क्या ब्रह्मांड में हम अकेले हैं ? - तर्कशील भारत

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Monday, March 19, 2018

क्या ब्रह्मांड में हम अकेले हैं ?


गैलीलियो गैलिली ने 1609 जब बृहसत्पति के चार चंद्रमाओं को खोजा था तभी से यह सवाल लोगों के दिमाग मे उठता रहा है कि पृथ्वी से अलग किसी और ग्रह पर भी जीवन है या ब्रह्मांड में हम अकेले ही है !
पिछली सदी में विज्ञान की नई खोजों ने इंसान के लिए अंतरिक्ष के बन्द दरवाजे खोलने शुरू किए
पिछले पचास साठ वर्षों में अंतरिक्ष विज्ञान में हुई नई खोजों ने इंसान को हैरत में डाल दिया है चंद्रमा की धरती पर पहुंच चुके इंसान के लिए सौरमंडल का कोई भी ग्रह अछूता नही रह गया है इतना ही नही आज का इंसान सौरमंडल के बाहर की दुनिया को छूने की छटपटाहट में लगा हुआ है !

इसी छटपटाहट में इंसान की कल्पना शक्ति ने दूसरे ग्रहों पर जीवन की मौजूदगी की कल्पनाओ को सिनेमा और साहित्य के माध्यम से लोगों के अंतर्मन में स्थापित कर दिया !
परग्रही जीवों पर आधारित सिनेमा और साहित्यों से प्रभावित कुछ लोग एलियन से मुलाकात के दावे भी करने लगे और इस तरह एलियन भूत और प्रेत के किस्सों की तरह हमारी नई वैज्ञानिक संस्कृति का हिस्सा भी बनने लगा ! एलियन से मुलाकात के सभी दावे भूत और प्रेतों की तरह झूठी कहानियां ही साबित हुई !

लेकिन वैज्ञानिकों के सामने ऐसे भी मौके आते रहते हैं जब दूसरे ग्रह से आने वाले किसी सिग्नल का पता चलता है !
15 अगस्त 1977 को सेटी मे कार्यरत डा जेरी एहमन ने ओहीयो विश्वविद्यालय के बीग इयर रेडीयो दूरबीन पर एक रहस्यमयी संदेश प्राप्त किया इस संदेश ने परग्रही जीवन से संपर्क के रूप में दुनिया मे तहलका मचा दिया था यह संदेश 72 सेकंड तक प्राप्त हुआ लेकिन उसके बाद यह दूबारा प्राप्त नही हुआ। इस रहस्यमय संदेश मे अक्षरो और अंको की एक श्रंखला थी जो कि अनियमित सी थी और किसी बुद्धिमान सभ्यता द्वारा भेजे गये संदेश के जैसे थी। 

डा एहमन इस संदेश के परग्रही सभ्यता के संदेश के अनुमानित गुणो से समानता देख कर हैरान रह गये और उन्होने कम्प्युटर के प्रिंट आउट पर “Wow!” लिख दिया जो इस संदेश का नाम बन गया ! इस संदेश को आज तक समझा नही गया और ये संदेश दुबारा फिर कभी नही मिला इसलिए इसे किसी परग्रही सभ्यता से आया संदेश मानने की अटकलों को खारिज कर दिया गया !

ऐसा ही एक सिग्नल दुबारा अभी हाल ही में 30 अगस्त 2016 से सेती (SETI- “Search for Extraterrestrial Intelligence”) को मिल रहे हैं जिसे एलीयन सभ्यता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है लेकिन वैज्ञानिक इन संकेतों पर अभी तक सहमत नही है।

HD 164595 नामक सूर्य के जैसे तारे से रूसी खगोल वैज्ञानिको को रेडियो संकेत प्राप्त हुए है ! यह तारा हमसे 94 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है, खगोलिय पैमाने पर यह तारा हमारे पास मे ही है। इस तारे के पास नेपच्युन के आकार के ग्रह की उपस्थिति के स्पष्ट प्रमाण है।
मिडीया इन समाचार से उछल गया है और उन्होने एलियन सभ्यता की खोज की घोषणा कर दी है। उनके अनुसार सेती अंतरिक्ष से आये एक परग्रही रेडियो संकेतो की जांच कर रहा है। लेकिन दूसरी ओर वैज्ञानिक अभी सशंकित है, उनके अनुसार जब तक इन संकेतों की पूरी जांच नही हो जाती तब तक यह सब अभी दूर की कौड़ी है।

खगोल वैज्ञानिको के अनुसार इस तरह के संकेत अप्रत्याशित नही है, वे इस तरह के विचित्र संकेत अक्सर पाते रहते है और जांच के पश्चात ये संकेत हमेशा निराश कर देते है, जांच मे कुछ नही निकलता है। अधिकाशत: इस तरह के संकेत प्राकृतिक कारणो से उत्पन्न होते है जिनमे खगोलिय ज्वाला(stellar flare) या पृथ्वी मे ही उत्पन्न रेडियो संकेत का किसी वस्तु से परावर्तित होकर वापस आना होता है। किसी एलियन सभ्यता से उत्सर्जित संकेतो के सत्यापन के लिये वैज्ञानिको को वे संकेत एक से ज्यादा  बार प्राप्त होना चाहिये लेकिन ऐसा होता नही है।
इन संकेतों की सच्चाई जो भी हो लेकिन इतना तो तय है कि हमारे सवालों के जवाब अभी तक अंधेरे में ही हैं !

क्या ब्रह्मांड में हम अकेले हैं आज के विज्ञान के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है !
प्रकाश एक सेकंड में तीन लाख किलोमीटर की दूरी तय करता है और हमारे ज्ञात ब्रह्मांड की दूरी उसके एक छोर से दूसरे छोर तक लगभग तेरह अरब सत्तर करोड़ प्रकाश वर्ष है यानी एक सेकंड में तीन लाख किलोमीटर की गति तय करने वाली प्रकाश की किरण को ब्रह्मण्ड के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने में तेरह अरब सत्तर करोड़ साल लग जाएंगे जबकि हमारा ब्रह्मांड एक विराट मल्टीवर्स का छोटा सा गोला हो सकता है !

इसी ब्रह्मांड में मौजूद हैं करोड़ो सुपर क्लस्टर !
ये सुपर क्लस्टर बने हैं करोड़ों कलस्टर से और ये कलस्टर बने हैं अरबों  आकाशगंगाओं से !

हमारे ज्ञात ब्रह्मांड में लगभग 400 अरब आकाशगंगाये हैं !
ये आकाशगंगाएं बनी है खरबों सूर्यों से !
हमारी आकाशगंगा मिल्की वे में ही लगभग 500 खराब सितारे हैं जबकि  मिल्की वे एक औसत आकाशगंगा मानी जाती है !

मिल्की वे के एक छोटे से कोने में स्थित है हमारा सौरमंडल जिसके केंद्र में है हमारा सितारा जिसे हम सूरज कहते हैं इसी सूरज का चक्कर लगाने वाले आठ ग्रहों में एक पृथ्वी के जीव मंडल में जीव की करोड़ो प्रजातियों में से एक है मानव !

इतने विशाल ब्रह्मांड में क्या धरती पर ही जीवन है ?
जबकि केवल हमारी आकाशगंगा में हमारे सौरमंडल जैसे करोड़ों सौरमंडल मौजूद है और सुदूर के इन सौरमंडलों में करोड़ों ग्रह पृथ्वी के जैसे हैं जिनमे से अनेकों ग्रहों का पता भी लगाया जा चुका है इन ग्रहों पर उन तत्वों का भी पता चला है जिन तत्वों से हमारी पृथ्वी पर जीवन का सृजन हुआ है !

इन सबके बावजूद आज हमारे सामने यह प्रश्न खड़ा है कि पृथ्वी से अलग ब्रह्मण्ड में जीवन है कि नही ?
कुछ दशक पहले तक हम पृथ्वी से अलग किसी और सौरमंडल में पृथ्वी जैसे ग्रह के होने का अ
नुमान लगाया करते थे लेकिन आज जब पृथ्वी जैसे हजारों ग्रहों को हम ढूंढ चुके हैं तब हमारे सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन नये मिले ग्रहों पर जीवन है कि नही ?

हो सकता है कुछ दशक के बाद हमे इन  सवालों के ठोस जवाब भी मिल जाये और हो सकता है कि कुछ दशक के बाद हमारा किसी अन्य ग्रह के प्राणियों से संपर्क भी हो जाये लेकिन कभी सोचा है कि जो मनुष्य दूसरी दुनिया के प्राणियों से मिलने को इतना उतावला दिखाई दे रहा है उसे उसी के ग्रह के दूसरे प्राणियों की कितनी परवाह है ?

दूसरे ग्रह पर जीवन की खोज करने वाले इंसान के अपने ही ग्रह पर लाखों इंसान रोज भूखे मर जाते हैं लाखों बच्चे प्रतिदिन भूख और कुपोषण का शिकार हो कर मर रहे हैं करोड़ों लोग नालों और फुटपाथों पर जिंदगियां काटने में मजबूर हैं लाखों लोग प्रतिदिन आत्महताएँ कर रहे हैं !
गरीबी और भुखमरी से दुनिया के 70 प्रतिशत लोग जूझ रहे हैं !

धर्म और ईश्वर के नाम पर पूरी दुनिया मे इंसान ही इंसान का दुश्मन बन कर एक दूसरे से लड़ रहा है लोग मर रहे है और बेकसूरों को मार रहे हैं इस लड़ाई में करोड़ो लोग विस्थापित हो रहे हैं !
इंसान पृथ्वी के अन्य जीवों का तेजी से सफाया कर रहा है अनियमित विकास के नाम पर पृथ्वी की सुंदरता से खिलवाड़ हो रहा है प्राकृतिक संसाधनों को लूटने की होड़ मची हुई है एक दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ में इतने परमाणु बम बनाये जा चुके है जिनसे पूरी पृथ्वी 300 बार नष्ट हो सकती है !
क्या यही है हमारी मानवता ?

पृथ्वी नामक ग्रह की गरीब जनता के खून पसीने से इकट्ठा किये गए संसाधनों को किसी परग्रही जीव को ढूंढने में खर्च करने वाली सरकारों को इन संसाधनों का उपयोग पृथ्वी नामक ग्रह के जीवन की इस बर्बादी को रोकने में लगाना चाहिए ! वर्ना ये भी हो सकता है कि एक दिन जब किसी अन्य ग्रह के परग्रही जीव पृथ्वी को ढूंढते हुए हमारे सौरमंडल तक पहुंचे तब उन्हें पृथ्वी पर जीवन के निशान ही न मिले !

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