मैं कौन हूँ ? - तर्कशील भारत

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Saturday, November 4, 2017

मैं कौन हूँ ?

मैं कौन हूँ
नहीं जानता
बस
एक जीव मात्र
क्योंकि 
भोजन सुरक्षा और प्रजनन
जीव की इन तीन 
बंदिशों से बाहर 
नहीं निकल पाया हूँ 
कैसे कहूँ की मैं मनुष्य हूँ ?

रोटी कपडा और मकान 
के लिए संघर्षरत मैं ...
मनुष्य होकर भी 
बस एक जीव हूँ 
कुत्ते बिल्ली और सूअर 
के समतुल्य.....

मनुष्य बनने के लिए 
मनुष्यता चाहिए 
समाज चाहिए
सहयोग चाहिए
न्याय समानता और करुणा 
के साथ 
ज्ञान और विज्ञान 
चाहिए 
मान और सम्मान 
चाहिए

लेकिन 
मनुष्यता क्या है
मैं नहीं जानता 
मुझे दौलत के ढेर पर बैठना है
समाज क्या है 
मुझे नहीं पता
मैं तो अपने 
थ्री बीएचके को ही 
अपनी दुनिया समझता हूँ 

न्याय समानता और करुणा 
जैसे शब्द 
मेरे शब्दकोष में नहीं

ज्ञान और विज्ञान
मेरे लिए बस 
धन कमाने के साधन मात्र हैं 

धन संचय से 
पूँजी से
मेरी और मेरी नस्लों की 
भोजन सुरक्षा और प्रजनन 
की समस्याओं का समाधान होगा 
जीवन उनका और आसान होगा 
इसलिए 
मुझे क्षण भर भी 
अवकाश नहीं
व्यस्त हूँ 

मुझे अपनी खिड़की से 
बाहर झाँकने का समय नहीं
व्यस्त हूँ 
अपने बच्चों में मस्त हूँ

कोई बच्चा 
भूख से रोता है 
कोई सड़को पर सोता है
इसमें मैं क्या करूँ ?
क्योंकि मैं एक जीव हूँ 
जीवन जीने की होड़ में 
शामिल
बस एक जीव मात्र
चूहे गिरगिट और मखियों की तरह ...

जीने की प्रतिस्पर्धा में
जोड़ तोड़ होड़ 
और दौड़ में शामिल
मैं....

मेरे लिए रुकना मना है
रुक कर थोड़ा सोचना मना है
मैं कौन हूँ ?

यह जानने के लिए रुका तो
दुनिया मुझे रौंदते हुए 
मुझसे आगे निकल जाएगी
इसी डर से मैं 
कभी मनुष्य न बन सका 
बना
बस एक जीव मात्र
घोडा गधा और खच्चर की तरह ...

एस.प्रेम

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