नकली पैगंबर की असली कहानी - तर्कशील भारत

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Thursday, January 4, 2018

नकली पैगंबर की असली कहानी

मेरा मकसद किसी भी इंसान की भावनाओ को आहत करना नही है बल्कि मेरा मकसद धर्म की उन सच्चाइयों को उजागर करना है जिनकी वजह से दुनिया को सदियों से बेवकूफ बनाया जा रहा है !!


मजहब के नाम पर इतिहास में बहुत अनर्थ हुआ है जो आज भी जारी है इसलिये धार्मिक पाखंडों को उजागर करना आज के समय मे बहुत ही जरूरी है !

आम आदमी धार्मिक भ्रमजाल में फंसकर धर्म के बारे में उतना ही जनता है जितना उसे धार्मिक गिरोह अपने व्यापक प्रचारतंत्र के माध्यम से समझा देते है फिर धर्म के भ्रमजाल में फंसा अशिक्षित आदमी यही थोथा धार्मिक अज्ञान अपनी अगली पीढ़ियों में डाल देता है जिससे समाज हमेशा जड़ बना रहता है !


यही सदियों से होता आया है इसलिए भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे धार्मिक देश तरक्की की दौड़ में पीछे छूट गये !!


सभी धर्म दावा करते हैं कि उनका धर्म ही सच्चा है और ऐसे ही धर्मों के मकड़जाल में दुनिया की एक बड़ी आबादी फंसी हुई है दुनिया की एक बहुत बड़ी आबादी को यकीन है कि उनके ईश्वर ने सृष्टि बनाई और पैगम्बरों की टीम भेज कर इंसानों को धर्म का सही रास्ता दिखाया इस फिलॉसफी को मानने वाले दो बड़े धर्मों में विभाजित हैं और परस्पर एक दूसरे के विरोधी भी हैं इनमे से एक धर्म का मानना है कि ईश्वर ने पैगम्बरों की परंपरा में जो आखिरी रसूल भेजा वो ईश्वर का खुद का बेटा था जिसे ईश्वर ने एक कुंवारी लड़की के गर्भ से पैदा किया था और इस व्यक्ति ने पुराने धर्म और पुरानी धार्मिक मान्यताओं का विरोध किया था जिसके चलते उनके इस महान पैगम्बर की हत्या कर दी गई थी वहीं दूसरे मत का मानना है कि ईश्वर ने आखिरी रसूल के रूप में जिस आदमी को भेजा वो खुदा का बेटा नही था बल्कि रेगिस्तानी इलाके में पैदा होने वाला वो व्यक्ति था जिसके मां बाप बचपन मे ही मर गए थे और उनके खुदा के द्वारा भेजे गये ये पैगम्बर ही आखिरी रसूल हैं !


अपनी बातों को साबित करने के लिये इन दोनों मतों के पास इनके खुदा की भेजी गई किताब भी मौजूद है और इन्ही किताबों के मार्गदर्शन में पिछले 1400 सौ वर्षों से ये दोनों ही मत एक दूसरे से लड़ते आ रहे हैं और इन दोनों मतों के मानने वाले दुनिया भर में फैले हुए हैं !


इन दोनों मतों से मिलता जुलता एक तीसरा मत भी है इस मत को मानने वालों का दुनिया में एकमात्र देश है इस धार्मिक विचारधारा में भी एक खुदा है एक आखिरी पैगम्बर है और खुदा की भेजी एक किताब भी है और इसी किताब के मार्गदर्शन में ये धर्म भी पिछले हजारों वर्षों से बाकी दोनों धर्मों से लड़ता चला आ रहा है !


एक और मत है जो इन तीनो मतों से थोड़ा सा अलग है इस मत के पास ईश्वर की एक नही बल्कि अनेकों किताबे हैं इस मत का दावा है कि जब जब धरती पर धर्म की हानि होती है तो ईश्वर स्वयं इंसान के रूप में अवतरित होकर पापियों का नाश करता है !


इन चारों धर्मों के पास ईश्वर की किताबें हैं और चारों ही धर्म अपनी अपनी किताब के सच्चा होने का दावा भी करते हैं !


सोचने वाली बात यह है कि अगर चारों ही किताबे ईश्वर ने भेजी हैं तो चारों में इतनी अलग अलग बाते क्यों हैं कि चारों को मानने वाले हजारों सालों से एक दूसरे की जान के दुश्मन बने हुए हैं ?


इंसानों को सही रास्ते पर लाने वाली ये किताबे उन्हें नफरत के घिनौने डगर पर क्यों ले जा रही हैं ?


इसका अर्थ यह है कि ये चारों ही किताबें झूठी है और इन किताबों का किसी ईश्वर से कोई संबंध ही नही हैं !


इससे यह भी साबित होता है कि इतिहास के कुछ स्वार्थी लोगों ने ही ईश्वर के नाम पर अपने निजी स्वार्थों की खातिर इन पुस्तकों का निर्माण किया है !

क्योंकि इन किताबों की परस्पर विरोधी बातों में कोई तालमेल नही है इंसानियत और सत्य का दावा करने वाली इन किताबों में इंसानियत और सत्य के नाम पर पाखंड झूठ और हिंसा की मानसिकता भरी पड़ी है इसी वजह से ये सभी धर्म मिलकर विज्ञान शांति और इंसानियत के विरुद्ध षड्यंत्रों में लगे रहते हैं !


जिस धर्म की बुनियाद ही झूठ पर आधारित हो वो कैसे सत्य की बात कर सकता है ?


पूरी दुनिया को ग्लोबल वार्मिंग से उतना खतरा नही है जितना कि इन झूठे धर्मों की दुष्ट धार्मिक षड्यंत्रों से है इसलिये इन धर्मों की पोल खोलना बहुत जरूरी है !


आस्था और विश्वाश की आड़ में धर्मों का पूरा बखेड़ा ही झूठा है ! 


आज हम आपको इस वीडियो के माध्यम से इन चार  धर्मों के झूठ के महा पुलिंदे से झूठ के कुछ उदाहरण दिखाने की कोशिश करेंगे जिसे देखकर आपको भी यकीन हो जाएगा कि सभी धर्मों की बुनियाद कितनी खोखली है !


सबसे पहले हम बात करेंगे उस व्यक्ति की जिसके नाम पर आज धर्म का बहुत बड़ा साम्राज्य कायम है और जिस व्यक्ति ने दावा किया था वह ईश्वर का भेजा हुआ एक मैसेंजर है !


हालांकि इस व्यक्ति ने शुरुआत में कुरीतियों के विरुद्ध सामाजिक चेतना का आंदोलन चलाया जिसके विरोध में पुरोहितों ने उनके चाचा से शिकायत की और उनके चाचा ने जब उनसे अपने इस आंदोलन को बंद करने की बात की तो उनका जवाब था कि कोई मेरे एक हाथ मे सूरज और दूसरे हाथ मे चांद भी दे दे तो भी मैं अपने इस मिशन से पीछे नही हट सकता !!


इस महान व्यक्ति समाज को बदलने का ये मिशन आगे चलकर एक बहुत बड़ी क्रांति बन गया !


यहां तक सब ठीक था लेकिन इस महान क्रांति का सत्यानाश तब शुरू हो गया जब इस आदमी ने अपने आंदोलन को धार्मिक रूप देकर इसे अपने दिमागी ईश्वर से जोड़ दिया और खुद को उस ईश्वर का मैसेंजर घोषित कर दिया !!


इसी व्यक्ति ने एक दिन अपने लोगों को इकठ्ठा किया और उन्हें बताया की ''कल रात इश्वर ने मुझे बहुत ही सम्मान प्रदान किया मैं सो रहा था की ईश्वर के एक दूत आये और मुझे उठाकर एक पवित्र स्थान पर ले गए , 


यहाँ लाकर उन्होंने मेरा सीना खोलकर पवित्र पानी से उसे धोया और फिर उसे इमान और हिकमत से भरकर बंद कर दिया , इसके बाद दूत मेरे लिए सफ़ेद रंग का घोडा जो खच्चर से छोटा था लाये मैं उस पर सवार हुआ ही था की अचानक हम एक दूसरे पवित्र स्थान पर पहुँच गए यहाँ उस गधे को बांध दिया गया ,


इसके बाद मैं दूत द्वारा एक तीसरे पवित्र स्थान ले जाया गया जहाँ मैंने दो बार प्रार्थना की इसके बाद दूत मेरे सामने दो प्याले लेकर आये एक दूध से भरा था और दूसरा शराब से लबरेज......मैंने दूध वाला प्याला लिया तो दूत ने कहा की आपने दूध वाला प्याला स्वीकार कर धर्माचार का परिचय दिया है |


इसके बाद आसमान का सफ़र आरम्भ हुआ , जब हम पहले आसमान पर पहुंचे तो दूत ने वहां तैनात चौकीदार से दरवाजा खोलने को कहा , उसने पूछा "तुम्हारे साथ कौन है ? और क्या ये बुलाये गए हैं ?'' दूत ने कहा "हाँ बुलाये गए हैं "यह सुनकर पहले आसमान के उस चौकीदार ने दरवाजा खोलते हुए कहा "ऐसी हस्ती का आना मुबारक हो" जब अन्दर दाखिल हुए तो उनकी मुलाकात प्रथम मनुष्य से हुई , दूत ने मुझे बताया की ये आपके पिता और पूरी मानव जाती के पूर्वज हैं इनको सलाम करो ,


इसके बाद दुसरे आसमान पर पहुंचे और पहले की तरह यहाँ भी चौकीदार को परिचय देने के बाद अन्दर दाखिल हुए जहाँ दो पुराने जमाने के मस्सेंजरो से परिचय हुआ !


इनको सलाम करने के बाद हम इसी तरह तीसरे आसमान पर गए और अंत में सातवे आसमान पर पहुंच गए !


इस यात्रा में इन महाशय जी को स्वर्ग और नर्क लाइव दिखाया गया , इसके बाद वे अपने घर वापस लौटे इस तरह इन महाशय जी की यह मनगढंत स्वर्ग यात्रा समाप्त होती है !


सुबह जब इन्होंने अपनी इस काल्पनिक स्वर्ग यात्रा का विवरण लोगो को बताया तो इनके कुछ चमचों(अनुयाइओ) ने इस झूठ का एक एक शब्द सच मान लिया , परन्तु जो सत्य के पुजारी थे उन्होंने इस झूठ को ये कह कर ख़ारिज कर दिया "तू तो बस हमारे ही जैसा एक आदमी है हम तो तुझे झूठे लोगों में से ही पाते हैं" कुरान -अश-शुअरा, आयत १८६ और जो चमचे थे उन्होंने इसे इन महाशय का एक और चमत्कार घोषित कर दिया !


जब हम इस यात्रा विवरण की कहानी को तर्क की कसौटी पर कसते हैं तो कई प्रश्न खड़े हो जाते हैं जैसा की बकवासों में कहा गया है की सुबह उन्होंने लोगों को ये बात बताई इसके अलावा इस बात का और कोई प्रमाण क्या है ? कोई नहीं न किसी ने दूत को देखा न किसी ने गधही को देखा बस मान गए क्यूंकि उनका सरदार कह रहा था !


इस विवरण से तो यही पता चलता है की इस घटना से पहले इनके अन्दर इमान था ही नहीं तभी तो ईश्वर का दूत इन महाशय को पवित्र स्थान ले जाकर उनका सीना फाड़ के इमान घुसेदते है , अगर उनके अन्दर ईमान था तो फिर दूत को ऐसा करने की क्या आवश्यकता पड़ी , और क्या इस से पहले श्रीमान जी के सीने में गन्दगी भरी हुई थी जिसे दूत ने पवित्र पानी से धोया !


और क्या इस बात का कोई आधार है की इमान सीने में होता है , धर्म या इमान अच्छाई या बुराई तो इन्सान के मस्तिष्क की देन है ये इस बात पर निर्भर करता है की व्यक्ति को बचपन में कैसे संस्कार या उसका विकास किस प्रकार हुआ है , इस तरह ईमान दिमाग के अन्दर होता है न की सीने में परन्तु क्या सर्वज्ञान संपन्न परमात्मा को इतना भी ज्ञान नहीं था जिसे वह अपने दूत को सिखाते की बेटा इमान सीने में नहीं दिमाग में होता है जाओ और उन महाशय जी का दिमाग खोल के उसको साफ़ करना सीने को नहीं वहां दिल होता है जो दिमाग को खून पहुँचाने का काम करता है 


इसके बाद हम चलते हैं दूध पीने वाली घटना पर जब देवदूत उनको दूध और शराब से भरा गिलास देते हैं तो साहब जी दूध को स्वीकार करते हैं और शराब से इंकार करते हैं इस पर दूत कहता है की शराब को मना कर निश्चय ही आपने धर्माचार का परिचय दिया है 


अब इस घटना पर भी कई प्रश्न खड़े हो जाते है जैसे की क्या जब दूत उनका सीना खोल कर नया एप इंसटाल कर देते हैं यानि सीना धोकर ईमान घुसेड देते हैं तब तो आदमी धर्माचार ही करेगा न !!


गाने का एप इंसटाल करोगे तो गाना ही बजेगा न फिल्म थोड़े ही चलेगी ,और क्या दूत उन्हें दूध और शराब देकर परिक्षण कर रहे थे की जो ईमान घुसेड़ा गया है वो सही काम कर रहा है की नहीं यानी दूत को अपने इस इंस्टालेशन की प्रक्रिया पर भरोसा नहीं था , मतलब की अगर उन्होंने दूध पिया तो वह सीने में ईमान घुसेड़ने की वजह से अन्यथा वह शराब ही पीते......


देखा आपने जिसकी बुनियाद ही झूठ पर खड़ी हो वो सत्य की बाते करते हैं वाह रे धर्म के धंधेबाजों तुम्हारा भी जवाब नही !!


अब बात करते हैं उस आदमी की जिन्हें ईश्वर का पुत्र माना जाता है !!


दुनिया को सीधे रास्ते पर लाने के लिए ईश्वर को किसी कुंवारी लड़की को प्रेग्नेंट करने की जरूरत पड़ी वाह रे ईश्वर धरती पर मौजूद उसके चेले चपाटे दावा करते हैं वो सर्वशक्तिमान है कुछ भी कर सकता है ये पूरी सृष्टि ईश्वर ने एक झटके में बना डाली इंसान को भी उसने यूँही ही पैदा कर दिया और वो इंसान धरती पर आकर उसकी अवहेलना भी करने लगा जिसे सुधारने के लिये ईश्वर को एक नाबालिक लड़की के गर्भ से अपने बेटे को पैदा करना पड़ गया !!


ईश्वर इतना ही सर्वशक्तिमान था तो इंसान को बिगड़ने ही क्यों दिया ?


वो सर्वज्ञानी तो हो ही नही सकता क्योंकि एक कुंवारी लड़की के प्रेग्नेंट होने की प्रीडा को वो नही जान पाया और उस नीच ईश्वर की इस मनमानी के कारण उस अभागी लड़की को अपने घर से निकलना पड़ा एक अनजान आदमी के पशुओं के बाड़े में उस लड़की ने ईश्वर के लड़के को जन्म दिया उसे पाला पोसा और उम्र भर दुनिया की नजरों में एक दुश्चरित्रा बनी रही लेकिन उस महान ईश्वर ने कभी भी उस औरत पर लगे कलंक को धोने की कोशिश नही की !!


ईश्वर के बेटे ने उसके कहने पर समाज को बदलने का भरपूर प्रयास किया उसने लोगों को समझाया उन्हें रास्ता दिखाया वो अपने मकसद में कामयाबी की ओर बढ़ा ही था कि सत्तावर्ग और पुरोहितों की नजरों में आ गया और उन्होंने उसे पकड़ लिया !


वो सरेआम पिटता रहा और ईश्वर देखता रहा उसकी चमड़िया उधेड़ दी गईं लेकिन ईश्वर से कुछ न हो सका ईश्वर के उस बेटे को सूली पर चढ़ा दिया गया लेकिन परमपिता नपुंसक बना बस देखता रहा !


ऐसे ईश्वर को सर्वशक्तिमान कहने वाले उस जैसे ही बेगैरत हैं ये साबित हो गया !!

धिक्कार है उस ईश्वर पर और उसे परमेश्वर मानने वाले लोगों पर !!

अब आइये बात करते हैं उस अवतार की जो पापों का नाश करने धरती पर अवतरित हुए !

इन्होंने भी अपने जीवन मे बहुत कमाल किया है एक बार बारिश के दूत को अभिमान हो गया था। दूत का अभिमान चूर करने के लिए इन्होंने एक लीला रची। हुआ कि एक दिन उन्होंने देखा के सभी ग्रामवासी उत्तम पकवान बना रहे हैं और किसी पूजा की तैयारी में जुटे हैं भगवान ने बड़े भोलेपन से अपनी मईया से प्रश्न किया " मईया ये आप लोग किनकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं" नन्हे भगवान की बातें सुनकर मैया बोली लल्ला हम बारिश के दूत की पूजा के लिए अन्नकूट की तैयारी कर रहे हैं। मैया के ऐसा कहने पर भगवान बोले मैया हम इन्द्र की पूजा क्यों करते हैं? मैईया ने कहा वह वर्षा करते हैं जिससे अन्न की पैदावार होती है उनसे हमारे पशुओं को चारा मिलता है। भगवान बोले हमें तो उस पर्वत की पूजा करनी चाहिए जहां हमारे पशु चरते हैं, इस दृष्टि से तो पर्वत ही पूजनीय है और बारिश के देवता तो कभी दर्शन भी नहीं देते और पूजा न करने पर क्रोधित भी होते हैं अत: ऐसे अहंकारी की पूजा नहीं करनी चाहिए।

लीलाधारी की लीला और माया से सभी ने पर्वत की पूजा की। देवराज ने इसे अपना अपमान समझा और मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। प्रलय के समान वर्षा देखकर सभी ग्रामवासी भगवान को कोसने लगे कि, सब इनका कहा मानने से हुआ है। तब भगवान ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर पूरा पर्वत उठा लिया और सभी ग्रामवासियों को उसमें अपने गाय और बछडे़ समेत शरण लेने के लिए बुलाया। यह देखकर मेघदूत और क्रोधित हुए और बारिश को और तेज कर दिया !

  तब भगवान ने चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियत्रित करें और नाग से कहा आप मेड़ बनाकर पानी को पर्वत की ओर आने से रोकें।

मेघराज लगातार सात दिन तक मूसलाधार वर्षा करते रहे तब उन्हे एहसास हुआ कि उनका मुकाबला करने वाला कोई आम मनुष्य नहीं हो सकता इसलिए वे परमपिता के पास पहुंचे और उन्हें सारी बात बताई !

उनकी बात सुनकर परमपिता ने मेघराज से कहा कि आप जिस की बात कर रहे हैं वह भगवान के साक्षात अवतार हैं परमपिता के मुंख से यह सुनकर मेघराज  लज्जित हुए और जाकर भगवान से कहा कि प्रभु मैं आपको पहचान न सका इसलिए अहंकारवश भूल कर बैठा। आप दयालु हैं और कृपालु भी इसलिए मेरी भूल क्षमा करे !

इस तरह जाके ये मामला शांत हुआ !!

अब आइये इस पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर लेते हैं !

बड़े बड़े बांधों से पानी छोड़ने का भी एक सिस्टम होता है इन बांधों से पानी छोड़ने से पहले एक सायरन बजाया जाता है ताकि कोई इंसान अचानक आई बाढ़ में डूब न मरे !

लेकिन पानी बरसाने के इस ईश्वरीय सिस्टम में तो कही कोई चेतावनी नही लोगों ने पूजा नही की तो पानी छोड़ दिया वाह !!

इतना भ्रष्ट सिस्टम तो इंसानों का भी नही होता !

ऐसे भ्रष्ट सिस्टम के विरुद्ध एक आदमी ने आवाज उठाई उसने लोगों को समझाया लेकिन इससे बारिश का अधिकारी नाराज हो गया और उसने मूसलाधार बारिश शुरू कर दी !

हैरत की बात तो ये की परमपिता ये सब देख रहा है लेकिन करता कुछ नही क्योंकि उस परमपिता के ऊपर भी कोई उससे बड़ा है जो एक बड़े से सांप पर सो रहा है !

मतलब धरती पर क्या हो रहा है इनमे से किसी को कोई मतलब नही जिसे पानी को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी दी गई है वो पानी बरसाकर लोगो को बर्बाद करने पर तुला है क्योंकि उसकी चापलूसी में कमी रह गई थी !

और इस कहानी में सबसे बड़ा झूठ यह है की कोई पहाड़ को अपनी उंगली पर उठा लेता है !

अरे भाई पहाड़ थर्माकोल से नही बनता बल्कि इसे बनने में करोड़ो वर्ष लगते है और एक पेड़ की तरह पहाड़ जितना ऊंचा दिखाई देता है उसकी जड़ें भी उतनी ही गहरी होती हैं !

चलिए अब बात करते है ईश्वर के उस नबी की जिससे ईश्वर ने एक पहाड़ पर मुलाक़ात की !!

इस नबी के लोग दुश्मनो के देश से निकलने के बाद बहुत दिनों तक यात्रा करते रहे। जब वे एक पर्वत (अरब) के पास पहुंचे, तब वहीं उन्होंने अपना पड़ाव डाला।
यहां उनके नबी की मुलाक़ात उसके ईश्वर से हुई और वह नबी अपने ईश्वर से पर्वत के पास बात करने चला गया। ईश्वर ने अपने नबी से कहा, तुम अपने लोगों को यह बताना, मैं तुम्हें पराये देश की गुलामी से छुड़ाकर लाया हूं और तुम्हारी रक्षा की है इसलिए अब यदि तुम मेरी आज्ञा मानोगे और मेरे बताये नियमों का पालन करोगे तो मेरी निजी प्रजा बन जाओगे।

तब नबी लोगों के पास आया और उनके सामने ये बातें कही जिनकी आज्ञा ईश्वर ने नबी को दी थी। सब लोगों ने एक साथ नबी को उत्तर दिया- 'प्रभु की सब आज्ञाओं का हम पालन करेंगे।'

तब ईश्वर ने अकेले में मूसा से कहा कि वे लोगों को तीसरे दिन के लिए तैयार होने को कहें। उस दिन ईश्वर लोगों को 10 आज्ञाएं देने जा रहा था।

लोगों ने अपने वस्त्र धोए और खुद को तैयार किया और तीसरे दिन वे सिनाई पर्वत के नीचे आ गए। तभी जोरों से मेघ गर्जन हुआ, बिजली चमकी, पर्वत हिलने लगा और एक बड़ा सा बदल पहाड़ पर उतरा और सारा पर्वत ढंक गया। ईश्वर बादल में से ही उनसे बोला और उन्हें 10 आज्ञाएं दीं।

जब लोगों ने ईश्वर को बोलते सुना तो वे डर गए और ईश्वर के नबी से चिल्लाकर बोले'आप हमसे बात कीजिए अन्यथा हम लोग मर जाएंगे।' 

मूसा ने उत्तर दिया- 'डरो मत, ईश्वर तुम्हारा नुकसान करना नहीं चाहता है। वह चाहता है कि तुम उसकी आज्ञाओं को मानो और उसके विरुद्ध कोई पाप न करो।' तब नबी पर्वत पर ईश्वर के पास गया। वहां ईश्वर ने पत्थर की 2 शिलाओं पर 10 आज्ञाएं लिखीं और मूसा को दीं। (निर्गमन 19-20) 

1. मैं ही तुम्हारा ईश्वर हूं। अपने ईश्वर की आराधना करना, उसको छोड़ और किसी की नहीं।

2. अपने परमेश्वर का नाम व्यर्थ न लेना। (उचित कारण के बिना मेरा नाम न लेना)

3.ईश्वर का दिन पवित्र रखना।

4. माता-पिता का आदर करना। (अपने माता-पिता को प्रेम करना और उनकी आज्ञाओं का पालन करना)

5. मनुष्य की हत्या न करना।

6. व्यभिचार न करना। (एक पवित्र जीवन बिताना)

7. चोरी न करना।

8. झूठी गवाही न देना। (झूठ नहीं बोलना)

9. पर-स्त्री की कामना न करना।

10. पराए धन  (दूसरों के पास जो कुछ है, उसकी लालसा न करना) पर लालच न करना।

अब आइये इस पूरी कहानी पर एक तार्किक नजर डालते हैं !!

सबसे पहले बात करते हैं उस ईश्वर की जो कभी सामने नही आया और हमेशा छुप कर ही नबी से बात करता रहा अरे भाई आप ईश्वर हो आपको किसका डर था !

मैंने तुम्हें आज़ादी दी है इसलिए अब तुम मेरी गुलामी करोगे और मेरी निजी प्रजा बनकर रहोगे ये उस ईश्वर के शब्द हैं जिसे लोग दयालु कहते है अरे भाई जब ये लोग सदियों तक पीढ़ी दर पीढ़ी गुलामी झेलते रहे तब तुम कहा थे ? 

खैर छोड़िये इतना बता दीजिए जब दस आज्ञाएं तुम्हे लोगो को देनी थी तो सबसे पहले तुमने उन्हें पहाड़ पर बुलवा लिया फिर उन्हें बादल बिजली और मेघ से डरा दिया उसके बाद तुम्हने एक पत्थर पर दस उपदेश लिखकर उन्हें थमा दिया !

कही ऐसा तो नही की पत्थर पर दस उपदेश लिखने वाला कोई और ही हो जो आसमान का खुदा नही बल्कि धरती का इंसान हो वर्ना ईश्वर को दस उपदेशों के लिए इतनी बड़ी नौटंकी की जरूरत ही क्या थी !

उसे खुद की आराधना की चिंता है 
उसे अपने नाम की बहुत टेंसन है कि कोई व्यर्थ में उसका नाम न ले ! उसे अपने लिए तय किये हुए एक खास दिन की भी चिंता है बाकी बातें तो सामान्य सी हैं जो सभी जानते हैं !

चारों कहानियों में कुल मिलाकर बात चाटुकारिता की है दुनिया मे आतंक हो व्यभिचार हो गरीबी हो भुकमरी हो ईश्वर को इन सब से ज्यादा अपनी चाटुकारिता और अपनी चमचई से मतलब है !

धर्मों की परस्पर विरोधी बातों में कोई तालमेल नही है इंसानियत और सत्य का दावा करने वाले इन सभी धर्मों की किताबों में इंसानियत और सत्य के नाम पर पाखंड झूठ और हिंसा की मानसिकता भरी पड़ी है इसी वजह से ये सभी धर्म मिलकर विज्ञान शांति और इंसानियत के विरुद्ध षड्यंत्रों में लगे रहते हैं !

जिस धर्म की बुनियाद ही झूठ पर आधारित हो वो कैसे सत्य की बात कर सकता है ?

पूरी दुनिया को ग्लोबल वार्मिंग से उतना खतरा नही है जितना कि इन झूठे धर्मों के दुष्ट धार्मिक षड्यंत्रों से है इसलिये इन धर्मों की पोल खोलना बहुत जरूरी है !

1 comment:

  1. I liked ur some videos.. You have good knowledge. I must say. kya aap mujse is topic pe debate karna chahege?

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