बढ़ती जनसंख्या मे देश का भविष्य - तर्कशील भारत

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Friday, November 24, 2017

बढ़ती जनसंख्या मे देश का भविष्य

दक्षिण अफ्रीका के सबसे महान नेता शान्ति के अग्रदूत मार्टिन लूथर किंग 9 फरवरी 1959 को अपनी भारत पहुंचे थे दो दिन की अपनी इस राजकीय यात्रा के वित्रान्त में उन्होंने लिखा है ''हम जहां भी गए लोगों की भारी भीड़ दिखी ज़्यादातर लोग गरीब थे  उनका पहनावा भी वैसा ही था बम्बई जैसे शहर में पांच लाख से भी अधिक लोग अकेले बेरोज़गार सडक़ों पर रात बिताते हैं।”

 हवाई अड्डों से अपने आलीशान होटल तक पहुंचते हुए उन्होंने जो देखा उसने उन्हें बहुत विचलित किया अपने संस्मरण में कोरेट्टा स्कॉट किंग (मार्टिन लूथर किंग की पत्नी)ने लिखा है ''कचरे के डिब्बों में खाना ढूंढते सिर्फ गंदी लंगोटी पहने


लोगों को देखकर मेरे पति बहुत विचलित हुए ऐसी खिन्न कर देने वाली गरीबी तो हमने अफ्रीका में भी नहीं देखी थी।”

इस बात के 57 वर्ष बीत चुके हैं लेकिन तस्वीर नहीं बदली अभी हाल ही में आई यू एन की एक रिपोर्ट के अनुसार "भारत दुनिया का सबसे भूखा देश है !"

राष्ट्र पेड़ पौधे नदियों तालाबों पहाड़ों और झरनों की तय की गई सीमाओं से नहीं बनता राष्ट्र बनता है लोगों से उनकी उम्मीदों से भूख कुपोषण बेरोजगारी गरीबी से मुक्ति ही किसी मुल्क की पहचान होती है भारत जैसे बड़े और आबादी के भार से जूझते किसी भी मुल्क के लिए गरीबी और भूख से मुक्ति बड़ी चुनौती हो सकती है परंतु यह असंभव नहीं हो सकता !

 भारत की बढ़ती आबादी और इस पर सरकारों की उदासीनता इस भयंकर गरीबी को असंभव बना रही है !

जनसँख्या की बेतहाशा वृद्धि से ही देश की अन्य सभी समस्याएं जुडी हुई है जनसँख्या बढेगी तो बेरोजगारी बढ़ेगी , बेरोजगारी से गरीबी बढ़ती है , गरीबी से अशिक्षा , अशिक्षा से अव्यवस्था भ्रस्टाचार और इन सबसे पैदा होती है अराजकता जो आज हम सब झेल रहे हैं !

विशेषज्ञों का मानना है की यदि आबादी की बेतहाशा वृद्धि को समय रहते नहीं रोका गया तब केवल 50 वर्षो में ही यह आबादी 260 करोड़ हो जायेगी !

एस. प्रेम 

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