान के रूप में एक जानवर ही हैं !

अभी हाल में बिहार में जो कुछ भी हुआ उस पर मैं आपसे बात करना चाहता हूं !

देश के दूसरे राज्यों में दंगे होना अब तो बहुत ही आम बात हो चुकी है लेकिन बिहार फिर भी बचा हुआ था हालांकि माहौल खराब करने की कोशिशें बहुत बार हुई लेकिन बिहार में साम्प्रदायिकता की घिनौनी राजनीति कभी कामयाब नही हो पाई थी लेकिन इस बार ऐसा नही हुआ बिहार में इंसानियत का सत्यानाश सफल हुआ और कई जिले दंगो की आग में जलने लगे !

एक बिहारी होने के नाते मुझे बिहार पर गर्व था मुझे भरोसा था कि बिहार में दंगों की भयंकर राजनीति कभी कामयाब नही होगी लेकिन आज मेरा भ्रम टूट चुका है हालांकि मुझे आज भी बिहारी होने पर गर्व है लेकिन शर्मिंदा हूँ कि मैं एक ऐसे दौर में जी रहा हूँ जहां दुनिया धर्म से ऊपर उठकर विज्ञान के सहारे काफी तेज कदमों के साथ आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही है लेकिन मेरा देश आज भी सदियों पुरानी धार्मिक बेड़ियों में जकड़ा तड़प रहा है और जिन नौजवानों के हाथों इन बेड़ियों को तोड़ने की जिम्मेदारी होनी चाहिए वही नौजवान इन धार्मिक जंजीरों को मजबूत करने में लगा है !

भगत सिंह ने कभी ऐसे भारत की कल्पना नही की होगी जहां मजहब के नाम पर रोज इंसानियत का गैंगरेप होता हो !

भगत सिंह ने ऐसे भारत का सपना देखा था जिसमे एक स्वस्थ्य समाज का अस्तित्व हो लेकिन हमने हम सबने मिलकर एक निहायत बीमार समाज का निर्माण किया है जिसकी संवेदनाएं मर चुकी हैं उम्मीदें धर्म की चाशनी में गला दी गई है आज हम एक ऐसे समाज मे जी रहे हैं जहां चारों ओर सिर्फ और सिर्फ आडम्बर है पाखंड है झूठ है मक्कारी है षड्यंत्र है और हैवानियत का नंगा नाच है !

भगत सिंह को मरते समय भी किसी ईश्वर की जरूरत नही पड़ी थी और उन्होंने किसी ईश्वरीय सत्ता में विश्वाश को अपने लिए कायरता करार देते हुए खारिज कर दिया था क्यों ?

क्योंकि उन्हें मानवता का ज्ञान था वे इतिहास से परिचित थे और उन्हें पता था कि मानवता का इतिहास क्रांति की नींव पर खड़ा हुआ है जिसमे किसी ईश्वर के लिए कोई जगह है ही नही !

राहुल संस्कृत्यान के अनुसार ईश्वर सत्ताधारियो पूंजीपतियों की उन्नति के लिए बहुत उपयोगी होता है जिसके माध्यम से जनता को अपने मनमुताबिक काबू में रखा जा सकता है और उसकी पीढ़ियों तक गुलाम बनाया जा सकता है इसके लिए हर युग मे पुरोहितों और मुल्लाओ के वर्ग को मजबूत किया जाता है !

लेकिन ये सब बातें आज के फेसबुकिये नौजवानों की समझ से बाहर की बाते हैं !

उन्हें बस हिन्दू और मुसलमान का पता है इससे ज्यादा वे कुछ नही जानते किसी को हिन्दू होने पर गर्व है किसीको मुसलमान होने पर फख्र है उनके इसी जहिलपन का फायदा उठा कर कुछ लोग सत्ता के शीर्ष पर पहुंच जाते है और जब तक वे इस बात को समझते है तब तक दंगाइयों की और उन्हें लड़ाने वाले नए नेताओं की एक नई पीढ़ी तैयार हो जाती है !

पूरे देश मे पिछले कुछ दशकों से यही बात बार बार दोहराई जा रही है !

दंगों का पुराना स्टाइल मॉडर्न हो चुका है पहले मांस से दंगे करवाये जाते थे अब जमाना dj का आगया है !

रात को सड़क किनारे लगी एक मूर्ति सुबह लोगो को टूटी हुई मिलती है दिन में दंगे शुरू होते है शाम को दुकाने जलाई जाती है और फिर रात को सामूहिक बलात्कार के बाद फिर अगली सुबह तक कुछ लोगो की दुनिया पूरी तरह उजड़ चुकी होती है !

मामला dj से शुरू होकर वाया मूर्ति आग से होते हुए बलात्कार से बर्बादी तक पहुंचता है

ये है आज का युवा इक्कीसवीं सदी का युवा ...

भारत का युवा बिहार का युवा ...

जिसके लिए एक मूर्ति की कीमत किसी की जान से ज्यादा है मस्जिद का लौडस्पीकर टूट गया तो इंसानो को मार दो जला दो मूर्ति टूट गई तो काट दो जला दो इन्हें दुबारा बना दो लगा दो नही बस काट दो जला दो मार दो...

ये कैसी मानसिकता है ये कैसे युग मे पहुंच चुके है हम कैसा देश बना रहे हैं हम सोचने की जरूरत किसी को नही ...

मलसीसर बांध जिसके निर्माण में 600 करोड़ की लागत आई थी और जिसका उद्घाटन तीन महीने पहले ही हुआ था वो 2 अप्रैल को टूट गया उसे किसने तोड़ा ?

कितने नौजवानो को इस बांध के टूटने की खबर मिली ?

और कितने नौजवानो ने देश के गरीबो की कमाई के 600 करोड़ की इस भयंकर बर्बादी पर अफसोस जताया ?

इस बांध से हजारों लोगों के घरों में रोशनी जल सकती थी !

लेकिन इस बात के लिए एक भी नौजवान को चिंता नही हुई लेकिन सड़क किनारे लगी एक मूर्ति के टूटने पर और मस्जिद के लौडस्पीकर के टूटने पर हजारों नौजवानों को दिक्कत हो गई इसके लिए सरकारी संपत्ति को जलाया गया एक दूसरे समुदाय की दुकानों को आग लगाया गया नौजवानो के हुजूम सड़को पर आगये पुलिस और सेना की कई टुकड़ियां मामला शांत करने में लगीं !

ये है हमारे युवाओं का जोश जो केवल धर्म के नाम पर एक्टिव होता है बाकी समय ये जोश मरा रहता है चाहे कोई भूख से मरे कही रेप हो इन्हें कोई फर्क नही पड़ता यहां इनका मरा हुआ जमीर दफन हो जाता है !

लेकिन इन मुर्दा नौजवानों के बीच कुछ जिंदा युवा भी होते हैं लेकिन ऐसे जिंदा लोगो से तो बहुत दिक्कत है मुर्दों की भीड़ में कोई जिंदा क्यों इसलिए मुर्दो की भीड़ में जो जिंदा है सिस्टम के लिए उसका मरना जरूरी हो जाता है बिहार में भ्रस्टाचार के खिलाफ अकेले लड़ रहे एक युवा को सरेआम गोली मार दी गई !



इसके मरने से किसी को कोई दिक्कत नही हुई कोई दंगा नही हुआ किसी नौजवान का मरा हुआ जमीर जिंदा नही हुआ !

एक साल पहले मिड डे मील खाने से 25-30 बच्चे तड़प तड़प के मर गए थे किसी नौजवान का ज़मीर नही जगा कोई दंगा नही हुआ किसी का घर नही जला !

पिछले साल ही बिहार में पुलिस की बर्बरता में कई भूमिहीन बेसहारा औरतों की जान गई लेकिन किसी भी नौजवान का ज़मीर नही जागा !

बिहार में सरकारी स्कूलों की हालत पर भी किसी भी नौजवान का ज़मीर कुलांचे नही मारता इन स्कूलों से मजदूरी की डिग्री पाकर हर साल 12 से 15 साल की उम्र के लाखों बच्चे अपने परिवारों का पेट पालने के लिए घरों से निकल जाते है फिर भी किसी नौजवान का ज़मीर नही जागता कोई दंगा नही होता !

ट्रेनों में ठूस कर इन्हें देश के दूसरे राज्यों में फैंका जाता है जहां इन्हें आजाद देश के नए गुलामों की फौज में जगह मिलती है फिर भी किसी नौजवान का ज़मीर नही जागता !

दहेज की बलिवेदी पर हर साल लाखों लड़कियों को 12 से 16 के बीच ब्याह के नाम पर कुर्बान कर दिया जाता है ! फिर भी किसी भी नौजवान का मरा हुआ ज़मीर जिंदा नही होता कोई तलवार लेकर नही निकलता !

धर्म के नाम पर पाकिस्तान बना था लेकिन हमारे पूर्वजों ने भाँप लिया था कि भविष्य में धर्म सिर्फ और सिर्फ विनाश का कारण होगा इसीलिए उन्होंने इस देश को पंथनिरपेक्ष बनाया लेकिन आज धर्म के नाम पर बना पाकिस्तान किस मकाम पर खड़ा है देख लीजिए रोज बम ब्लास्ट मस्जिदों में बम ब्लास्ट होते हैं कौन करता है ये सब ??

एक मुसलमान को दूसरा मुसलमान ही उड़ा रहा है खत्म कर रहा है वो भी धर्म के नाम पर !!

स्कूलों में बम ब्लास्ट मासूम बच्चो पर भी इन दरिंदो को कोई दया नही आती मारने वाला मुसलमान मरने वाले बच्चे भी मुसलमान !!

ऐसे ही भारत मे जो लोग हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा को सच साबित करने वाली राजनीति का शिकार हो रहे हैं उन्हें एक बार उन हिन्दू गांवो पर भी एक नजर जरूर डाल लेनी चाहिए जहां सब हिन्दू ही है लेकिन घोर जातिवाद के कारण असमानता की ऐसी रेखाएं मौजूद हैं जिसकी वजह से समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग उपेक्षित और दिन हीन है !

90 के दशक में बिहार की रणवीर सेना के कुकर्मों को भूल गये जो दलितों के घरों को चुन चुन कर आग लगाते थे उनके बच्चों की हत्याएं करते थे ये आतंकवादी संगठन विदेशी नही था बल्कि यहाँ मारने वाला भी हिन्दू था और मरने वाला भी हिन्दू था !


आप कहेंगे कि ये बहुत पुरानी बातें है आज ऐसा नही है तो श्री मान जी पूरे भारत की यही असली तस्वीर है जो आज़ादी के बाद राजनीति मीडिया और धर्म के घिनौने गठजोड़ में और मजबूती के साथ उभरी है !

गुजरात का एक दलित घोड़े पर चढ़ने के कारण मारा जाता है !

तो केरल का एक दलित 15 रुपये का चावल चुराने के जुर्म में कत्ल कर दिया जाता है !

यूपी में 15 रुपये के लिए पति पत्नी को कुल्हाड़ी से चिर दिया जाता है जम्मू के एक शाहिद जवान के शव को समशान में जलाए जाने से रोक दिया जाता है !

ऐसी हजारो घटनाये रोज आज़ाद भारत के लाखों गांवों में घटती हैं ज्यादातर घटनाये तो दर्ज भी नही होती 

बात बिहार की हो रही थी तो अभी सिर्फ पांच महीने पहले बिहार में जो हुआ उसे शायद आप भूल चुके होंगे 

24 नवंबर 2017 की रात भागलपुर जिले के बिहपुर के झंडापुर गांव में एक दलित परिवार के तीन सदस्यों की बर्बर हत्या कर दी गयी. उनकी आंखेंं निकाल दी गयीं, किसी धारदार हथियार से उनका गला रेत दिया गया.

कनिक राम और 10 साल के बच्चे छोटू का लिंग काट दिया गया, पत्नी मीना देवी का गला रेत दिया गया. खून से भरे फर्श पर उनकी 14 साल की बेटी तड़प रही थी.

उसके बदन पर से कपड़े नोंचकर अलग कर दिये गये. उसके गुप्तांग पर गहरी चोट थी. उसका सामूहिक बलात्कार किया गया था. उसके सिर पर लोहे के हथियार से हमला किया गया था.

ये भयानक और खौफ़नाक चेहरा हमारे समाज का है!

इस बर्बर हत्या पर सरकार का कोई बयान नहीं आया न ही इस बच्ची को देखने कोई सरकारी महकमे से कोई आया. 

इस हत्या के पीछे दलितों का समाज में आगे बढ़ना भी एक वजह बताया जा रहा है.

जिस बच्ची के साथ बलात्कार हुआ, वह 7वीं कक्षा में पढ़ती थी. चौधरी टोला में स्थित सरकारी स्कूल में पढ़ने जाती थी, जहां उसके साथ कुछ दबंगों ने छेड़खानी की, जिसका विरोध उसने किया था.

आंकड़े बताते है कि पिछले एक साल में दलितों और महिलाओं पर हुए हिंसक हमले की घटनाएं बढ़ी हैं.

इसमें वैशाली के दलित आवासीय विद्यालय में एक लड़की की बलात्कार के बाद निर्मम हत्या, भागलपुर में दलित महिलाओं पर हमला और रोहतास जिले के काराकाट थाना क्षेत्र के मोहनपुर गांव में 15 साल के एक दलित लड़के को दबंगों द्वारा जिंदा जला दिए जाने समेत कई बड़े मामले सामने आये.

इंडिया टुडे में प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक हमारे देश में हर 18 मिनट पर एक दलित के खिलाफ अपराध घटित होता है. औसतन हर रोज तीन दलित महिलाएं बलात्कार का शिकार होती हैं, दो दलित मारे जाते हैं, और दो दलित घरों को जला दिया जाता है.

54 फीसदी कुपोषित है, प्रति एक हजार दलित परिवारों में 83 बच्चे जन्म के एक साल के भीतर मर जाते हैं.

यही नहीं 45 फीसदी बच्चे निरक्षर रह जाते हैं. करीब 40 फीसदी सरकारी स्कूलों में दलित बच्चों को कतार से अलग बैठकर खाना पड़ता है, 48 फीसदी गांवों में पानी के स्रोतों पर जाने की मनाही है !

यह है हिन्दू राष्ट्र की असली तस्वीर !

धर्म के नाम पर बने देशों का हश्र ऐसा ही होता है हमे इस देश को सीरिया और पाकिस्तान नही बनाना बल्कि वो खूबसूरत भारत बनाना है जिसकी कल्पना संविधान की प्रस्तावना में कई गई समानता बंधुता और स्वतंत्रता पर आधारित एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र जिसमे समाज के सभी वर्गों की भागीदारी हो एक ऐसा राष्ट्र जो करुणा मैत्री और सद्भावना के मार्ग पर चलते हुए विश्व का मार्गदर्शन करें !

धर्म के नाम पर आपस मे लड़ाने वाले कभी खुद दंगो में नही जलते कभी आपने सुना है कि किसी दंगे में कोई नेता मरा ?

बिहार में कवाहत है कि अगलगी में कभी कुत्ता नही जलता और दंगों में एक गरीब को दूसरे गरीब से लड़ाने वाले नेता के बच्चे विदेशों में पढ़ते है और आपके बच्चों के लिए सरकारी स्कूल में एक टीचर ढंग का नही मिलेगा यही राजनीति है इसे हम सबको समझना पड़ेगा वर्ना ये लोग हमें आपस मे लड़वाकर खत्म कर देंगे !

इतिहास में किसने क्या किया इससे किसी को कुछ नही मिलने वाला दूसरे विश्व जापान ने अमेरिका के पर्ल हार्बर पर हमला किया था !

बदले में अमेरिका ने जापान पर दो भयंकर एटम बम दागे जिससे जापान के दो बड़े शहर बर्बाद हो गए आज दोनों देश पुराने इतिहास को भुलाकर साथ मिलकर काम कर रहे हैं और तरक्की की सीढ़ियां चढ़ते चले जा रहे हैं !

हमे भी इन मुल्कों से सबक लेना चाहिए जरा सोचिए जापान जैसा छोटा सा मुल्क इतना आगे क्यों है वो देश जो भारत से मिले ज्ञान को अपना आदर्श मानकर चलता है !

जापान का संविधान बुध के सिद्धांतों पर आधारित है वही बुद्ध जिनकी कर्मस्थली बिहार ही थी और बिहार के बुद्ध और उनके विचारों ने सुदूर के एक छोटे से देश को बदल दिया लेकिन हमने क्या किया ?

हमने बुद्ध को ही त्याग दिया बुद्ध को भुला बैठे और असमानता लूट और पाखंडों पर आधारित व्यवस्था को ही धर्म में लिया विनाश तो होना ही था !

हमे शर्म आनी चाहिए कि जापान जैसा छोटा सा मुल्क 1951 से भारत को 80 अरब डॉलर की सहायता हर साल देता है !

देश मे 80 करोड़ युवा हैं लेकिन टूथपेस्ट से लेकर बल्ब तक और कम्प्यूटर से लेकर स्पेस शटल तक सभी दुनिया के दूसरे देशों ने बनाये हैं बंदूक की एक गोली तक युवाओ का ये देश नही बना पाता क्यों ?

भयंकर कर्ज में डूबे इस देश के युवा कर क्या रहे हैं ?

असल मे आज़ादी के बाद कि सभी सरकारें देश में पूंजीपतियों और धार्मिक गिरोहों पर कंट्रोल नही कर पाई साथ ही गरीबी रोजगार शिक्षा स्वास्थ्य जनसंख्या नियंत्रण जैसे कामों में बुरी तरह नाकाम रही हैं जिसकी वजह से देश मे तेजी से गरीबी और अमीरी की खाई बढ़ी है ऐसी घोर अराजकता और निराशावादी व्यवस्था से पैदा होने वाले असंतोष को दबाने के लिए सभी सरकारों द्वारा बड़ी शातिराना तरीके से गरीब बेरोजगार और अशिक्षित जनता को धार्मिक जंजाल में फंसाने के काम किया गया !

अमेरिका में 60 के दशक में एक जब टेलीविजन घर घर तक पहुंचा तो उस समय वहां की सरकार ने जनता को जागरूक करने के लिए tv को माध्यम बनाया !

लेकिन 1990 में देश की अर्थव्यस्था जब पूरी तरह बर्बादी के कगार पर पहुंच गई थी और यही वो दौर था जब टेलीविजन घर घर पहुंच चुका था तब लोगों को धार्मिक बनाने के लिए टेलीविजन को माध्यम बनाया गया !

मैं ये बात इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि आज प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और शोशल मीडिया के आधुनिक युग मे देश के युवाओं को भ्रमित करने का षड्यंत्र किया जा रहा है !

और देश के बिगड़ते हालात इस बात की गवाही दे रहे हैं कि वे लोग अपने मकसद में कामयाब हो रहे हैं !

दंगे क्यों होते हैं और कैसे करवाये जाते हैं इसका एक छोटा सा उदाहरण देता हूँ 1920 के दशक में केरल के सामंतो और जमींदारों ने किसानों पर टैक्स दुगना कर दिया था इन जमींदारों में हिन्दू और मुसलमान दोनों तरह के जमींदार थे और टैक्स का भार सहने वाली मोपला की जनता में भी हिन्दू और मुसलमान दोनों वर्ग के खेतिहर मजदूर और किसान थे !

टैक्स से परेशान जनता ने विद्रोह कर दिया हिन्दू और मुसलमानो ने मिलकर जमींदारों के गोदाम लूटने शुरू कर दिए ये विद्रोह कई महीनों तक लगातार चलता रहा जमींदार अपनी हवेलिया छोड़ छोड़ कर भागने लगे इस भयंकर बर्बादी से निपटने के लिए जमींदारों की एक गुप्त मीटिंग हुई और इस मीटिंग के अगले ही दिन मस्जिदों में सूअर का और मंदिरों में गाय का मांस मिलना शुरू हुआ देखते ही देखते वो खेतिहर मजदूर जो अमीरों के गोदाम जला रहे थे एक दूसरे के घरों को फूंकने लगे और इस तरह इतिहास में 1922 का केरल का यह दंगा मशहूर हो गया !

देखा आपने यही है दंगों की राजनीति जो आज भी बदस्तूर जारी है हां स्थान और तरीका जरूर बदल गया है !

जरा सोचिए 

अल्लाह में ताक़त होती तो मस्जिदों में बम विस्फोट नही होते और किसी भगवान में ताक़त होती तो मंदिरों की सुरक्षा इंसान को नही करनी पड़ती !


भगवान या अल्लाह से न्याय मिलता तो संविधान और कानून की जरूरत ही क्या थी ?

देश के हर कोने में हजारों चौराहों पर लाखों छोटे छोटे मासूम बच्चे हाथ मे भीख का कटोरा लिए भटक रहे हैं !


 हर साल लाखों बच्चियां वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेली जा रही हैं हर साल हजारों मासूम बच्चियों से रेप होते हैं !

हनुमान और अल्लाह को इनकी फिक्र नही लेकिन हम इंसान होकर पत्थर के इन भगवान और अल्लाह के लिए आपस मे लड़ रहे हैं क्या यही इंसानियत है ?

देश केवल नारों से नही चलता पेट केवल भाषण से नही भरता बॉर्डर पहाड़ नदियाँ देश नही होती बल्कि देश बनता है वहां के लोगों से...किसी भी देश की तरक्की का पैमाना वहां के लोगों के जीवन स्तर से मापा जाता हैं न कि उस देश के झंडे से ...


अमेरिका के लोग अपने देश के झंडे को कच्चा बना कर पहन लेते हैं इसका मतलब ये नही की वे अपने देश से प्यार नही करते ...

राष्ट्रवादी होने का अर्थ सिर्फ नारे तक सीमित नही है बल्कि देश की समस्यायों से निपटने का सामूहिक हल ढूंढने से है इसलिए मेरे भाइयों मेरे साथियों शोषकों के बनाये झूठे धार्मिक भ्रमजाल से मुक्त होकर देश की समस्याओं के विरुद्ध एक हो जाइये यही मेरी आपसे विनती है !

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