आतंकवाद की बुनियाद पर खड़ी सभी धर्मों की इमारत - तर्कशील भारत

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Tuesday, November 28, 2017

आतंकवाद की बुनियाद पर खड़ी सभी धर्मों की इमारत

आतंकवाद का धर्म जानने से पहले आतंकवाद की परिभाषा को समझना जरुरी है , धार्मिकता की पराकाष्ठा से उपजी मानसिकता को बलात् थोपने की प्रकिया में शामिल कुछ कट्टरपंथी लोग आतंकी कहलाते हैं और वे दुनिया को अपनी विचारधारा पर चलाने के लिए जिस रास्ते का प्रयोग करते है उसे आतंकवाद कहा जाता है !

इस परिभाषा में फिट होने वाले लोग किसी विशेष धर्म या सम्प्रदाय के लोग हैं ऐसा कहना बिलकुल गलत होगा !

दरअसल धर्म की शोषणवादी थोथी और बकवास बातों को स्थाई रखने के लिए समय समय पर सभी धर्मों को "आतंकवाद" की जरुरत पड़ती है !

दुनिया के प्रमुख किसी भी धर्म से यदि हिंसा युद्ध घृणा निंदा मुर्खता पाखंड आडम्बर षड्यंत्र और अन्धविश्वास जैसे तत्वों को निकाल दे तो उसमे कुछ बचेगा ही नहीं ! 

इन्ही पर सभी धर्मो का अस्तित्व टिका है चाहे वो इंसानियत ज्ञान विज्ञान का कितना ही चिल्ल -पों करे ! इनके बिना कोई भी धर्म इतनी सदियों तक वजूद में ही नहीं होता !  

इन धर्मों की सभी पोथियों में या कहें की धार्मिक साहित्यिक कबाड़ों में हिंसा एक अवश्यम्भावी तत्व जरूर है ! चाहे गीता रामायण कुरआन बाइबिल या कोई भी साहित्यिक धार्मिक कबाड़ हो इन सभी से यदि उपरोक्त तत्वों को निकाल दिया जाये तो उनमे कुछ बचेगा ही नहीं ! 

समस्या यह है की इनको पढने वाले या तो भक्त होते है अनुयाई होते है या श्रद्धालु होते है जो श्रद्धा के चश्मे से इन्हें पढ़ते है !

एस. प्रेम 

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