लाल बत्ती - तर्कशील भारत

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Friday, October 27, 2017

लाल बत्ती



राहुल की माँ 
बड़े प्यार से 
अपने प्यारे से बच्चे को 
जगाती है 
क्योंकि उसे स्कूल जाना है 
पढ़ना है
नाम कमाना है
शोहरत हासिल करना है ।

असलम की माँ भी
असलम को दुलार से उठाती है
असलम को भी 
पढ़ लिखकर
अपने अब्बू की तरह 
बड़ा आदमी बनना है ।

राहुल और असलम की माँ 
हर सुबह 
बडी उम्मीदों से अपने लाडलों को 
तैयार कर स्कूल भेजती है ।

रोज सुबह बच्चे को 
स्मार्ट बनाती है
नाश्ते में 
हाइजीन का खयाल रखते हुए
अपने कठोर हाथों से बचे के 
कोमल जूतों को साफ करती है ।

राहुल और असलम के 
अपार्टमेंट के 
सामने वाली लाल बत्ती पर भी
 एक माँ रहती है । 
राहुल और असलम जैसे ही 
इस मां के भी दो बच्चे हैं 
उनमे से एक पप्पू भी है । 

जिसे हर सुबह 
राहुल और असलम की तरह ही
जगना होता है ।

पप्पू की माँ के दिल मे 
राहुल और असलम की माँ जैसी
 ममता नही 
इसलिए वो पप्पू को 
कभी दुलार से जगाती नही ।

पप्पू के बालों को खींच कर 
उसे दो चमाट लगाते ही 
वो जग जाता है ।

जगते ही उसे पता है की
उसे क्या करना है ।

फुटपाथ का 
एक खाली पार्ट ही 
उसका अपार्टमेंट है 
अपने इसी 
घर के किसी कोने में 
उसका वो बेशकीमती समान पड़ा है 
जिससे उसकी और उसके परिवार की 
रोजी रोटी चलती है ।

राहुल के पापा की सरकारी जॉब है 
तो असलम के अब्बू को भी 
एक मल्टीनेशनल कंपनी से 
मोटी सेलरी मिलती है
इसलिए दोनों के पैरेंट्स 
वीकेंड्स पर
उन्हें बाहर ले जाते है ।

पप्पू के पैरेंट्स वीकेंड्स पर
देर रात तक मांगते हैं
क्योंकि उन्हें सप्ताह के आखिरी दिनों में 
बीस तीस रुपये 
ज्यादा मिलने की उम्मीद होती है ।

राहुल और असलम 
साल में एक बार 
स्कूल की ओर से
पिकनिक जरूर जाते हैं ।

पप्पू लाल बत्ती पर ही 
जिंदगी के गुर सीखता है
इसलिए फुटपाथ ही उसका स्कूल है 
साल में कभी कभार
दूसरी लाल बत्ती के 
किसी दोस्त के साथ 
पास के नाले में जाकर 
गांजे के दो चिलम मार लेता है 
इस तरह वह 
अपनी पिकनिक
नाले में ही मना लेता है ।

राहुल और असलम को
बड़ा होकर
बड़ा आदमी बनना है ।

पप्पू होश संभालते ही 
बड़ा हो गया था ।

राहुल और असलम को
बड़े होकर कमाना है ।

पप्पू पैदा होते ही 
कमाने लगा था ।

राहुल और असलम को 
स्कूल का होमवर्क करना होता है ।

लेकिन पप्पू को आजादी है
उसे होम वर्क की जरूरत नही पड़ती
हाँ कभी कभी 
देर रात तक 
समान बेचना होता है 
ताकि दिन की मंदी कवर हो जाये ।

एक ही फ्लैट में रहते हुए
राहुल और असलम 
दोनों एकदूरे से नही मिलते ।

लेकिन पप्पू
रोज हजारों से मिलता है ।

राहुल और असलम की गाड़ियों को
उनका सर्वेंट साफ करता है ।

लेकिन पप्पू
रोज बिना किसी तनख्वाह के
हजारों गाड़ियों के शीशे
साफ करता है ।

राहुल और असलम के घर मे
दीवार में टंगा महंगा TV है 
जिस पर वे दोनों 
कार्टून देखते हैं ।

पप्पू के घर मे 
कोई दीवार ही नही
इसलिए 
उसे TV की जरूरत भी नही
हाँ
उसके पापा को TV है
इतना उसे पता है 
और वो बिना TV के ही 
रोज सड़क पर 
कार्टून देखता है ।

बड़ा होकर 
राहुल और असलम 
जब अपनी महंगी गाड़ी में
कभी इस लाल बत्ती से गुजरेंगे ।

उनका सामना पप्पू से होगा 
जो तब भी
हाथ मे कपड़ा लिए 
इनकी गाड़ियों के 
शीशे साफ करने जरूर पहुंचेगा ।

लेकिन
राहुल और असलम के पास 
शीशा खोलने का वक़्त नही होगा ।


-शाकील प्रेम

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