ये तो होना ही था. - तर्कशील भारत

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Friday, March 9, 2018

ये तो होना ही था.



इराक में सद्दाम हुसैन के पतन के साथ ही उसकी सैंकड़ो मूर्तियों को ध्वस्त किया गया लीबिया ट्यूनेशिया सहित पिछले पांच दस सालों के इतिहास में ही दुनिया भर में सत्ता परिवर्तन के साथ हजारों महापुरुषों की मूर्तियां तोड़ी गई !
रूस में कम्युनिज्म के उदय के साथ ही सैंकड़ों मूर्तियां उखाड़ फैंकी गईं रातो रात चर्च मस्जिदे और बौद्ध मठों का नामोनिशान मिटा दिया गया था !
दुनिया भर में क्रांतियां हुई सत्ता परिवर्तन हुए सामाजिक परिवर्तन हुए जिसके परिणामस्वरूप पुरानी सत्ता के चिन्हों को नष्ट किया गया लेकिन भारत मे कभी क्रांति नही हुई बल्कि यहां क्रांति के प्रतीकों को ही नष्ट करने की परंपरा रही है !

भारत के इतिहास पर थोड़ा गौर करें तो सम्राट कनिष्क की मूर्तियां खंडित पाई गईं है राजा हर्षवर्धन की प्रतिमाएं टूटी हुई मिलती हैं !

सामाजिक क्रांति के पितामह तथागत बुद्ध से संबंधित भवन मूर्तियां बड़े पैमाने पर नष्ट की गईं बड़े बड़े स्तूप बौद्ध विहारों को मिट्टी में मिला दिया गया सम्राट अशोक के प्रतीकों को दबा दिया गया इस देश मे यही होता आया है और आगे भी यही होगा इसलिए क्रांति के प्रतीक लेनिन की मूर्ति को तोड़ा जाना आश्चर्य की बात नही है !

यहां अन्याय के प्रतीक मनु की मूर्ति न्यायालय में शान से खड़ी हो सकती है झूठे और काल्पनिक देवताओं के लिंग और देवियों की योनियां भव्य तरीके से पूजे जाएंगे लेकिन सामाजिक चेतना के अग्रदूतों की मूर्तियों को तोड़ा ही जायेगा !

बाबा साहेब अम्बेडकर के शब्दों में "भारत का इतिहास ब्राह्मणों और श्रमणों के संघर्षों के सिवा कुछ नही"..."इसलिए अगर क्रांति चाहिए तो सबसे पहले धर्मशास्त्रों को बारूद से उड़ा दो"
लेनिन की मूर्ति पर आंसू बहाने वाले भारत के मार्क्सवादियों को अम्बेडकर की ये बात समझ नही आएगी !

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