धरती पर पहला इंसान कौन था ? - तर्कशील भारत

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Friday, October 27, 2017

धरती पर पहला इंसान कौन था ?



आदिकाल का मनुष्य सृष्टि के रहस्यों को नही जानता था इसलिए वो प्रकृति में घटने वाली घटनाओं से बहुत डरता था । वो नही जानता था कि धरती कैसे बनी ? जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई ? इंसान कैसे बना ? धरती कैसे काम करती है ? रात और दिन कैसे होते है ?

सृस्टि के इन तमाम सवालों ने इंसान को बहुत परेशान किया है जब से इंसान खानाबदोश प्राणी से सामाजिक मनुष्य बना है तभी से वह सृष्टि के रहस्यमय प्रश्नों का हल ढूंढ रहा है । इन प्रश्नों को हल करने की इसी प्रक्रिया में मनुष्य ने कई धर्म और अनेकों ढकोसले पैदा कर लिए क्योंकि इन अबूझ प्रश्नों को समझने के लिए उसके पास अटकलों के सिवा कोई तरीका नही था ।आधुनिक काल मे विज्ञान की उन्नति ने मनुष्य के अनेकों प्रश्नों को हल कर दिया हैं 


आइये इन प्रश्नों का वैज्ञानिक विश्लेषण करते हैं ।


लगभग 13 अरब 70 करोड़ वर्ष पहले हमारे इस विराट अनंत और हैरतअंगेज यूनिवर्स का जन्म हुआ । ब्रह्मांड के जन्म की इसी थ्योरी को हम बिग बैंग थ्योरी कहते हैं । बिग बैंग से पहले क्या था इस पर वैज्ञानिक अलग अलग थ्योरी देते हैं ।

वर्तमान के सबसे बड़े अस्ट्रोफिजिसिस्ट स्टीफन हॉकिंग की थ्योरी के अनुसार हमारा यूनिवर्स किसी विशाल multyvars का हिस्सा हो सकता है जहाँ हर पल करोड़ो यूनिवर्स पैदा होते है और हर पल करोड़ो यूनिवर्स मरते भी हैं ।
हमारा यूनिवर्स अपनी शुरुआत से ही फैलता चला गया बिग बैंग की शुरुआती टक्कर में जो ऊर्जा पैदा हुई उससे मैटर और एंटीमैटर पैदा हुए उन दोनों के घर्षण से शुरुआती 12 प्रकार के एलिमेंट बने जिनमे से एक हाइड्रोजन था ।
हाइड्रोजन के अणुओं से ही हीलियम बना । हाइड्रोजन और हीलियम से बने अरबों खरबों सितारे ।
हाइड्रोजन और हीलियम का यह खेल पूरे ब्रह्मांड के कोने कोने में हो रहा था जिससे बनी अरबों खरबों आकाश गांगये ।
इस तरह शुरुआती 5-6 अरब वर्षों में ही ब्रह्मांड जगमगा उठा ।

हमारे यूनिवर्स की शुरुआत के आठ अरब वर्ष के बाद हमारी आगशगंगा मिल्कीवे के किसी कोने में हाइड्रोजन के बादल सघन हो रहे थे । ग्रेविटी के कारण हाइड्रोजन के विशाल बादलों ने हमारे सूर्य का रूप लेना शुरू किया करीब 5 अरब साल पहले शुरू हुई यह प्रक्रिया करोडो वर्षों तक चलती रही । इसके केंद्र में बना एक विशाल सूरज जो आज के हमारे सूरज से काफी बड़ा था सूर्य बनने की प्रक्रिया में बचे मलवों ने सैंकडों पिंडो का रूप धारण किया ये सभी पिंड गुरुत्व के कारण केंद्र में स्थित बड़े पिंड का चक्कर लगाने लगे इस तरह बना हमारा सौरमंडल । शुरुआती सौरमंडल में सैंकड़ो ग्रह थे हजारों पिंड थे लाखों उल्का पिंड थे और करोड़ों अरबों की तादात में विशाल पत्थर थे जो अंतरिक्ष मे सूर्य का चक्कर लगा रहे थे । साढ़े चार अरब वर्ष पहले के उस सौरमंडल में कुछ बृहस्पति से भी बड़े ग्रह थे और कुछ प्लूटो से भी छोटे। समय के अंतराल में इनमे से अधिकांश ग्रह आपस मे टकरा गए जिससे ग्रहों की संख्या कम हो गई इन ग्रहों की टक्कर से बिखरे मलबों से इन ग्रहों के चंद्रमा बने ।
चार अरब वर्ष पहले सौरमंडल के सौ के करीब ग्रहों के बीच एक विशाल पिंड जो सूर्य का चक्कर लगा रहा था जिससे एक दूसरे बड़े पिंड की भयंकर टक्कर हो गई इस टकराव से उस पिंड का 25 प्रतिशत भाग मलबे में तब्दील हो गया और शेष बचे भाग ने धीरे धीरे एक ग्रह का रूप धारण किया इस तरह हमारी पृथ्वी का जन्म हुआ और इस टक्कर से पैदा हुए मलबों के ढेर ने धीरे धीरे एक और छोटे पिंड का रूप धारण किया जो हमारा चंद्रमा बना ।

शुरुआती पृथ्वी आज की हमारी पृथ्वी से एकदम अलग थी पृथ्वी पर ठोस धरातल के नाम पर धरती के गर्भ से निकलने वाले मैग्मा और लावा की भरमार थी तापमान 400 से 1600 डिग्री सेल्सियस न कोई पहाड़ न नदी न समुद्र चारों ओर आकाश से बरसते आग के गोले और धरातल पर बहती आग की नदियां । ऐसी थी हमारी शुरुआती पृथ्वी

करीब 3.8 अरब वर्ष पहले तक पृथ्वी का तापमान कुछ कम हुआ धरती पर 20 करोड़ वर्षों से धधकते लावा और मैग्मा के बादल बरसने लगे इस तेजाबी बारिश ने 10 करोड़ वर्षों में विशाल रासायनिक समुद्र का निर्माण कर दिया ।
3.7अरब साल पहले हमारी पृथ्वी तेजी से बदलने लगी विशाल समुद्र से पृथ्वी का 80 प्रतिशत भाग पानी मे डूब चुका था शेष 20 प्रतिशत जो भाग बचा था उसे पैंजिया लैंड कहा जाता है ।
ये पेनिजिया महाद्वीप भी टूटने लगा इसके कई भाग एक दूसरे अलग होकर दूर जाने लगे और धरती गोल होने के कारण एक दूसरे से अलग हुए ये भूखंड फिर से एक दूसरे से टकराने लगे विशाल भूखंडों के इस महटक्कर से विशाल पर्वतों के निर्माण हुए ।
पर्वतों के निर्माण ने फिर से धरती को बदला समुद्र का पानी सूर्य की प्रचंड गर्मी से वाष्पित होकर इन पहाड़ों पर बरसने लगा और इस तरह करोड़ो वर्षों में बड़े बड़े ग्लेशियरों के निर्माण होने लगे । 30 करोड़ वर्षों में पृथ्वी पर वातावरण बनने लगा मौसम चक्र बनने लगे हालांकि ये परिवर्तन जीवन के अनुकूल नही थे फिर भी समुद्र की गहराइयों में जीवन की प्राथमिक इकाइयों के संकेत दिखाई देने लगे थे ।
समुद्र की गहराइयों में हो रही रासायनिक अभिक्रियाओं ने शुरुआती सूक्ष्म एक कोशिकीय जीवों का निर्माण किया जीवन के इन शुरुआती तत्वों ने पृथ्वी पर स्थित कार्बन डाई ऑक्साइड को सोखकर ऑक्सीजन का निर्माण करना शुरू कर दिया ।
इन माइक्रो ऑर्गेनिज्म से कई प्रकार के सूक्ष्म बैक्टीरिया विकसित होने लगे उसके बाद के करोड़ों वर्षों में इन सूक्ष्म एक कोशिका वाले जीवों से बहुकोशिकीय जीव विकसित हुए ।
करीब तीन अरब वर्ष पहले की पृथ्वी काफी बदल चुकी थी अब पृथ्वी पर पर्याप्त रूप में ऑक्सीजन था पानी था नदियां थी समुद्र के गर्भ में अनेकों छोटे जीव पल रहे थे विकसित हो रहे थे इसी दौर में जीवों की अनेकों नई प्रजातियां पैदा हुई ।
लेकिन जीवन का यह खेल केवल समुद्र में ही हो रहा था महाद्वीप सुनसान थे वहां अभी जीवन के नाम पर काई जैसा तत्व ही उपलब्ध था जो धीरे धीरे विकसित हो रहा था और धीरे धीरे द्वीपों की बंजर जमीन भी हरियाली में बदलने लगी वहां भी शुरुआती घास पैदा होने लगे जीवन की जो प्रतिस्पर्धा समुद्र में चल रही थी वह द्वीपो पर भी होने लगी ।
लेकिन यहां ये होड़ विभिन्न प्रकार की घास की प्रजातियों में थी जो अलग अलग पेड़ पौधों का रूप ले रहे थे वही समुद्र में बहुकोशिकिय जीव विभिन्न प्रकार के कीड़े मकौड़े और मछलियों के रूप में विकसित होने लगे थे ।
विकास की इस चरम प्रतियोगिता के दौर में कुछ समुद्री जीवों ने समुद्र से बाहर निकलकर धरातल पर कदम रखा जहां उनके लिए प्रतिस्पर्धा बिल्कुल नही थी बस उन्हें नए माहौल के हिसाब से खुद को बदलना था ।
पचास करोड़ वर्ष के बाद यानी आज से करीब 2 अरब पचास करोड़ साल पहले की दुनिया मे धरातल पर सबसे पहले कदम रखने वाली मछलियों के वंसज विकास की बेहद कठिन प्रक्रिआयो से गुजरते हुए विशाल जीवो के रूप में सामने आए ।
आगे चलकर यही विशाल जीव डायनासोर के रूप में विकसित हुए जिन्होंने लंबे अरसे तक पृथ्वी पर राज किया ।
करीब 6 करोड़ साल पहले पृथ्वी से एक भयंकर धूमकेतु टकराया जिसने डायनासोरो के विशाल साम्राज्य को एक झटके में खत्म कर दिया । इस टक्कर ने पृथ्वी से बड़े जीवों का बिल्कुल सफाया कर दिया दो फुट से ऊपर के सभी जीव खत्म हो गए इनके साथ ही पृथ्वी के लगभग 90 प्रतशित जीव खत्म हो गए जो छोटे जीव बच गए उन्होंने परिस्थियों का सामना किया लाखों वर्षों में इन जीवों ने खुद को कई अलग अलग प्रजातियों में विकसित कर लिया ।
करीब 1.2 लाख वर्ष पहले इंसान और वानर की सभी प्रजातियों के पूर्वज जीव की किसी एक ही शाखा से निकल कर अलग अलग परिस्थितियों में अलग अलग प्रजातियों के रूप में विकसित हुए ।
आधुनिक मनुष्यों के पूर्वज दो लाख वर्ष पहले अफ्रीका के इथोपिया में विकसित हुए करीब 80 हजार वर्ष पहले इंसानों का एक छोटा सा दल नई दुनिया की तलाश में अफ्रीका से यमन के रास्ते 16 किलोमीटर का समुद्री रास्ता पार करते हुए यूरोप पहुच गया ।
यूरोप को बसाते हुए करीब 65 हजार वर्ष पहले तक इंसान ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच चुका था और हिमयुग के दौरान करीब 45000 साल पहले तक इंसानों ने अमेरिका को भी बसा दिया ।
यही थी सृष्टि की कहानी एक मामूली जीव से मनुष्य बनने की कहानी प्रकृति की इस पूरी कहानी में संघर्ष है परिवर्तन है सृजन है विखंडन है निर्माण है विध्वंश है लेकिन एक चीज कहीं नही है और वो है ईश्वर ।

सभी धर्मों की बुनियाद मनुष्य की अज्ञानता पर टिका हुआ है जिसके दूर होते ही पाखंडों का रेत का महल भरभरा कर गिर जाना चाहिए लेकिन आधुनिक विज्ञान द्वारा इन प्रश्नों के पीछे का वैज्ञानिक सत्य ढूंढ निकालने के बावजूद धर्म और पाखंडों का किला अभेद दिखाई दे रहा है जिसका कारण है धार्मिक गिरोहों का व्यापक प्रचार तंत्र और आम आदमी की पहुंच से वैज्ञानिक शिक्षा को दूर रखने का व्यापक पूंजीवादी षड्यंत्र

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