हमे क्या चाहिए ? - तर्कशील भारत

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Sunday, April 8, 2018

हमे क्या चाहिए ?

130 करोड़ लोगों को
रोटी चाहिए
रोजगार चाहिए
कपडा और मकान चाहिए 

पाखंडों से मुक्ति चाहिए
जातिवाद और मुल्लावाद से छुटकारा चाहिए

130 करोड़ लोगों को

भ्रष्ट नेताओं से
लूटखोर पूंजीपतियों से
मजहब के लूटखोर 
दलालों से 
शोषणवादी संस्कृति से
मुक्ति चाहिए 

130 करोड़ लोगों को 
अपने पर 
लदे हुए 
बोझनुमा त्योहारों
जोंकनुमा परम्पराओँ 
से मुक्ति चाहिए

लेकिन 

सत्तावर्ग पर आसीन 
कुछ भेड़ियेनुमा इंसान
130 करोड़ लोगों को
युद्धोन्माद में
धकेल देना चाह रहे है !

वे चाहते हैं 
भूखा रोटी के बारे में
सोचने के बजाय 
गोली के बारे में सोचे !

वे चाहते हैं 
खेतों में नफ़रतें उगें
वे चाहते है
गाय बकरे से लड़े
मुर्गी मछली से लड़े
भाई भाई से लड़े
बाप बेटे से लड़े
औरत मर्द से लड़े
हिन्दू मुसलमान से लड़े
मुसलमान मुसलमान से लड़े
यादव चमार से लड़े
चमार भंगी से लड़े
भंगी
ईसाई से लड़े
ईसाई
सिख से लड़े 
सिख जैन से लड़े
जैन बौद्धों से लड़े

इतनी नफ़रतें हों की
नफ़रतें खून में दौड़े

इंसान गोली और बारूद खाये 
घरों में गाय भैंस की जगह 
टैंक हों 

बच्चों के हाथों में 
किताब की जगह
ग्रेनेड हो 

बुजुर्ग के हाथों में
छड़ी की जगह 
AK-56 हो !

बेरोजगार इंसान 
रोजगार नहीं
युद्ध के बारे में सोचे 

जातिवाद में पिसता इंसान
धर्म और संस्कृतियों पर 
इतराये !

बच्चों की भूख से 
परेशान 
कोई माँ
अपने बच्चों को 
भोजन से पहले
भारत माता की जय 
बोलने को कहे !

व्यवस्था की चक्की में
पिस्ता गरीब
 न्याय और 
अधिकारों के लिए
तीर्थो 
मंदिरों और मस्जिदों के
द्वार खटखटाये !

शिक्षा से वंचित बच्चे
भविष्य के
बेहतर मजदुर बनें !

मृत भाषा 
मृत ग्रन्थ
और
मृत आत्माओं के नाम
साम्प्रदायिकता के अग्निकुंड में
जीवितात्मा स्वाहा हों !

वे चाहते हैं 

इंसान को समाज नहीं
सिर्फ भीड़ बनाना 
क्योंकि
समाज को हांकना संभव नहीं
और
भीड़ को भेड़ की भांति
बाड़ों में कैद किया जा सकता है
उसे हांकना आसान है 
उसे एक दूसरे से भिड़ाना
और भी आसान !!

-शकील प्रेम 

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