विज्ञान को हैरान कर देने वाला अदभुत ग्रह - तर्कशील भारत

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Sunday, April 22, 2018

विज्ञान को हैरान कर देने वाला अदभुत ग्रह





सदियों से ग्रहों और नक्षत्रों के नाम पर धार्मिक गिरोहों ने समाज को गुमराह किया है अंतरिक्ष के बारे में पिछली सदी में हुई खोजों ने हजारों वर्षों के धार्मिक पाखंडों की धज्जियां उड़ा दी हैं जिन ग्रहों से डरा कर लोगों को लूटा जाता था निकट भासिष्य में उन ग्रहों पर इंसानी बस्तियां स्थापित होने वाली हैं !

तर्क शोध परिवर्तन और परीक्षण ही विज्ञान का नियम है विज्ञान ने ब्रह्मण्ड के बारे में हमारी समझ को बदल कर रख दिया पिछली सदी में स्थापित विज्ञान की कई थ्योरिया भी अब बदल रही हैं इक्कीसवीं सदी की शुरुआत में ग्रहों के बारे में वैज्ञानिको की यही मान्यता थी कि एक बड़े सितारे के इर्द गिर्द ही कोई ग्रह चक्कर लगा सकता है यानी ग्रहों का वजूद अपने से विशाल तारे के होने पर ही निर्भर हो सकता है लेकिन अभी हाल ही में हुई एक खोज ने विज्ञान इस थ्योरी को बदल कर रख दिया है !

हमारी आकाशगंगा में ही हमसे 600 प्रकाशवर्ष की दूरी पर एक ग्रह मिला है जिसे वैज्ञानिको ने NGTS-1b नाम दिया है ये हैरतअंगेज ग्रह साइज में जूपिटर के बराबर है, और ये ग्रह जिस तारे की परिक्रमा कर रहा है वो आकार में इस ग्रह का आधा है। 

वैज्ञानिकों ने कभी यह अनुमान नहीं लगाया था कि कोई इतना बड़ा ग्रह इतने छोटे तारे का चक्कर काट सकता है, देखा जाय तो यह ग्रेविटी के मापदंडों को भी नकार रहा है। यह अजीब ग्रह पृथ्वी से 600 प्रकाश पर्व दूर है !

वॉरविक यूनिवर्सिटी के डॉ. डैनियल बेलिस ने कहा, 'NGTS-1b की खोज हमारे लिए पूरी तरह आश्चर्यजनक है। ऐसा नहीं सोचा गया था कि इतना बड़ा ग्रह इतने छोटे तारे का चक्कर काट सकता है।' उन्होंने आगे कहा, 'हम पहले यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ये ग्रह ऐसा कैसे कर रहा है ?

अब हमारी चुनौती यह जानना भी है कि आकाश गंगा में इस तरह के ग्रह कितने कॉमन हैं।' 

NGTS-1B की खोज चिली में रोबॉटिक टेलिस्कोप नेक्स्ट जेनरेशन ट्रांजिट सर्वे (NGTS)की मदद से की गई। 




यही नही इस ग्रह का और इसके सूरज के आकार का ये असंभव तालमेल ही वैज्ञानिकों को हैरान कर देने का एकमात्र कारण नही है बल्कि एक दूसरा कारण और है जिसने साइंटिस्ट्स की नींद उड़ा दी हैं ये ग्रह अपने तारे के बेहद नजदीक है, जोकि पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी के महज 3 फीसदी है।

यानी यह अपने ग्रह की परिक्रमा महज 50 लाख किलोमीटर की दूरी से कर रहा है !

इसी वजह से यह पृथ्वी के तीन दिनों के बराबर समय मे अपने छोटे से लाल बौने सूरज का एक चक्कर पूरा कर लेता है।

हालांकि ग्रेविटी के नियमों के विरुद्ध काम करता दिखाई देने वाला ये ग्रह असल मे ग्रेविटी के नियमों के अनुरूप ही काम कर रहा है क्योंकि इसका सितारा जो इससे आकार में आधा है वो डेंसिटी और भार में इस ग्रह से करोड़ो गुना भारी है यही कारण है कि ये ग्रह उस छोटे से दिखने वाले तारे की परिक्रमा कर रहा है !

धर्म और विज्ञान में बुनियादी फ़र्क़ यही है कि धर्म की मान्यताओ में बदलाव के लिए गुंजाइश नही होती तो विज्ञान निरंतर बदलाव और शोध की प्रक्रिया का नतीजा है धर्म के नियम झूठे मापदंडों पर आधारीत होने के कारण मानवता विरोधी साबित होते हैं तो विज्ञान के नियम तर्क परीक्षण और परिवर्तन पर आधारित होने के कारण मानवीय साबित होते हैं यही धर्म और विज्ञान में बुनियादी अंतर होता है !

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