मैं एक नास्तिक हूँ - तर्कशील भारत

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Saturday, November 4, 2017

मैं एक नास्तिक हूँ

मैं एक नास्तिक हूँ 
ईश्वर की तुम्हारी बनाई तस्वीरों को
मैं बहुत करीब से देखता हूँ
जो मेरे लिए कुरूप हैं 
बेढंगी हैं और बदरंग भी हैं

उनमे भाव नही
संवेदना नही 
आत्मीयता नहीं
वे डरावनी और भयानक हैं 

खोखले कैनवास पर
सड़े हुए रंगों से उकेरी गई
चंद झूठी लाइनों को
तुम खुदा कहते हो 

और अपनी इस बेहूदगी को
धर्म बताकर
दुनिया की मेहनतकश जनता पर 
जबरदस्ती थोप देना चाहते हो

तुम्हारी मक्कारियों को 
मैं खूब समझता हूं 
क्यूंकि मैं एक नास्तिक हूँ

मानवता की खूबसूरत इबारत पर
अपने षड्यंत्रों का 
काला रंग पोतना चाहते हो 

और इस कालिख को 
संस्कृति बता कर
सीधी साधी इंसानियत को 
हैवानियत में बदलना चाहते हो 

तुम्हारे कुकर्मों का बोझ ढोती 
नादान भीड़ को 
धर्म की अफीम चटा कर 
गहरी नींद सुला देना चाहते हो
ताकि तुम आसानी से 
चक्रवर्ती हो जाओ

तुम्हारे इस इरादे को 
मैं खूब समझता हूं 
क्योंकि मैं एक नास्तिक हूँ

इंसानियत की गूंजती 
अट्टहास मारती 
आवाजों को दबा देना चाहते हो 

ताकि सच्ची और तुम्हारे विरुद्ध 
आवाजें अवाम तक न पहुंचे
और
तुम्हारी झूठी और
कपटपूर्ण बातों का दबदबा बना रहे

कौवे की कर्कश कांव कांव में 
कोयल की सुरीली आवाज को 
दबा देना चाहते हो 

याद रखो 

जब सत्य का विस्फोट होता है
तो असत्य की सारी लकीरें
मिट जाती हैं
भेदभाव खत्म हो जाते है
नफरतों की दीवारे ढह जाती है 
और सत्य के इस विस्फोट के साथ ही 
पाखंड और झूठ की लिखी गई
सारी इबारतें 
खाक हो जाती हैं !

सत्य के इस विस्फोट के साथ ही 
अज्ञानता का अंधकार काल 
समाप्त हो जाता है 
साथ ही वे भी मिट जाते हैं
जो अंधकार के साथ 
खड़े होते हैं !

यही इतिहास है 
जिसे तुम 
स्वीकार नहीं कर सकते 
लेकिन वो दिन दूर नहीं 
जब झूठ के आवरण में लिपटी 
तुम्हारी संस्कृति 
शोषण पर आधारित तुम्हारा धर्म 
और 
तुम्हारी सडी हुई 
बीमार मानसिकता से पैदा हुए 
तुम्हारे काल्पनिक 
खुदा इश्वर और गॉड 
सब मिटटी में मिल जायेंगे 

वो दिन दुनिया के लिए 
सबसे हसीन होगा 

मैं उस खुबसूरत दिन की कामना करता हूँ 
क्योंकि मैं एक नास्तिक हूँ !!

एस.प्रेम

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