भारत की सबसे शापित स्थानो की वैज्ञानिक पड़ताल ! - तर्कशील भारत

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Monday, December 25, 2017

भारत की सबसे शापित स्थानो की वैज्ञानिक पड़ताल !


अन्धविश्वाश किसी भी सभ्य समाज के लिए कैंसर के समान होते हैं जो समाज में वैज्ञानिक चिंतन को पनपने से रोकते हैं इन्ही अंधविश्वासों के कारण देश में ऐसे कई स्थान है जिन्हें शापित माना जाता है। मतलब ये जगह किसी शाप के चलते अब या तो भुतहा है या फिर उजाड़ पड़े हैं इन जगहों के बारे में फैलाई गई भ्रामक और झूठी बातों के कारण ही ये दर्शनीय स्थान पर्यटकों की सूची से दूर रहते हैं ।
बहुत लोगों का मानना है कि इन जगहों पर जाने से हमारा अहित हो सकता है ये खूबसूरत स्थान किसी न किसी शाप से जुड़े बताये जाते है इसी वजह से लोग इन जगहों पर जाने से डरते हैं ।


आइये जानते हैं कि भारत में कहां-कहां स्थित है ऐसे शापित स्थान जिन्हें शापित मान कर बदनाम किया गया है । और इनके शापित होने की वैज्ञानिक नजरिये से पड़ताल करते हैं ।

सबसे पहले बात करते हैं मध्यप्रदेश के देवास जिले के गांव गंधर्वपुरी के बारे में जिसे शापित गांव माना जाता है। कहा जाता है कि यह गांव प्राचीनकाल में राजा गंधर्वसेन के शाप से पूरा पाषाण में बदल गया था। यहां का हर व्यक्ति, पशु और पक्षी सभी शाप से पत्थर के हो गए थे। फिर एक धूलभरी आंधी चली जिससे यह पूरी नगरी जमीन में दफन हो गई। इस जगह के बारे में जो बात बताई जाती है वो ये है कि इस नगरी के राजा की पुत्री ने राजा की मर्जी के खिलाफ गधे के मुख के गंधर्वसेन से विवाह रचाया था। गंधर्वसेन दिन में गधे और रात में गधे की खोल उतारकर राजकुमार बन जाता था जब एक दिन राजा को इस बात का पता चला तो उन्होंने रात को उस चमत्कारिक खोल को जलवा दिया, जिससे गंधर्वसेन भी जलने लगा तब जलते-जलते उन्होंने राजा सहित पूरी नगरी को शाप दे दिया कि जो भी इस नगर में रहते हैं, वे पत्थर के हो जाएं तभी से लोग पत्थर के हो गए अब चलिए इस जगह की सच्चाई भी जान लेते हैं  यह प्राचीन बुद्धकालीन नगरी चम्पावती का क्षेत्र था यहां आज भी जिस जगह पर भी खुदाई होती है वहां से मूर्ति निकलती है।  यहां से हजारों की संख्या में बुद्धकालीन मूर्तियां मिली हैं। जमीन से निकलने वाली इन मूर्तियों को लोग अज्ञानता में पत्तर हो चुके इंसान समझने लगे थे इसी अन्धविश्वाश के कारण धीरे धीरे लोगो ने श्राप की कहानी जोड़ कर इस इलाके को शापित घोषित कर दिया ।

बुद्धकालीन मूर्तियों के पुरातात्विक महत्व को देखते हुए Archaeological survey of India ने 1966 में यहां एक संग्रहालय स्थापित किया । जरा सोचिए कोई आदमी दिन में गधा और रात में इंसान भला कैसे बन सकता है ? मान लिया कि वो इतना ही ताक़तवर था की एक मामूली खाल के लिए उसने पूरी नगरी को एक झटके में पत्थर बना दिया तो क्या वो उस जली हुई खाल को दुबारा नही बना सकता था ?

चलिए अब बात करते हैं  शापित किराडु शहर की

1. राजस्थान के बाड़मेर के पास एक ऐसा गांव है, जहां के मंदिरों के खंडहरों में रात में कदम रखते ही लोग हमेशा-हमेशा के लिए पत्थर बन जाते हैं।  कहते हैं कि एक समय था, जब यह स्थान भी आम जगहों की तरह चहल-पहल से भरा था और लोग यहां खुशहाल जीवन जी रहे थे। यहां हर तरह की सुख-सुविधाएं मौजूद थीं, लेकिन एक दिन अचानक इस शहर की किस्मत बदल गई। मान्यता है कि इस शहर पर एक साधु का शाप लगा हुआ है। तब इस शहर में एक सिद्ध संत ने डेरा डाला। कुछ दिन रहने के बाद जब वे संत तीर्थ भ्रमण पर निकले तो उन्होंने अपने साथियों को स्थानीय लोगों के सहारे छोड़ दिया कि आप इनको भोजन-पानी देना और इनकी सुरक्षा करना। संत के जाने के बाद उनके सारे शिष्य बीमार पड़ गए और बस एक कुम्हारिन को छोड़कर अन्य किसी भी व्यक्ति ने उनकी सहायता नहीं की। बहुत दिनों के बाद जब संत पुन: उस शहर में लौटे तो उन्होंने देखा कि मेरे सभी शिष्य भूख से तड़प रहे हैं और वे बहुत ही बीमार अवस्था में हैं। यह सब देखकर संत को बहुत क्रोध आया। उस सिद्ध संत ने कहा कि जिस स्थान पर साधुओं के प्रति दयाभाव ही नहीं है, तो अन्य के साथ क्या दयाभाव होगा? ऐसे स्थान पर मानव जाति को नहीं रहना चाहिए। उन्होंने क्रोध में अपने कमंडल से जल निकाला और हाथ में लेकर कहा कि जो जहां जैसा है, शाम होते ही पत्‍थर बन जाएगा। उन्होंने संपूर्ण नगरवासियों को पत्थर बन जाने का शाप दे दिया फिर उन्होंने जिस कुम्हारिन ने उनके शिष्यों की सेवा की थी, उसे बुलाया और कहा कि तू शाम होने से पहले इस शहर को छोड़ देना और जाते वक्त पीछे मुड़कर मत देखना। कुम्हारिन शाम होते ही वह शहर छोड़कर चलने लगी लेकिन जिज्ञासावश उसने पीछे मुड़कर देख लिया तो कुछ दूर चलकर वह भी पत्थर बन गई। इस शाप के चलते पूरा गांव आज पत्थर का बना हुआ है। जो जैसा काम कर रहा था, वह तुरंत ही पत्थर का बन गया। इस शाप के कारण ही आस-पास के गांव के लोगों में दहशत फैल गई जिसके चलते आज भी लोगों में यह मान्यता है कि जो भी इस शहर में शाम को कदम रखेगा या रुकेगा, वह भी पत्थर का बन जाएगा।

अब आइये इसके सच को भी जान लेते हैं

11वी सदी में राजा दुशलराज ने यहां खजुराहो की तर्ज पर खूबसूरत मंदिरों का निर्माण करवाना शुरू की जिसे बाद में उनके वंसाजों ने पूरा किया 15वी सदी के बाद से इस नगर का पतन होना शुरू हो गया क्योंकि मंदिरों के इस खूबसूरत नगर में पानी की समस्या की समस्या खड़ी हो गई थी इसलिए 16 सदी तक ये नगर वीरान हो गया । बाद में इस नगर के बारे में उन झूठी और भ्रामक बातो का प्रचलन शुरू हुआ जिन्हें आज हम सुनते हैं जरा सोचिए जिन साधु महाराज में इतनी शक्ति थी कि एक पूरे नगर के जिंदा इंसानो को पत्थर बना सकते थे तो क्या उनमे इतनी शक्ति नही थी कि वे अपने उन साथियों के भोजन का इनतजाम भी कर जाते । अगर उनके साथी भूख से तड़प रहे थे तो उसमें सबसे बड़ी गलती तो इन्ही की थी । असल मे ऐसा कुछ कभी हुआ ही नही था ये सब मनगढंत और झूठी बाते हैं ।

अब चलिए बात करते हैं भानगढ़ के किले की

2. भानगढ़ राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित एक एक शहर है। हालांकि इस शहर में कोई नहीं रहता है क्योंकि अब यह शहर पूरा का पूरा खंडहर में बदल चुका है। यहां का एक किला और महल सबसे ज्याता शापित माने जाते हैं। भानगढ़ के किले को आमेर के राजा भगवानदास ने 1573 ई. में बनवाया था। यहां बाजार, गलियां, हवेलियां, महल, कुएं और बावड़िया तथा बाग-बगीचे आदि सब कुछ हैं, लेकिन सब के सब खंडहर हैं। जैसे एक ही रात में सब कुछ उजड़ गया हो। पूरे शहर में एक भी घर या हवेली ऐसी नहीं है, जिस पर छत हो । इस इलाके के शापित होने की दो कहानियां प्रचलित हैं । पहली कहानी है बालूनाथ की कहते हैं कि भानगढ़ में एक गुरु बालूनाथ रहते थे। उन्होंने भानगढ़ के महल के मूल निर्माण की मंजूरी दी थी लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी दी थी कि महल की ऊंचाई इतनी रखी जाए कि उसकी छाया उनके ध्यान स्थान से आगे न निकले अन्यथा पूरा नगर ध्वस्त हो जाएगा। बालूनाथ की ये चेतावनी किसी ने सुनी नहीं और राजवंश के राजा अजब सिंह ने उस महल की ऊंचाई बढ़ा दी जिससे की महल की छाया ने गुरु बालूनाथ के ध्यान स्थान को ढंक लिया और तभी से यह महल शापित हो गया।
दूसरी कहानी एक तांत्रिक की है
 कहानी के अनुसार अरावली की पहाडि़यों में सिंघिया नाम का तांत्रिक अपने तंत्र-मंत्र और टोटकों के लिए जाना जाता था। कहते हैं कि वह मन ही मन भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती को चाहने लगा था। राजकुमारी को पाने के लिए उसने सिर में लगाने वाले तेल को अभिमंत्रित कर दिया था। कहा जाता है कि रत्नावली भी तंत्र-मंत्र और टोटके की जानकार थी। उसने अपनी शक्ति से तेल के टोटके को पहचान लिया और तेल एक बड़ी शिला पर डाल दिया। इस प्रयोग के बाद शिला तांत्रिक की ओर उड़ चली। चट्टान को अपनी ओर आते देख तांत्रिक क्रोधित हो गया। उसने शिला से कुचलकर मरने से पहले एक और तंत्र किया और शिला को समूचे भानगढ़ को बर्बाद करने का आदेश दिया। चट्टान ने रातों-रात भानगढ़ के महल, बाजारों और घरों को खंडहर में तब्दील कर दिया। संतों को बदनाम करने की इससे बड़ी बात और क्या होगी कि एक संत पर पूरे शहर को खंडहर बना देने की कहानि गढ़ दी जाए । जरा सोचिए कि कोई संत इतना अभिमानी कैसे हो सकता है कि वो एक खूबसूरत शहर को मलबे के ढेर में बदल दे ? अगर संत बालूनाथ का ध्यान भंग हो रहा था तो वे किसी और जगह भी जा कर ध्यान कर सकते थे । दूसरी कहानी में एक तांत्रिक है जो एक चट्टान को आदेश दे कर पूरे शहर को ध्वस्त करवा देता है ये कहानी तो पहली कहानी से भी बड़ी गप्प साबित होती है क्योंकि एक निर्जीव चट्टान किसी सनकी तांत्रिक की बात को मानकर शहर को बर्बाद कर दे ये गप्प नही तो और क्या है ? घोर अशिक्षा और वैज्ञानिकता के अभाव में ही लोग इस तरह की गप्पों को सच मानते हैं । असल मे भानगढ़ शहर का कुछ भाग 1699 में आये एक भूकंप से तबाह हुआ था इसके बाद लोगों ने यहां से पलायन शुरू कर दिया और 1735 तक ये शहर पूरी तरह वीरान हो गया ।

3. चलिए अब बात करते है असीरगढ़ के किले की जिसके बारे - कहते हैं की यहाँ स्थित शिव मंदिर में महाभारतकाल के अश्वत्थामा आज भी पूजा-अर्चना करने आते हैं। असीरगढ़ का किला मध्यप्रदेश के बुरहानपुर शहर से 20 किलोमीटर दूर है। कहते हैं कि जो एक बार अश्वत्थामा को देख लेता है, उसका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। असीरगढ़ के बारे में प्रचलित ये कहानी भी बिल्कुल झूठी है क्योंकि देसी विदेशी कई लोगों ने यहां रात बिताकर इस किले से जुड़े सभी अन्धविशेषों को गलत साबित कर दिया है अश्वत्थामा महाभारत का एक पात्र है और ये किला आठवी सदी के बाद बना है तो सोचिये की जब ये किला नही बना था तब अश्वथामा कहाँ रहे थे ।

4. अब बात करते हैं शापित गांव कुलधारा की राजस्थान के जैसलमेर जिले का कुलधरा गांव आज भी शापित माना जाता है। यह गांव पिछले 170 सालों से वीरान पड़ा है। कहते हैं कि कुलधरा गांव के हजारों लोग एक ही रात में इस गांव को खाली कर के चले गए थे और जाते-जाते शाप दे गए थे कि यहां फिर कभी कोई नहीं बस पाएगा। तब से गांव वीरान पड़ा हैं। मान्यता अनुसार कुलधरा गांव घूमने आने वालों के मुताबिक उन्हें यहां हरपल ऐसा अनुभव होता है कि कोई आसपास चल रहा है। बाजार के चहल-पहल की आवाजें आती हैं, महिलाओं के बात करने, उनकी चूड़ियों और पायलों की आवाज हमेशा ही वहां के माहौल को भयावह बनाती है।
आइये इसकी भी तहकीकात कर लेते हैं ।
कुलधरा में 12 मार्च से लेकर 17 मार्च 2009 के बीच rationalist society of india के वोलेंटियर्स की एक टीम लगातार पांच रातो तक पूरे एरिया की छानबीन कर चुकी है जिससे साबित होता है कि भूत प्रेत वाली सारी बातें मनगढंत और झूठी हैं । इस गांव के वीरान होने का सच तो यह है कि  इस गांव का दीवान सालम सिंह बहुत ही नीच और अय्याश आदमी था जिसकी नजर गांव कि एक खूबसूरत लड़की पर पड़ गई थी। दीवान उस लड़की के पीछे इस कदर पागल था कि बस किसी तरह से उसे पा लेना चाहता था। उसने इसके लिए उस लड़की के परिवार और समुदाय पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई कि जब सत्ता के मद में चूर उस दीवान ने लड़की के घर संदेश भिजवाया कि यदि अगले पूर्णमासी तक उसे लड़की नहीं मिली तो वह गांव पर हमला करके लड़की को उठा ले जाएगा। गांववालों के लिए यह मुश्किल की घड़ी थी। उन्हें या तो गांव बचाना था या फिर अपनी बेटी। इस विषय पर निर्णय लेने के लिए सभी 84 गांव वाले एक मंदिर पर इकट्ठा हो गए और पंचायतों ने फैसला किया कि कुछ भी हो जाए अपनी लड़की उस दीवान को नहीं देंगे। फिर क्या था, गांव वालों ने गांव खाली करने का निर्णय कर लिया और रातोंरात सभी उस गांव से ओझल हो गए ।
अब बताइये की जब गांव के लोग खुद ही गांव छोड़ कर कही और बस गए थे तो ये गांव शापित कैसे हो गया और वहां आत्माएं किसकी घूमती हैं भाई ?

हमारे देश मे टूरिस्ट प्लेसेस की कोई कमी नही है लेकिन ज्यादातर प्राचीन महलों किलों और हवेलियों के बारे में ऐसे ही न जाने कितने झूठे किस्से फैलाये गए हैं जिन्हें सुनकर कोई इन जगहों पर जाना नही चाहता ।।
इसलिए सरकारों को झूठी अफवाहों का शिकार इन सुंदर पर्यटन स्थलों पर भी ध्यान देना चाहिए और इन स्थलों के बारे में फैलाई गई झूठी बातों को खारिज कर इनके प्रति लोगों में जागरूकता कायम करना चाहिए ताकि लोग इन टूरिस्ट प्लेसों के बेजोड़ आर्किटेक्चर को भी देख सकें ।।

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