वो तड़पती रही लेकिन उसका खुदा तो मर चुका था ! - तर्कशील भारत

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Friday, April 13, 2018

वो तड़पती रही लेकिन उसका खुदा तो मर चुका था !

वो तड़पती रही 
लेकिन उसका खुदा तो 
मर चुका था

वो चिल्लाती रही 
लेकिन मंदिर का भगवान भी
परलोक सिधार चुका था 

आठ बरस की 
छोटी सी जिंदगी में 
उसने मां के आंचल से निकलकर
 जंगल की पगडंडियों में चलकर 
अपने मवेशियों को चराना सीखा था 

उसे धर्म का ज्ञान न था
मजहब का इल्म न था 

वो किसी खुदा को नही जानती थी
किसी भगवान से उसका वास्ता न था

उसकी नजर में ये दुनिया 
उसके जंगल की तरह हसीन थी 

और उसकी इस हसीन दुनिया मे 
रहने वाले लोग
उसके सीधे साधे
मवेशियों की तरह ही 
सीधे और मासूम थे 

लेकिन वो भोली थी
वो जंगल की हक़ीक़त से 
रूबरू न थी 

जंगल मे 
सीधे साधे 
मवेशियों की फिराक में 
कभी कभी
कुछ भेड़िये भी 
छुपे होते हैं

जो मौका मिलते ही 
मासूम भेड़ो को 
अपना शिकार बना लेते हैं
किसी मासूम भेड़ की
बोटियाँ तक नोंच डालते हैं 

बोटियाँ नोचने की प्रक्रिया में
भेड़ चिल्लाती है तड़पती है
कराहती है बिलखती है
बेसुध होती है 

उसकी इस व्यथा में 
भेड़ियों को मजा आता है 

क्योंकि यही तो भेड़िये का धर्म है

-शकील प्रेम 

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