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Thursday, October 26, 2017

Who Is Real GOD ?

 Who Is Real God ?

पूरा यूनिवर्स तीन ही सिद्धांतों पर काम करता है वह है GENERATE OPERATE और DESTROY यानि सृजन सञ्चालन और नष्टिकरण । यूनिवर्स के इसी नियम से आकाशगंगाये बनती हैं सौरमंडल बनते हैं और ब्रह्माण्ड के सभी तत्व बनते हैं । इन्ही तीन सिद्धांतों से सृष्टि चलती है चाँद और सितारे बनते है पृथ्वी बनती है और सूरज का चक्कर लगाती है । पृथ्वी पर जलवायु समुद्र पेड़ पौधे और मौसम काम करते हैं । इसी प्रक्रिया में जड़ से चेतन बनता है और विकास की विभिन्न प्रक्रिया से गुजरते हुए वह अनेकों रूपों में विभाजित होता जाता है । जीव के यह विभिन्न रूप तीन सिद्धांतों में अपने विकास की प्रक्रिया पूरी करते हैं वह है भोजन सुरक्षा और सेक्स भोजन उसके विकास के लिए सुरक्षा उसके अस्तित्व को बचाये रखने के लिए और सेक्स प्रजनन द्वारा उसके DNA को अनंतकाल तक जीवित रहने की अभिलाषा के लिए । यही है जीवन । भोजन सुरक्षा और सेक्स ।

मनुष्य जीवन की इस परिभाषा से अलग नहीं है मनुष्य का पूरा जीवन भी इन्हीं तीन सिद्धांतों पर ही चलता है चाहे वह कितना ही सभ्य हो जाये फिर भी वह जिव की इन बंदिशों से मुक्त नहीं हो सकता । अब सवाल यह है कि जिन तीन सिद्धांतों पर ब्रह्माण्ड काम करता है उसमे इतना संतुलन क्यों हैं ? वह कौन सी शक्ति है जो ब्रह्माण्ड में तत्वों का सृजन करती है ? य्यानी generate करती है । वह कौन सी शक्ति है जो यूनिवर्स के तत्वों का सञ्चालन करती है । यानि ऑपरेट करती है । वह कौन है जिसके कारण तत्वों का विनाश होता है य्यानी यूनिवर्स के तत्वों को Destroy कौन करता है !

क्या सचमुच कोई God है जो सृष्टि को बनाता है चलाता है और बिगाड़ता है ? यह सवाल मनुष्य के लिए नए नहीं हैं । यह सवाल तो लाखों वर्षों से मनुष्य की जिज्ञासा का केंद्र रहे हैं और इन्ही प्रश्नों ने सैंकड़ों धर्म और अनेकों ईश्वर पैदा कर दिए फिर भी मनुष्य की यह पुरातन जिज्ञासा बरक़रार है ।

धर्म ने कभी मनुष्य की जिज्ञासाओं को शांत नहीं किया बल्कि प्रश्नों के डर से सभी धर्म ने कछुए की तरह पाखंडों और अन्धविस्वशों के मजबूत खोल बना लिए और सवालों के प्रहार से बचे रहे । क्योंकि इन प्रश्नों का उत्तर इनके पास नहीं है ।
धर्मों की बकवास और बेहूदगी से अगल विज्ञान के विकास ने मनुष्य की जिज्ञासाओं को हल करने की कोशिश जरूर की ..
धर्म के मजबूत खोल में विज्ञान ने अनेकों छेद कर डाले हैं । सृस्टि कैसे काम करती है ? इसका सबसे पहला वैज्ञानिक विश्लेषण तथागत बुद्ध ने किया । आधुनिक विज्ञान की उत्पत्ति के सैकड़ों वर्ष पहले प्रतीत्यसमुत्पाद का सिद्धांत बुद्ध ने दिया । क्रिया और कारण ॥ 

जहाँ क्रिया है वहां कारण भी होगा ।

बारिश होती है यह एक क्रिया है उसका कारण है बादल ॥ बादल बनते हैं यह भी एक क्रिया है उसका कारण है समुद्र का वाष्पित होना ॥ समुद्र का वाष्पित होना भी एक क्रिया है उसका कारण है, गर्मी...

गर्मी होना भी एक क्रिया है जिसका कारण है सूर्य । सूर्य के अंदर भी क्रिया है हाइड्रोजन और हीलियम की अभिक्रिया से सूर्य की प्रचंड  ऊर्जा पैदा होती है । इसी तरह ब्रह्माण्ड के सभी तत्वों के सृजन संचालन और नष्टिकरण के पीछे क्रिया और कारण का सिद्धांत यानि प्रतीत्यसमुत्पाद काम करता है । ब्रह्माण्ड में अगर क्रिया है तो उसके पीछे कोई न कोई वजह या कारण जरूर छिपा होगा और जहाँ कारण नहीं होगा वहीँ कोई ईश्वर छुपा हो सकता है । लेकिन विज्ञान के अभी तक के शोधन में किसी क्रिया के पीछे कोई कारण न हो ऐसा कोई उदहारण नहीं मिला है इसका अर्थ यह है कि यूनिवर्स के सृजन संचालन और नष्टिकरण में किसी ईश्वर का हाथ नहीं है ।

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