इस्लाम और नारी - तर्कशील भारत

Header Ads Widget

Friday, November 24, 2017

इस्लाम और नारी

नारी को खेत समझने वाले कुरआन पर आधारित इस्लामिक कानून जैसी किसी अवधारणा को मैं नहीं मानता बल्कि मैं नारी के लिए इस्लाम को एक अभिश्राप समझता हूँ !




नारी के बारे में बहुत ही बेहूदा किस्म की आयतें कुरान में मौजूद हैं जिन्हें पढ़कर इस्लाम में औरतों की औकात का अंदाजा लगाया जा सकता है हदीसों की बात तो और भी निर्लज्जता से भरी हुई है !

मैं कहता हूँ आज खुद को प्रगतिशील कहने और तीन तलाक पर मुल्लाओं को बुरा भला कहने वाली मुस्लिम औरतों को यह सब क्यों नहीं दिखाई देता ?

हक़ की लड़ाई किसे कहते हैं ? 
अरे मुल्लाओं को दोष देने से क्या होगा ? असली जड़ को खोदो न !!
मुल्ला मौलवियों का दोष ही क्या है ? उन्हें उनका अल्लाह और उनका कुरान जैसा कहेगा वो तो बेचारे लकीर के फ़क़ीर उसी पर चलेंगे न !!

तीन तलाक से छुटकारा मिल जाये तो क्या मुस्लिम औरतों को न्याय मिल जायेगा ?

अरे मुझे कुरआन हदीस से एक भी ऐसी बात दिखा दीजिये जिसमे नारी के लिए कोई सम्मानजनक बात लिखी हो !!

जो स्थिति ब्राह्मणग्रंथो में स्त्री की है इस्लाम में स्त्री की औकात भी ऐसी ही है !

एस. प्रेम 

No comments:

Post a Comment

Pages