ईश्वर ने इंसान को क्यूँ पैदा किया ? - तर्कशील भारत

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Tuesday, November 28, 2017

ईश्वर ने इंसान को क्यूँ पैदा किया ?

"जब जब पाप बढ़ता है ईश्वर पाप का नाश करने धरती पर जन्म लेता है या अपने दूत अथवा पुत्र को धरती पर धर्म की स्थापना के लिए भेजता है"

अभी तक ज्ञात लगभग सभी धर्मों की मूल फिलासफी यही है इसलिए इसकी विवेचना आवश्यक है !

सबसे पहले पाप की परिभाषा को जानते हैं किसी मनुष्य द्वारा अपने स्वार्थसिद्धि के लिए किया गया वह कृत्य जिससे किसी दूसरे मनुष्य के मान सम्मान अधिकार और न्याय को क्षति पहुंचे यही पाप की न्यायोचित परिभाषा हो सकती है !

तब ईश्वर मनुष्य के स्वार्थ को ही क्यों नहीं नष्ट कर देता ? जो सभी पापों का मूल है !!

लेकिन पापियों का नाश करने वाले तथाकथित ईश्वर द्वारा स्थापित धर्म और उसके धर्मग्रन्थ कुछ और ही बात करते हैं !

गीता के अनुसार "कोई कितना ही बड़ा अतिशयकारी ही क्यों न हो वह यदि एक बार (गलती से भी) श्रीकृष्ण का नाम ले ले तो उसे साधू ही समझना चाहिए" गीता 9/30

इसका अर्थ हुआ की ईश्वर को पापियों के पाप से ज्यादा अपनी चाटुकारिता की चिंता है !!

कुरान में तथाकथित अल्लाह अपनी धर्मसंस्थापना की पोल खुद ही खोल रहा है देखिये -

"हमने प्रत्येक जातियों में अपने रसूल भेजे , उन्हें तंगियो और मुसीबतों में डाला ताकि वे मेरे सामने गिड़गिड़ायें" कुरान-6/42 ,7/94

ईश्वर को पापियों का नाश ही करना होता तब वह पापियों को पैदा ही क्यों करता ? 

इसलिए यदि ईश्वर का आस्तित्व है तब पापियों का असली बाप और पापों का कारक ईश्वर ही है !!

एस. प्रेम 

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