नास्तिक होना क्यूँ जरूरी है ? - तर्कशील भारत

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Tuesday, January 30, 2018

नास्तिक होना क्यूँ जरूरी है ?


बीमारी बढ़ती है तो इलाज के साधन भी पैदा हो जाते हैं महामारी पैदा होती है तो उसके निदान करने वाले चिकित्सक भी सामने आते हैं ठीक वैसे ही जब जब धरती पर धर्म और ईश्वर के नाम पर पाप और पाखंडों का साम्राज्य खड़ा होता है तब तब उन गिरोहों को बेनकाब करने के लिए नास्तिक पैदा होते रहे हैं इसलिए नास्तिकवाद का अस्तित्व धार्मिक गिरोहों के ईश्वरीयआतंक पर टिका हुआ है धरती पर जब तक आस्था और विश्वशों के खोल में सड़ी गली मान्यताओं रिवाजों द्वारा इंसानियत का बलात्कार होता रहेगा नास्तिकता का अस्तित्व बना रहेगा ! जब तक धार्मिक अज्ञानता के अंधकार में मानवता को धकेला जाता रहेगा तब तक नास्तिक पैदा होते रहेंगे !

आजका हमारा यह वीडियो नास्तिकता के भूत वर्तमान और भविष्य पर आधारित है !


प्राचीन काल के इंसान के लिए प्रकृति को समझना कठिन था बारिश तूफान आग बिजली ये सब उसके लिये विपत्ति थे इन्हें रोकना उसके बस की बात नही थी इसलिए वो अपने सामने आने वाली इन प्राकृतिक आपदाओं को दैवीय प्रकोप समझने लगा !

इसी प्रक्रिया में दुनिया की लगभग सभी संस्कृतियों में अनेकों रिवाज परंपराएं और मान्यताएं स्थापित हुई जो आगे चलकर धर्म बन गये !

प्रकृति के प्रति इंसान की अज्ञानता और उसके स्वाभाविक डर ने ही पारलौकिक शक्ति आत्मा पुनर्जन्म जादू टोना भूत प्रेत जैसी कल्पनाओं को जन्म दे दिया !

इंसान जब तक खानाबदोश था तब तक उसे किसी परमात्मा की जरूरत नही थी क्योंकि शिकार के लिए एक जगह से दूसरी जगह तक भागते रहने वाले इस इंसान के पास सोचने के लिए ज्यादा वक़्त नही था !

खेती की शुरुआत के बाद इंसान का भटकना बन्द हो गया खेती के साथ गांव बसने शुरू हुए अब इंसान के पास सोचने के लिए ज्यादा वक्त था इसी दौरान सभ्यताओं का तेजी से विकास हुआ ! 

दुनिया की सभी सभ्यताओं ने अपनी प्राचीन मान्यताओं को परिष्कृत किया और ईश्वर की अलग अलग कल्पनाएं गढ़ी गईं !

सृष्टि को बनाने वाला कोई एक ईश्वर !

ईस्वर की यह नई अवधारणा प्राचीन मान्यताओं और अन्धविश्वाशों का परिष्कृत रूप था ईश्वर की इस नई अवधारणा में बिजली आग बारिश तूफान जैसी विपत्तियों को अलग अलग पूजने की जरूरत नही थी बल्कि इन्हें बनाने वाले किसी एक ईश्वर को ही खुश करना था एकेश्वरवाद की यह नई परिकल्पना पहली धार्मिक क्रांति साबित हुई लेकिन वे सभी प्राचीन विश्वाश पूरी तरह नष्ट नही हो पाए और धीरे धीरे ईश्वर की इस नई अवधारणा में गडड मड्ड होकर रह गए इस तरह ईश्वरवादी सभी सभ्यताएं और भी कुरूप और पाखंडपूर्ण होकर समाज को अंधकार और बर्बरता की ओर ले गईं !

मनुष्य का पिछले छह हजार साल का इतिहास बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दौरान दुनिया के सभी धर्मों की उत्पत्ति और उनका विकास हुआ है !





इन्हीं छह हजार वर्षों में आज के सभी परमात्मा देवी देवता गॉड यहोवा और अल्लाह की पैदाइश हुई है जो पृथ्वी के 4 अरब वर्षो के इतिहास में लापता थे !

दुनिया के इतिहास में पिछले छह हजार वर्षों के दौरान जितनी लड़ाइयां खून खराबे हुए है उन सबके जिम्मेदार भी यही थे ! 

ईश्वर की मान्यताओं ने इंसानी सभ्यता के विकास में शुरुआती गति प्रदान की हो ये संभव है साथ ही यह भी अटल सत्य है कि हजारों वर्षों तक सभ्यताओं के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा ईश्वर पर आधारित धर्म ही बने रहे !

यह भी एक परम सत्य है कि दीपक तभी जलाया जाता है जब अंधकार हो इलाज के लिए रोग का होना भी जरूरी है इसी तरह समय समय पर धार्मिक जहालत के अंधकार को भगाने के लिए ज्ञान का दीपक लिए नास्तिक लोग भी जलते रहे हैं !

जब जब ईश्वर के खोखले और झूठे बुनियाद पर आधारित धर्मों की सड़ी हुई मान्यताओं ने समाज को पाखंडों के विषाणुओ से संक्रमित किया है तब तब उस संक्रमण से बचाने के लिए उसी समाज के कुछ बुद्धिवादी लोग सामने आये हैं जिन्हें नास्तिक कहा जाता है !

नास्तिकों का इतिहास भी उतना ही पुराना है जितना कि ईश्वर अल्लाह और गॉड का है !

भारत की बात करें तो यहां नास्तिकता की जड़े उतनी ही गहरी हैं जितनी कि धार्मिक जहालत की !

आइये जानते हैं दुनिया के कुछ महान नास्तिकों के बारे में ...

भारत मे 3 हजार साल पहले कुछ मुट्ठी भर लोगों ने ईश्वर और धर्म के नाम पर इतना पाखंड पैदा कर दिया कि लोग ईश्वर और धर्म के नशे में प्रकृति और मानवता की अवहेलना करने इसी युग मे भारत के सबसे पहले नास्तिक आचार्य चार्वाक पैदा हुए जिन्होंने कहा "इश्वर एक रुग्ण विचार प्रणाली है , इससे मानवता का कोई कल्याण होने वाला नहीं है "   

आचार्य चार्वाक के बाद एक बार फिर से ईश्वर और धर्म के पाखंडों में पूरा भारतीय समाज डूब चुका था ईश्वर के नाम पर तरह तरह के अनुष्ठान ! पशुओ की बली इंसानों की बलि !
ऐसे दौर में पैदा हुए विश्व के सबसे बड़े नास्तिक तथागत बुद्ध !

 – बुद्ध कहते है की भगवान नाम की कोई चीज नही है! भगवान के लिये अपना समय नष्ट मत करो. तर्क और ज्ञान के मंथन से निकले वैज्ञानिक निष्कर्ष से ही सत्य तक पहुंचा जा सकता है हर वो बात सच नहीं होती जो ग्रन्थों मे लिखी हो या किसी महात्मा द्वारा कही गई हो ! 

अजित केशकम्बल ( 523 ई . पू )अजित केश्कंबल बुद्ध के समय कालीन विख्यात तीर्थंकर थे , त्रिपितिका में अजित के विचार कई जगह आये हैं , उनका कहना था -" दान, यज्ञ , हवन .. लोक और परलोक सब काल्पनिक बातें हैं" 

सुकरात जो बुद्ध की मृत्यु के 80 साल बाद पैदा हुए उनका कहना था ( 466-366 ई पू )"इश्वर शोषण का दूसरा नाम है " 

इब्न रोश्द ( 1126-1198 )इनका जन्म स्पेन के मुस्लिम परिवार में हुआ था , रोश्द के दादा जामा मस्जिद के इमाम थे , इन्हें कुरआन कंठस्थ थी । इन्होने अल्लाह के अस्तित्व को नकार दिया था और इस्लाम को राजनैतिक गिरोह कहाथा । जिस कारण मुस्लिम धर्मगुरु इनकी जान के पीछे पड़ गए थे ।

कॉपरनिकस ( 1473-1543)इन्होने धर्म गुरुओं की पूल खोल थी कॉपरनिकस ने अपने पप्रयोग से ये सिद्ध कर दिया की प्रथ्वी सहित सौर मंडल के सभी ग्रह सूर्य के चक्कर लगाते हैं, जिस कारण धर्म गुरु इतने नाराज हुए की कोपरनिकस के साथ साथ उन सभी सार्थक वैज्ञानिको को कठोर दंड देना प्रारंभ कर दिया जो बाइबल के विरुद्ध जाकर तर्क और विज्ञान की बातें करते थे !

मार्टिन लूथर ( 1483-1546)इन्होने जर्मनी में अन्धविश्वास, पाखंड और धर्गुरुओं के अत्याचारों के खिलाफ आन्दोलन किया इन्होने कहा था " व्रत , तीर्थयात्रा , जप , दान अदि सब निर्थक है " 

सर फ्रेंसिस बेकन ( 1561-1626)अंग्रेजी के सारगर्भित निबंधो के लिए प्रसिद्ध, तेइस साल की उम्र में ही पार्लियामेंट के सदस्य बने , बाद में लार्ड चांसलर भी बने । उनका कहना था"नास्तिकता व्यक्ति को विचार . दर्शन , स्वभाविक निष्ठां , नियम पालन की और ले जाती है, ! 

बेंजामिन फ्रेंकलिन (1706-1790)इनका कहना था " सांसारिक प्रपंचो में मनुष्य धर्म से नहीं बल्कि इनके न होने से ज्यादा सुरक्षित और सुखी होगा" 

चार्ल्स डार्विन (1809-1882)इन्होने ईश्वरवाद और धार्मिक गुटों पर सर्वधिक चोट पहुचाई , इनका कहना था " मैं किसी ईश्वरवाद में विश्वास नहीं रखता और न ही आगमी जीवन के बारे में " 

कार्ल मार्क्स ( 1818-1883)कार्ल मार्क्स का कहना था " इश्वर का जन्म एक गहरी साजिश से हुआ है " और " धर्म एक अफीम है " उनकी नजर में धर्म विज्ञानं विरोधी , प्रगति विरोधी , प्रतिगामी , अनुपयोगी और अनर्थकारी है , इसका त्याग ही जनहित में है । 

पेरियार (1879-1973)इनका जन्म तमिलनाडु में हुआ और इन्होने जातिवाद , ईश्वरवाद , पाखंड , अन्धविश्वास पर जम के प्रहार किया l 

भगत सिंह (1907-1931)प्रमुख स्वतन्त्रता सैनानी भगत सिंह का कहना था "मैं कभी भी उस काल्पनिक ईश्वर का गुणगान नहीं कर सकता जिसके कारण दुनिया में इतनी अव्यवस्था है"

लेनिन– लेनिन के अनुसार " ईश्वर और धर्म की रचना की गई है ताकि जनता में कभी क्रांति की भावना जागृत न हो पाये"

रामस्वरूप वर्मा (संस्थापक- अर्जक संघ)-अर्जक समाज का शोषण करने के लिए ईश्वर, आत्मा, पुनर्जन्म, भाग्यवाद ,जाति-पाति छुआछूत आदि शोषकों ने बनाया है। 

चौधरी महाराज सिंह भारती (प्रणेता-अर्जक संघ)-ईश्वर आधारित धर्म शोषण का हथियार है। 

जगदेव प्रसाद (पूर्व मंत्री-बिहार सरकार)-ईश्वर, आत्मा आदि की कल्पना तमाम लोगों को बेवकूफ बनाकर उनका शोषण करने के लिए कुछ शोषणवादी लोगो द्वारा बनाया गया  है !


ज्योरदानो ब्रूनो को जिंदा जला दिया गया क्योंकि उन्होंने बाइबिल की मान्यताओं को खारिज कर दिया था !

गैलीलियो गैलिली को सिर्फ इसलिए प्रताड़ित होना पड़ा क्योंकि उन्होंने पृथ्वी को ब्रह्मांड का केंद्र मानने वाली बाइबिल की अवधारणा के विरुद्ध जाकर साबित किया था की पृथ्वी ब्रह्मांड का केंद्र नही है !

कोपरनिकस से लेकर सर डार्विन तक न जाने कितने ही महान नास्तिक  धार्मिक गिरोहों की सड़ी हुई घृणात्मक मानसिकता का शिकार हो गए !

लेकिन सूर्य की तरह यह भी एक सार्वभौमिक सत्य है कि सच्चाइ को ज्यादा समय के लिए दबाना संभव नही !

इसी लिए आज के समय मे धार्मिक गिरोहों के व्यापक प्रचारतंत्र के बावजूद नास्तिकों की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है !

कैलिफ़ोर्निया में क्लेरमोंट के पिटज़र कॉलेज में सामाजिक विज्ञान के प्रोफ़ेसर फिल ज़करमैन कहते हैं, "इस समय दुनिया में पहले के मुक़ाबले नास्तिकों की संख्या बढ़ी है, और इंसानों में इनका प्रतिशत भी बढ़ा है."

यह तथ्य गैलप इंटरनेशनल के सर्वे में उभरकर सामने आया है. गैलप इंटरनेशनल के सर्वे में 57 देशों में 50,000 से अधिक लोगों को शामिल किया गया.

सर्वे के मुताबिक़ 2005 से 2011 के दौरान धर्म को मानने वाले लोगों की तादाद 77 प्रतिशत से घटकर 68 प्रतिशत रह गई है, जबकि ख़ुद को नास्तिक बताने वालों को संख्या में तीन प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ है. इसके बावजूद 

दुनिया में लगभग 13 देश ऐसे भी हैं जहां नास्तिकता एक अपराध है और इस अपराध की सजा प्रताड़ना और मौत के रूप में मिलती है।

एक रिपोर्ट के हिसाब से ऐसी सजा देने वाले देश अफगानिस्तान, ईरान, मलेशिया, मालदीव, मॉरिटानिया, नाइजीरिया, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सोमालिया, सूडान, संयुक्त अरब अमीरात और यमन हैं।

हाल ही में बांग्लादेश में तीन नास्तिक ब्लॉगरों को धर्म के खिलाफ वैज्ञानिक तथ्य लिखने के लिए मौत के घाट उतार दिया गया था।

भारत मे नास्तिकता की परंपरा बहुत पुरानी है साथ ही दुनिया के प्रत्येक कोने में ऐसे महान नास्तिक पैदा होते रहे हैं जिन्होंने मानवता को धार्मिक जहालत से मुक्त करवाने का संघर्ष किया ! इस संघर्ष में कई महान नास्तिकों को शहीद होना पड़ा कई महान नास्तिकों को कारावास में जिंदगी गुजारनी पड़ी और कई नास्तिकों को अपना घरबार छोड़ना पड़ा फिर भी मानवता के प्रहरी और पाखंडों के दुश्मन ईश्वर विरोधी इन महान नास्तिकों ने हिम्मत नही हारी और अपने महान बलिदानों से भविष्य के नास्तिकों को प्रेरणा देते रहे !

हम उन सभी महान नास्तिकों को सलाम करते हैं !






1 comment:

  1. शकिल भाई आपका व्हाटसप नंबर दो।।।कब से ढुंढ रहा हूं

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